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दिल्ली: रोहित लांबा गैंग का फरार सदस्य आदित्य कुमार द्वारका मोड़ से गिरफ्तार, हत्या के प्रयास का था आरोप

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दिल्ली: रोहित लांबा गैंग का फरार सदस्य आदित्य कुमार द्वारका मोड़ से गिरफ्तार, हत्या के प्रयास का था आरोप

सारांश

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने रोहित लांबा गैंग के फरार सदस्य आदित्य कुमार को द्वारका मोड़ से गिरफ्तार किया। 26 जून को नजफगढ़ में अफजल पर जानलेवा हमले का आरोपी आदित्य साथियों की गिरफ्तारी के बाद से भाग रहा था। गैंग रंजिश और संगठित अपराध के इस मामले में अब तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं।

मुख्य बातें

दिल्ली क्राइम ब्रांच की वेस्टर्न रेंज-II ने 4 जुलाई को आदित्य कुमार को द्वारका मोड़ से गिरफ्तार किया।
आदित्य पर नजफगढ़ थाना क्षेत्र में 26 जून को अफजल नामक युवक पर जानलेवा हमले का आरोप है, जिसमें पीड़ित के दोनों पैरों में गंभीर चोटें आईं।
आरोपी कथित तौर पर रोहित लांबा गैंग का सक्रिय सदस्य है, जो अशोक प्रधान गैंग से जुड़ा बताया जाता है।
28 जून को मुठभेड़ के बाद रोहित लांबा और रितिक ठाकुर पहले ही गिरफ्तार हो चुके थे; आदित्य तब से फरार था।
गिरफ्तारी डीसीपी हर्ष इंदोरा के निर्देश पर इंस्पेक्टर गौतम मलिक की अगुआई में गठित विशेष टीम ने की।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की वेस्टर्न रेंज-II ने 4 जुलाई को हत्या के प्रयास के एक मामले में वांछित आरोपी आदित्य कुमार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी नजफगढ़ थाना क्षेत्र में दर्ज मामले में अपने साथियों की गिरफ्तारी के बाद से फरार था और लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस की पकड़ से बचने की कोशिश कर रहा था। तकनीकी सर्विलांस और खुफिया सूचना के आधार पर उसे द्वारका मोड़ स्थित द्वारका अस्पताल के निकट दबोचा गया।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, 26 जून को रोहित लांबा, आदित्य कुमार और रितिक ठाकुर स्कूटी पर सवार होकर अफजल नामक युवक के पास पहुँचे। तीनों ने उससे प्रतिद्वंद्वी गैंग से जुड़े मोहित भारद्वाज उर्फ मोनू के ठिकाने की जानकारी माँगी। अफजल द्वारा जानकारी देने से इनकार करने पर रोहित ने उसके सिर पर पिस्तौल तान दी और रितिक ने चाकू से हमला करने की कोशिश की। इस दौरान आदित्य ने अफजल को पकड़े रखा, जिससे उसके दोनों पैरों में गंभीर चोटें आईं। गली में एक मोटरसाइकिल आने पर तीनों आरोपी मौके से फरार हो गए।

विशेष टीम का गठन और गिरफ्तारी

क्राइम ब्रांच के डीसीपी हर्ष इंदोरा के निर्देश पर इंस्पेक्टर गौतम मलिक के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम में एसआई कुलदीप, एसआई रवि भूषण, कांस्टेबल मुकेश और तकनीकी निगरानी में हेड कांस्टेबल भंवर की अहम भूमिका रही। निरंतर सर्विलांस के आधार पर आरोपी की लोकेशन द्वारका मोड़ के पास चिह्नित हुई, जहाँ जाल बिछाकर उसे पकड़ा गया। पुलिस को देखते ही आदित्य भागने लगा, लेकिन पीछा कर उसे काबू में कर लिया गया।

आरोपी की पृष्ठभूमि और गैंग से संबंध

पूछताछ में आदित्य ने बताया कि वह नजफगढ़ के धर्मपुरा का रहने वाला है और 10वीं तक पढ़ा है। कथित तौर पर लगभग तीन वर्ष पहले एक रिलायंस स्टोर में काम करने के दौरान वह रोहित लांबा के संपर्क में आया था। पुलिस के अनुसार, रोहित ने खुद को कुख्यात अशोक प्रधान गैंग का सदस्य बताते हुए आदित्य को अपने नेटवर्क में शामिल कर लिया था।

पुरानी गैंग रंजिश की पृष्ठभूमि

पुलिस के मुताबिक, रोहित लांबा गैंग और मोनू गैंग के बीच पुरानी दुश्मनी चली आ रही थी। अफजल पर हमला इसी रंजिश की कड़ी था — रोहित को संदेह था कि अफजल ने मोनू को उसकी गतिविधियों की सूचना दी थी। गौरतलब है कि 28 जून को नजफगढ़ थाना पुलिस ने मुठभेड़ के बाद रोहित लांबा और रितिक ठाकुर को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।

आगे की कार्रवाई

आदित्य की गिरफ्तारी से रोहित लांबा गैंग के खिलाफ चल रही जाँच को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि संगठित अपराध के विरुद्ध अभियान जारी रहेगा और फरार अपराधियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ साधारण रोज़गार के रास्तों से युवा संगठित अपराध में खिंचते हैं। एक रिटेल स्टोर से गैंग तक का सफर यह भी दर्शाता है कि भर्ती के तरीके कितने सामान्य और अदृश्य हो गए हैं। रोहित लांबा-मोनू गैंग की रंजिश में एक निर्दोष तीसरे व्यक्ति — अफजल — को निशाना बनाया जाना बताता है कि इस हिंसा का दायरा सिर्फ गैंग-सदस्यों तक सीमित नहीं रहा। असली सवाल यह है कि क्राइम ब्रांच की प्रतिक्रियाशील कार्रवाई के साथ-साथ पश्चिमी दिल्ली में गैंग भर्ती की रोकथाम के लिए कोई दीर्घकालिक रणनीति भी है या नहीं।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आदित्य कुमार को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
आदित्य कुमार को नजफगढ़ थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तार किया गया है। 26 जून को उस पर अफजल नामक युवक पर जानलेवा हमले में शामिल होने का आरोप है, जिसमें पीड़ित के दोनों पैरों में गंभीर चोटें आई थीं।
रोहित लांबा गैंग क्या है और इसका अशोक प्रधान गैंग से क्या संबंध है?
पुलिस के अनुसार, रोहित लांबा गैंग दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में सक्रिय एक संगठित अपराध गुट है। पूछताछ में सामने आया कि रोहित लांबा ने खुद को कुख्यात अशोक प्रधान गैंग का सदस्य बताकर आदित्य कुमार को अपने नेटवर्क में शामिल किया था।
26 जून को अफजल पर हमला क्यों किया गया था?
पुलिस के मुताबिक, रोहित लांबा गैंग और मोनू गैंग के बीच पुरानी रंजिश थी। रोहित को संदेह था कि अफजल ने प्रतिद्वंद्वी मोहित भारद्वाज उर्फ मोनू को उसकी गतिविधियों की जानकारी दी थी, इसीलिए उससे मोनू के ठिकाने की जानकारी माँगी गई और मना करने पर हमला किया गया।
आदित्य कुमार को कहाँ से और कैसे गिरफ्तार किया गया?
तकनीकी सर्विलांस के ज़रिए आरोपी की लोकेशन द्वारका मोड़ स्थित द्वारका अस्पताल के पास चिह्नित की गई। पुलिस ने वहाँ जाल बिछाया और पुलिस को देखकर भागने की कोशिश करने पर पीछा कर आदित्य को दबोच लिया गया।
इस मामले में अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
इस मामले में तीनों आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में हैं। 28 जून को नजफगढ़ थाना पुलिस ने मुठभेड़ के बाद रोहित लांबा और रितिक ठाकुर को गिरफ्तार किया था, जबकि तीसरे आरोपी आदित्य कुमार को 4 जुलाई को क्राइम ब्रांच ने पकड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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