महुआ मोइत्रा को अदालत का झटका: 'वोट चोर' पोस्ट 24 घंटे में हटाने का आदेश, मुख्य सचिव की मानहानि याचिका पर सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता की अलीपुर निचली अदालत ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कृष्णानगर लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा को निर्देश दिया कि वे पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल के विरुद्ध की गई दो विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट आदेश मिलने के 24 घंटे के भीतर हटा दें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मोइत्रा इस मामले से जुड़ी कोई नई आपत्तिजनक पोस्ट न डालें और न ही पुरानी पोस्ट को दोबारा साझा करें।
मामले की पृष्ठभूमि
मनोज कुमार अग्रवाल उस समय पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पद पर थे, जब राज्य में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया चल रही थी। इस दौरान मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर अग्रवाल को 'वोट चोर' संबोधित करते हुए दो पोस्ट किए — एक 3 अक्टूबर को और दूसरा 6 अक्टूबर को। अग्रवाल ने पहले एक कानूनी नोटिस भेजा और फिर ₹10 करोड़ के मुआवज़े की माँग करते हुए मानहानि का दीवानी मुकदमा दायर किया।
अदालत का तर्क और आदेश
अदालत ने माना कि मोइत्रा की पोस्ट में केवल SIR प्रक्रिया की आलोचना नहीं थी, बल्कि तत्कालीन CEO के रूप में अग्रवाल पर गैरकानूनी कार्य करने का प्रत्यक्ष आरोप भी लगाया गया था। जज ने यह भी नोट किया कि कृष्णानगर की सांसद इन गंभीर आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकीं, जिससे इन आरोपों का कानूनी आधार संदिग्ध हो जाता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जनहित के दायरे में SIR पर चर्चा या आलोचना करना किसी का भी अधिकार है। परंतु इस आलोचना की आड़ में किसी सरकारी अधिकारी को लक्षित कर मानहानिपूर्ण टिप्पणी करना कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।
मोइत्रा की प्रतिक्रिया
अदालती आदेश के तुरंत बाद मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, 'मैं वोट चोर को वोट चोर कहने के अपने अधिकार को कायम रखने के लिए अदालत में एक आवेदन दायर करूंगी।' यह बयान दर्शाता है कि मोइत्रा इस आदेश को अदालत में चुनौती देने की तैयारी में हैं।
आगे की कार्यवाही
निचली अदालत ने मोइत्रा को एक नोटिस भेजने का भी निर्देश दिया है, जिसमें उनसे यह बताने को कहा जाएगा कि उनके बयानों पर लगाई गई रोक को स्थायी रूप से क्यों न बरकरार रखा जाए। गौरतलब है कि मोइत्रा पहले भी संसद-संबंधी विवादों में चर्चा में रही हैं और यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीतिक बिसात पर महत्त्वपूर्ण असर डाल सकता है। अब सभी की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि मोइत्रा की याचिका पर अदालत क्या रुख अपनाती है।