रोहित पवार का बड़ा सवाल: डीजीसीए अधिकारी की गिरफ्तारी पर क्यों है 'छोटी मछली'?
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मुंबई, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार ने अजित पवार प्लेन क्रैश मामले में सीबीआई द्वारा की गई गिरफ्तारी पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। रोहित पवार ने सोमवार को कहा कि सीबीआई द्वारा नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के एयरवर्थनेस विभाग के उप निदेशक की गिरफ्तारी और एफआईआर दर्ज होने से कई भ्रष्ट अधिकारियों की उपस्थिति का खुलासा हुआ है। गिरफ्तार व्यक्ति केवल एक 'छोटी मछली' है, जबकि इस तंत्र में इससे भी बड़ी 'मछलियां' शामिल हैं।
रोहित पवार ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "सीबीआई ने डीजीसीए के एयरवर्थनेस डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर को गिरफ्तार कर लिया है और एफआईआर भी दर्ज की गई है। हम बार-बार यह बताते रहे हैं कि डीजीसीए में कई भ्रष्ट अधिकारी सक्रिय हैं, और इस घटना ने हमारी बात को सत्यापित कर दिया है। जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, वह तो केवल एक 'छोटी मछली' है। इस संगठन में इससे भी बड़ी मछलियां मौजूद हैं।"
रोहित पवार ने आगे कहा, "यदि डीजीसीए में कार्य रिश्वत देकर करवाया जा रहा है, तो कोई भी आसानी से यह अनुमान लगा सकता है कि रिश्वत देने और बिचौलिए की भूमिका निभाने में माहिर वीके सिंह ने दादा की दुर्घटना से जुड़े दस्तावेजों को किस प्रकार से 'साफ़' (सबूत मिटाने) किया होगा। एक तरफ, दादा की दुर्घटना की जांच सीबीआई को सौंपने की गुज़ारिश किए हुए दो महीने हो चुके हैं, लेकिन सीबीआई ने अभी तक इस मामले को अपने हाथ में नहीं लिया है। दूसरी तरफ, सीबीआई ने इस मामले में अपनी तरफ से कार्रवाई की है, जो कि महत्वपूर्ण है। यह संभवतः टीडीपी सरकार के लिए कोई परोक्ष संदेश या चेतावनी हो सकती है। शायद यही कारण है कि टीडीपी ने क्षेत्रीय भावनाओं को नजरअंदाज करते हुए परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार के आदेशों का सख्ती से पालन किया है।"
रोहित पवार डीजीसीए में व्याप्त व्यवस्थागत भ्रष्टाचार और इस मामले से जुड़े निजी चार्टर विमान के सुरक्षा मानकों पर चिंता जताने में सबसे आगे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्हें संदेह है कि इस विमान दुर्घटना में किसी साज़िश का हाथ हो सकता है। उनके आरोप चार्टर ऑपरेटर वीएसआर वेंचर्स और डीजीसीए के अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार के एक “परेशान करने वाले जाल” पर केंद्रित हैं।
विधायक ने अपने आरोप को फिर से दोहराया है कि रेगुलेटरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पायलट के उड़ान घंटों में हेरफेर किया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि सुरक्षा में हुई चूकों के खुलासे से बचने के लिए, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई या गुपचुप तरीके से पैसे देकर उन्हें बंद करवा दिया गया।
रोहित पवार ने यह सवाल उठाया है कि लियरजेट 45 विमान को उड़ान भरने की अनुमति कैसे दी गई, जबकि इससे पहले भी इसमें तकनीकी खराबी की रिपोर्टें आई थीं और विमान संचालन करने वाली कंपनी के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू को पत्र लिखकर इस मामले की एक विस्तृत और पारदर्शी जांच की मांग की है।