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आरएसएस शताब्दी पुस्तक पर उद्यमी ब्रिंदा कोटक: 'संघ के जमीनी कार्यों ने बदली मेरी जीवन-दृष्टि'

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आरएसएस शताब्दी पुस्तक पर उद्यमी ब्रिंदा कोटक: 'संघ के जमीनी कार्यों ने बदली मेरी जीवन-दृष्टि'

सारांश

आरएसएस से कोई पारिवारिक नाता नहीं — फिर भी उद्यमी ब्रिंदा कोटक कहती हैं कि संघ के जमीनी कार्यों ने उनकी सोच बदल दी। शताब्दी पुस्तक 'हंड्रेड ईयर्स यंग' के ज़रिए उन्होंने एक ऐसे संगठन की तस्वीर खींची जो प्रचार नहीं, सिर्फ काम करता है।

मुख्य बातें

उद्यमी और लेखिका ब्रिंदा कोटक आरएसएस की शताब्दी पुस्तक 'हंड्रेड ईयर्स यंग' में योगदान देने वाले युवाओं में शामिल हैं।
कोटक ने स्वीकार किया कि उनका आरएसएस से कोई पारिवारिक या प्रत्यक्ष संबंध नहीं , फिर भी संघ के कार्यों ने उनकी जीवन-दृष्टि बदली।
उनके अनुसार, संघ का ध्यान विचारधारा के प्रसार पर नहीं, केवल कार्य पर है — इसी कारण उसके कार्य व्यापक रूप से ज्ञात नहीं हो पाते।
कोटक ने पीएम मोदी के 25 वर्षों के कार्यकाल को भारत की वैश्विक स्थिति में 'पूर्ण बदलाव' का कारण बताया।
सीजेपी विरोध-प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि विरोध का अधिकार ज़रूरी है, लेकिन युवाओं को निर्माण पर ध्यान देना चाहिए , विध्वंस पर नहीं।

उद्यमी और लेखिका ब्रिंदा कोटक ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष पर प्रकाशित पुस्तक 'हंड्रेड ईयर्स यंग: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' के संदर्भ में 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कहा कि भले ही उनका परिवारिक या व्यक्तिगत रूप से आरएसएस से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा, फिर भी संघ के निस्वार्थ और जमीनी कार्यों ने उनकी जीवन-दृष्टि को गहराई से प्रभावित किया। यह पुस्तक संघ के सौ वर्षों की यात्रा और उसके सामाजिक योगदान को रेखांकित करती है।

पुस्तक से जुड़ाव और व्यक्तिगत अनुभव

ब्रिंदा कोटक ने कहा, 'मैं इस पुस्तक का हिस्सा बनकर बहुत आभारी हूँ और मैं उन युवाओं के चयन से बहुत प्रसन्न हूँ, जिन्हें आरएसएस के बारे में अपने विचार और दृष्टिकोण देने के लिए विशेष रूप से चुना गया है — क्योंकि मेरे जैसे लोग भी हैं जिनका वास्तव में आरएसएस से कोई सीधा संबंध नहीं है, पारिवारिक रूप से या अन्यथा।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ के जमीनी स्तर के कार्यों ने उनके जीवन को 'सीधे तौर पर प्रभावित' किया है और वे 'सैकड़ों, हजारों और लाखों अन्य युवाओं की ओर से' बोल सकती हैं जिन पर आरएसएस ने सकारात्मक प्रभाव डाला है।

संघ की कार्य-संस्कृति पर दृष्टिकोण

कोटक के अनुसार, आरएसएस का सबसे महत्वपूर्ण पाठ यह है कि 'अपने आप से परे किसी चीज के लिए काम करना।' उन्होंने कहा कि यह बात उन्होंने सुनी और पढ़ी थी, लेकिन आरएसएस के माध्यम से इसे व्यवहार में देखना एक 'अलग अनुभव' था।

उन्होंने संघ की एक विशेषता की ओर ध्यान दिलाया — कि इसका ध्यान कभी भी किसी प्रकार का संदेश देने या विचारधारा का प्रसार करने पर नहीं, बल्कि केवल कार्य करने पर रहा है। इसी कारण, उनके अनुसार, आम जनता को संघ के व्यापक कार्यों की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती।

सशक्त भारत की परिकल्पना

ब्रिंदा कोटक ने आरएसएस के एक आदर्श को 'अविश्वसनीय' बताते हुए कहा कि संघ ऐसी दुनिया की कामना करता है जिसमें भारत का हर नागरिक इतना सशक्त हो कि 'आरएसएस या आरएसएस जैसी किसी संस्था की आवश्यकता ही न रहे।' उन्होंने इसे एक दुर्लभ संस्थागत विनम्रता बताया।

पीएम मोदी के 25 वर्षों पर टिप्पणी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे करने पर कोटक ने कहा, '2014 में पीएम मोदी के चुने जाने से ठीक पहले हम भारतीय राजनीति, भारतीय राजव्यवस्था और वैश्विक मंच पर भारत को लेकर जिस तरह की बातचीत कर रहे थे — और अब जो बातचीत हो रही है — उसे देखिए। दुनिया में भारत की स्थिति, सम्मान और आर्थिक शक्ति पूरी तरह बदल गई है।' उन्होंने कहा कि उनकी उम्र के युवा यह अंतर स्पष्ट रूप से 'देख और महसूस' कर सकते हैं।

विरोध-प्रदर्शन और युवाओं से अपील

सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन पर ब्रिंदा कोटक ने कहा कि विरोध करना सभी का अधिकार है और युवाओं को इस अधिकार का उपयोग करना चाहिए, किंतु इसके पीछे एक स्पष्ट उद्देश्य होना चाहिए — 'सही मानसिकता, सही अनुमतियों और सही अधिकारों के साथ।'

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे समाज और देश को तोड़ने की बजाय 'निर्माता बनने और समाज के प्रति उत्पादक होने' पर ध्यान दें। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देशभर में विभिन्न सामाजिक मुद्दों को लेकर युवाओं की सड़क-गतिविधियाँ बढ़ी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक ऐसे 'बाहरी नज़रिए' को सामने लाता है जिसे शताब्दी पुस्तक में जानबूझकर शामिल किया गया — यह एक सोची-समझी सार्वजनिक छवि-रणनीति भी हो सकती है। जब संघ अपनी शताब्दी मना रहा है, तो गैर-संघी युवाओं की आवाज़ें उसे एक व्यापक सामाजिक स्वीकार्यता का आधार देती हैं। साथ ही, पीएम मोदी और सीजेपी पर की गई टिप्पणियाँ इस पुस्तक-चर्चा को स्पष्ट रूप से समसामयिक राजनीतिक संदर्भ से जोड़ती हैं — जो एक विशुद्ध साहित्यिक आयोजन में असामान्य है। मुख्यधारा की कवरेज इस सूक्ष्म संदर्भ को अक्सर चूक जाती है।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'हंड्रेड ईयर्स यंग: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' पुस्तक क्या है?
यह आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रकाशित पुस्तक है, जिसमें विभिन्न युवाओं के विचार और दृष्टिकोण संकलित हैं। इसका उद्देश्य संघ के सौ वर्षों की यात्रा और उसके सामाजिक योगदान को एक नई पीढ़ी के नज़रिए से प्रस्तुत करना है।
ब्रिंदा कोटक कौन हैं और इस पुस्तक से उनका क्या संबंध है?
ब्रिंदा कोटक एक उद्यमी और लेखिका हैं, जिन्हें इस पुस्तक में योगदान देने के लिए चुना गया है। उनका आरएसएस से कोई पारिवारिक या प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, फिर भी उन्होंने संघ के जमीनी कार्यों से प्रेरित होकर अपने अनुभव साझा किए हैं।
ब्रिंदा कोटक के अनुसार आरएसएस की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
उनके अनुसार, आरएसएस का ध्यान कभी भी विचारधारा के प्रसार या संदेश देने पर नहीं, बल्कि केवल जमीनी कार्य करने पर रहा है। यही कारण है कि संघ के व्यापक कार्य आम जनता को पर्याप्त रूप से ज्ञात नहीं हो पाते।
पीएम मोदी के 25 वर्षों पर ब्रिंदा कोटक ने क्या कहा?
कोटक ने कहा कि 2014 से पहले और अब भारत की वैश्विक छवि, सम्मान और आर्थिक शक्ति में 'पूर्ण बदलाव' आया है। उनके अनुसार उनकी उम्र के युवा यह अंतर स्पष्ट रूप से देख और महसूस कर सकते हैं।
सीजेपी विरोध-प्रदर्शन पर ब्रिंदा कोटक का क्या मत है?
उन्होंने कहा कि विरोध करना सभी का अधिकार है, लेकिन इसके पीछे एक स्पष्ट उद्देश्य और सही मानसिकता होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे समाज को तोड़ने की बजाय निर्माण और उत्पादकता पर ध्यान दें।
राष्ट्र प्रेस
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