24 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

'सामना' का फडणवीस पर हमला: पोषण आहार घोटाले से जेन-जी इवेंट तक, भाजपा पर उठे सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
'सामना' का फडणवीस पर हमला: पोषण आहार घोटाले से जेन-जी इवेंट तक, भाजपा पर उठे सवाल

सारांश

'सामना' का यह संपादकीय महज़ विपक्षी आलोचना नहीं — यह तीन मोर्चों पर एक साथ हमला है। पोषण आहार ठेकेदार को जेन-जी इवेंट के फंडर से जोड़ने का दावा, अगर सत्यापित हो, तो यह महाराष्ट्र में सरकारी अनुबंध और राजनीतिक आयोजनों के बीच की महीन रेखा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' ने 24 अगस्त को 'रोखठोक' संपादकीय में CM देवेंद्र फडणवीस और BJP पर कई आरोप लगाए।
आंबेगांव के एक स्कूल में बच्चों को कुकर में 13 सीटी के बाद भी न गलने वाला कठोर मटर परोसे जाने का आरोप।
पोषण आहार ठेकेदार पगारिया पर आरोप — कथित तौर पर नागपुर के 'जेन-जी' उत्सव का खर्च भी इसी ने उठाया; इसे 'पेड इवेंट' बताया गया।
पुणे में राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को 30-35 शर्तों के साथ अनुमति देने और कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज होने का आरोप।
नासिक में सड़क के गड्ढों से 12 लोगों की मौत , जिनमें कथित तौर पर 7 युवा — CM की चुप्पी पर सवाल।

शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' ने 24 अगस्त को प्रकाशित अपने 'रोखठोक' संपादकीय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। संपादकीय में स्कूली पोषण आहार की घटिया गुणवत्ता, नागपुर में आयोजित 'जेन-जी' उत्सव की वित्तीय पारदर्शिता और पुणे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कार्यक्रम पर कथित पुलिसिया दबाव — इन तीन मुद्दों को केंद्र में रखा गया है।

स्कूल पोषण आहार: पत्थर जैसे मटर और बच्चों की सेहत

संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों में बच्चों को अत्यंत निम्न गुणवत्ता का भोजन परोसा जा रहा है। आंबेगांव के एक स्कूल का उदाहरण देते हुए लिखा गया कि बच्चों को जो मटर (वटाणा) दिया गया, वह कुकर में 13 सीटी बजने के बाद भी नहीं गला और बच्चों को वही कठोर मटर खाने पर मजबूर होना पड़ा। 'सामना' के अनुसार यह बच्चों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।

संपादकीय में दावा किया गया है कि इस पोषण आहार की आपूर्ति करने वाला ठेकेदार पगारिया कथित तौर पर भाजपा और मुख्यमंत्री फडणवीस का करीबी है। यह आरोप सत्यापित नहीं हो सके हैं और संपादकीय में इन्हें पार्टी के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है।

नागपुर जेन-जी उत्सव: 'पेड इवेंट' का आरोप

संपादकीय के अनुसार, नागपुर के रेशीमबाग मैदान — जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) मुख्यालय के सामने स्थित है — में मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा आयोजित 'जेन-जी' उत्सव की आर्थिक जिम्मेदारी कथित तौर पर उसी ठेकेदार पगारिया ने उठाई थी। 'सामना' ने इसे 'पेड इवेंट' करार देते हुए आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम में संघ स्वयंसेवकों के बच्चों को युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत किया गया और इस पर 'बेहिसाब खर्च' हुआ।

संपादकीय में माँग की गई है कि मुख्यमंत्री आत्मचिंतन करें और सभी 'पेड इवेंट' की जाँच अपने स्वयं के कार्यक्रमों से शुरू करें। भाजपा या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम पर कथित दबाव

पुणे में आयोजित कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का हवाला देते हुए 'सामना' ने आरोप लगाया कि इस आयोजन को रोकने के लिए मुख्यमंत्री फडणवीस और पुलिस तंत्र ने पूरी ताकत झोंक दी। संपादकीय के अनुसार पहले अनुमति नहीं दी गई, फिर पुलिस आयुक्त ने 30-35 शर्तों के साथ इजाजत दी।

इसके अलावा, कार्यक्रम से एक रात पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा कथित हंगामे और कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमले का जिक्र करते हुए संपादकीय में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने उल्टा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर ही मामले दर्ज किए। संपादकीय ने सवाल उठाया कि क्या पुणे में भाजपा नेताओं के कार्यक्रमों पर भी इतनी ही शर्तें लागू होती हैं।

सड़क हादसे, पैलेट गन और युवाओं की नाराज़गी

'सामना' ने नासिक में सड़क के गड्ढों में गिरकर 12 लोगों की मौत का मुद्दा भी उठाया, जिनमें कथित तौर पर 7 युवा शामिल थे। संपादकीय में कहा गया कि इस पर मुख्यमंत्री मौन रहे। साथ ही पैलेट गन के इस्तेमाल से युवाओं की आँखें फूटने का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया कि संसद में पूछे गए सवाल पर गृह मंत्री ने जवाब देने से परहेज किया।

संपादकीय का समापन इस टिप्पणी के साथ हुआ कि युवा वर्ग अब भाजपा के पुराने भाषणों, खोखले आश्वासनों और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति से ऊब चुका है। यह संपादकीय ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के बीच युवा मतदाताओं को साधने की होड़ तेज़ हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें उठाए गए कुछ सवाल स्वतंत्र जाँच की माँग करते हैं — खासकर यह कि क्या एक ही ठेकेदार सरकारी पोषण आहार अनुबंध और सत्तारूढ़ पार्टी के राजनीतिक आयोजनों का वित्तपोषण एक साथ कर सकता है। महाराष्ट्र में मध्याह्न भोजन और पोषण आहार योजनाओं में ठेकेदारी विवाद नया नहीं है, लेकिन इसे किसी विशेष कार्यक्रम से जोड़ने का दावा गंभीर है। पुणे में कार्यक्रम पर शर्तों और ABVP हंगामे के आरोप भी सत्यापन माँगते हैं — पुलिस का पक्ष सार्वजनिक नहीं हुआ है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर संपादकीय को 'विपक्षी बयान' तक सीमित कर देती है, जबकि इसमें दर्ज तथ्यात्मक दावे स्वतंत्र पड़ताल के योग्य हैं।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'सामना' के 'रोखठोक' संपादकीय में क्या आरोप लगाए गए हैं?
शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' ने 24 अगस्त को प्रकाशित संपादकीय में CM देवेंद्र फडणवीस और BJP पर तीन प्रमुख आरोप लगाए हैं — स्कूल पोषण आहार में घटिया गुणवत्ता, नागपुर जेन-जी उत्सव को 'पेड इवेंट' बताना और पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम पर कथित पुलिसिया दबाव।
स्कूल पोषण आहार विवाद क्या है?
संपादकीय में आंबेगांव के एक स्कूल का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया गया कि बच्चों को दिया गया मटर कुकर में 13 सीटी के बाद भी नहीं गला और बच्चों को वही कठोर मटर खाना पड़ा। आरोप है कि यह आपूर्ति करने वाला ठेकेदार पगारिया कथित तौर पर BJP और CM फडणवीस का करीबी है।
नागपुर जेन-जी उत्सव को 'पेड इवेंट' क्यों कहा गया?
'सामना' का आरोप है कि नागपुर के रेशीमबाग मैदान में हुए जेन-जी उत्सव की आर्थिक जिम्मेदारी उसी ठेकेदार पगारिया ने उठाई जो सरकारी पोषण आहार आपूर्ति करता है। संपादकीय ने इसे सरकारी अनुबंध और राजनीतिक आयोजन के बीच संदिग्ध संबंध बताया है।
पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम पर क्या विवाद हुआ?
'सामना' के अनुसार, पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को पहले अनुमति नहीं मिली, फिर 30-35 शर्तों के साथ इजाजत दी गई। कार्यक्रम से पहले ABVP द्वारा कथित हंगामे के बाद पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर मामले दर्ज किए — इस पर संपादकीय ने सवाल उठाया कि क्या BJP कार्यक्रमों पर भी ऐसी शर्तें लागू होती हैं।
नासिक सड़क हादसे का जिक्र इस संपादकीय में क्यों किया गया?
'सामना' ने नासिक में सड़क के गड्ढों में गिरकर 12 लोगों की मौत — जिनमें कथित तौर पर 7 युवा थे — का उल्लेख करते हुए CM की चुप्पी पर सवाल उठाया। यह जेन-जी उत्सव के संदर्भ में इस्तेमाल किया गया तर्क था कि सरकार युवाओं के असली मुद्दों पर मौन है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 दिन पहले
  3. 2 दिन पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले