महुआ मोइत्रा ने एनसीपीआई के 'गरीब-हितैषी' दावों पर कसा तंज, काकोली घोष दस्तीदार ने किया पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने रविवार, 21 जून 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के 'गरीबों की मददगार' होने के दावों पर तीखा व्यंग्य किया। मोइत्रा ने सवाल उठाया कि टीएमसी के 20 बागी लोकसभा सदस्यों के एनसीपीआई में शामिल होने के बाद यह पार्टी अपनी 'प्रो-पुअर' छवि कितने समय तक बनाए रख पाएगी।
मोइत्रा का तंज और एनसीपीआई पर निशाना
मोइत्रा ने एक्स पर लिखा कि एनसीपीआई अब टीएमसी के चुनाव चिह्न पर जीते 20 सांसदों की नई पार्टी है। उन्होंने पार्टी के फेसबुक पेज पर लिखे दावे — 'यह हमारे समाज के गरीब लोगों की मदद करती है' — का हवाला देते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'सच में उम्मीद है कि यह इन 20 लोगों, जो इतने गरीब नहीं हैं, गद्दारों की भी मदद करेगी।' यह टिप्पणी त्रिपुरा की राजनीतिक रूप से कमज़ोर मानी जाने वाली इस पार्टी की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार थी।
काकोली घोष दस्तीदार का पलटवार
मोइत्रा की पोस्ट पर बागी टीएमसी सांसद और चार बार की लोकसभा सदस्य डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने आर जी कर मेडिकल कॉलेज बलात्कार-हत्याकांड का उल्लेख करते हुए लिखा: 'अभया के लिए न्याय मांगता है बंगाल, अभया के लिए न्याय मांगता है भारत, अभया के लिए न्याय मांगता है मानवता। हम असली बलात्कारी के लिए मौत की सजा चाहते हैं।' यह पलटवार स्पष्ट रूप से टीएमसी नेतृत्व को उस मामले में घेरने की कोशिश थी जो पश्चिम बंगाल में राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है।
बागी गुट और एनसीपीआई में विभाजन की पृष्ठभूमि
डॉ. काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में 20 बागी लोकसभा सदस्य टीएमसी से अलग होकर त्रिपुरा स्थित एनसीपीआई में शामिल हो गए हैं। मोइत्रा उन चुनिंदा टीएमसी सांसदों में हैं जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए हुए हैं। बागी गुट की आलोचना में मोइत्रा सबसे मुखर रही हैं — चाहे सोशल मीडिया हो या मीडिया से बातचीत।
टीएमसी के बैंक खाते फ्रीज़ और भ्रष्टाचार के आरोप
इस विवाद के बीच राज्य पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के तीन आधिकारिक बैंक खाते फ्रीज़ कर दिए। यह कदम पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष और पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास द्वारा संबंधित बैंक अधिकारियों को लिखे गए एक पत्र के बाद उठाया गया, जिसमें इन खातों को फ्रीज़ करने का अनुरोध किया गया था।
बिस्वास का यह पत्र विधानसभा में टीएमसी के कुछ बागी विधायकों की उन पुलिस शिकायतों के बाद आया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार से अर्जित धनराशि इन खातों में जमा की गई थी। बैंक अधिकारियों ने इसके बाद इन खातों से डेबिट लेनदेन पर रोक लगा दी।
मोइत्रा का बागी गुट पर नैतिक सवाल
भ्रष्टाचार के आरोपों पर मोइत्रा ने पलटकर बागी गुट को ही कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि इस बागी गुट को — चाहे सांसद हों या विधायक — पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि हाल के विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए पार्टी से मिला फंड 'अकाउंटेड' था या 'अनअकाउंटेड'। मोइत्रा ने कहा, 'अगर आपको लगता है कि आपने अपने अभियान में अनअकाउंटेड पैसे का इस्तेमाल किया और चुने भी गए, तो यह आपकी नैतिक जिम्मेदारी है कि आप कुर्सी से इस्तीफा दे दें। लेकिन मुझे पता है कि वे इस्तीफा नहीं देंगे। वे बेशर्म लोग हैं। वे दोनों तरफ से फायदा उठाना चाहते हैं।'
यह टकराव पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस गहरी दरार को उजागर करता है जो टीएमसी के भीतर उभरी है और जिसके नतीजे आने वाले विधानसभा चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।