रिया खानोलकर का आरोप: 'वोट चोरी' टूलकिट है, नेहा बोरा बांग्लादेशी कट्टरपंथियों से लेती हैं प्रेरणा
सारांश
मुख्य बातें
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रिया खानोलकर ने 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई में 'वोट चोरी' और एसआईआर जैसे मुद्दों को उठाने वाले विपक्षी आंदोलन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कथित तौर पर आरोप लगाया कि ये मुद्दे केवल एक सुनियोजित 'टूलकिट' का हिस्सा हैं और इनका वास्तविक उद्देश्य देश में अराजकता फैलाकर सत्ता परिवर्तन करना है।
मुख्य आरोप और बयान
रिया खानोलकर ने कहा, 'इन सबके चेहरे अब बेनकाब हो चुके हैं। वोट चोरी और एसआईआर जैसे मुद्दे केवल एक औजार के रूप में इस्तेमाल किए गए थे — यह एक टूलकिट का हिस्सा था, क्योंकि इसका मुख्य लक्ष्य सत्ता परिवर्तन करना था।' उन्होंने नेहा बोरा के जेएनयू दौरे का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ बोरा ने उमर खालिद को अपनी 'प्रेरणा' बताया और कहा कि उन्होंने सक्रियता उन्हीं से सीखी है।
खानोलकर के अनुसार, 'यह कोई सामान्य घटना नहीं है।' उन्होंने एक के बाद एक कई घटनाओं को जोड़ते हुए कहा कि कॉमेडियन कुणाल कामरा का उमर खालिद के पक्ष में इंस्टाग्राम पर चार पन्नों का पत्र पोस्ट करना और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण का नेहा बोरा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करना — ये सब एक ही बड़ी योजना के संकेत हैं।
नेहा बोरा पर विशेष निशाना
रिया खानोलकर ने नेहा बोरा पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बोरा ने एक पत्रकार को 'निर्वस्त्र करने की धमकी' दी थी क्योंकि वह आलोचना बर्दाश्त नहीं कर पा रही थीं। इससे भी बड़ा आरोप यह लगाया कि बोरा ने खुद स्वीकार किया है कि उन्हें सत्ता परिवर्तन की सोच के लिए बांग्लादेश की कट्टरपंथी ताकतों से प्रेरणा मिली है।
खानोलकर ने कहा, 'उमर खालिद वही व्यक्ति है जिसने कहा था कि कश्मीर पर भारत ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। ऐसे लोग दिल्ली दंगों के मामले में यूएपीए के तहत गिरफ्तार हैं, जो आतंकवाद से जुड़ा कानून है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें आश्चर्य नहीं होगा अगर ऐसे लोग भविष्य में हाफिज सईद जैसे व्यक्तियों को प्रेरणा बताने लगें।
आंदोलन की विफलता और अदालत से परहेज़ पर सवाल
खानोलकर ने आंदोलन की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुंबई और दिल्ली में हुए सभी विरोध-प्रदर्शन विफल रहे। उनके अनुसार जब प्रदर्शनकारियों को अदालत जाने के लिए कहा गया, तो वे नहीं गए और इसके बजाय सड़कों पर हंगामा किया।
'इनके पास आज तक कोई प्रमाण नहीं है। अगर प्रमाण होते तो वह आज सबके सामने होते,' — खानोलकर ने कहा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके और सीजेपी के खिलाफ मुंबई में पहले भी विरोध किया जा चुका है।
अंतरराष्ट्रीय आयाम पर टिप्पणी
खानोलकर ने लंदन में हुए प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया और कहा कि वहाँ इन प्रदर्शनकारियों के जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में भी लोग आए, जो कथित तौर पर इस 'बड़े गठजोड़' की पुष्टि करता है।
उन्होंने फ्रांस की मीडिया की भारत-विषयक रुचि को भी 'आश्चर्यजनक' बताया और इसे इसी कथित साजिश से जोड़ा। उन्होंने अंत में कहा, 'जो लोग चाहते हैं कि देश में अराजकता फैले और जो आतंकवादियों के प्रति सहानुभूति रखते हैं, उनके खिलाफ हम हमेशा आवाज उठाएंगे।'