महुआ मोइत्रा के खिलाफ मानहानि मुकदमे की तैयारी, TMC बागी सांसदों ने वर्चुअल बैठक में लिया फैसला
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा के एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर पार्टी के बागी लोकसभा सांसदों के समूह ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने पर गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है। 21 जून को हुई एक वर्चुअल बैठक में विभिन्न राज्यों में फैले इन बागी सांसदों ने इस कानूनी कदम पर चर्चा की। इस समूह का नेतृत्व चार बार की सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार और अभिनेत्री-सांसद शताब्दी रॉय कर रही हैं।
विवाद की जड़: मोइत्रा का सोशल मीडिया पोस्ट
विवाद तब शुरू हुआ जब महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दो बागी TMC सांसदों पर आरोप लगाया कि उन्होंने पैसे के बदले पार्टी छोड़कर त्रिपुरा स्थित नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने का निर्णय लिया। मोइत्रा ने दावा किया कि प्रत्येक सांसद को NCPI में शामिल होने के लिए कम से कम ₹40 करोड़ दिए गए।
यह पोस्ट महाराष्ट्र के एक अलग राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी थी। उद्धव ठाकरे की शिवसेना के कुछ सांसदों के बागी होने की चर्चाओं के बीच ठाकरे गुट के संजय राउत ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया था कि कुछ सांसदों को ₹15 करोड़ देकर तोड़ा जा रहा है। इसी पोस्ट को साझा करते हुए मोइत्रा ने TMC बागियों पर तंज कसा और लिखा, 'सिर्फ 15 करोड़? इतने सस्ते में क्यों जा रहे हैं? हमारे सूत्रों के अनुसार उन्हें ₹4 करोड़ एडवांस और बाकी 36 महीनों तक ₹1 करोड़ प्रति माह मिल रहे हैं।'
बागी सांसदों की प्रतिक्रिया और वर्चुअल बैठक
सूत्रों के अनुसार, रविवार दोपहर हुई इस वर्चुअल बैठक में बागी सांसदों ने मोइत्रा के आरोपों को आधारहीन और मानहानिकारक बताया। शताब्दी रॉय ने मानहानि मुकदमे की संभावना की पुष्टि करते हुए कहा कि वे इस पर विचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि ये सभी बागी सांसद और विधायक अब NCPI में शामिल हो चुके हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब TMC के भीतर बगावत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। पश्चिम बंगाल विधानसभा के कई बागी विधायक भी मोइत्रा के सोशल मीडिया हमलों का निशाना बन रहे हैं।
मोइत्रा का पक्ष: पहले इस्तीफा, फिर बोलें
महुआ मोइत्रा ने अपने पोस्ट में यह भी कहा है कि जो सांसद और विधायक TMC के टिकट पर चुनाव जीतकर पार्टी छोड़ रहे हैं, वे मतदाताओं के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। उनका तर्क है कि पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बोलने से पहले इन नेताओं को अपनी सीट से इस्तीफा देना चाहिए।
क्या होगा आगे
अभी तक बागी सांसदों की ओर से कोई औपचारिक कानूनी नोटिस नहीं भेजा गया है और मानहानि का मुकदमा दायर होना अभी कथित तौर पर विचाराधीन है। यदि मुकदमा दायर होता है, तो यह TMC के आंतरिक संकट को एक नया कानूनी आयाम देगा और पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल और तेज होगी।