जंतर-मंतर NEET आंदोलन: शिवसेना (यूबीटी) बोली — 'युवाओं का महोत्सव था, जुनैद परिवार को राजनीतिक कारणों से परेशान किया जा रहा है'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 28 जुलाई 2026 को अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय के माध्यम से केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार और उत्तर प्रदेश पुलिस पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाया कि नीट-यूजी परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों को भोजन-पानी उपलब्ध कराने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद जुनैद और शादाब सैफी को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी के अनुसार, यह आंदोलन किसी विफल प्रदर्शन का नाम नहीं, बल्कि 'तानाशाही के खिलाफ युवाओं का विशाल और जीवंत महोत्सव' था।
मोहम्मद जुनैद और उनके परिवार पर कथित कार्रवाई
सामना संपादकीय में दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने न केवल मोहम्मद जुनैद, बल्कि उनके माता-पिता, बहन और ससुराल पक्ष के सदस्यों को भी बार-बार थाने बुलाकर करीब 12-12 घंटे तक बैठाए रखा। पार्टी के अनुसार, पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 35 दिनों तक चले राहत अभियान के लिए धन कहाँ से आया, जिसके तहत प्रतिदिन हज़ारों प्रदर्शनकारियों को भोजन उपलब्ध कराया गया।
संपादकीय में यह भी कहा गया कि पैर में चोट के बावजूद जुनैद स्थानीय सिख लंगरों के सहयोग से दिन-रात प्रदर्शनकारियों तक भोजन पहुँचाते रहे। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने आंदोलन को कमज़ोर करने के इरादे से प्रदर्शन स्थल के आसपास के होटलों, ठेलों और कनॉट प्लेस क्षेत्र में भोजन आपूर्ति बंद कराने के निर्देश दिए।
सरकारी प्राथमिकताओं पर सवाल
शिवसेना (यूबीटी) ने अपने संपादकीय में एक तीखी तुलना पेश की। पार्टी ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले में 27 पर्यटकों की हत्या करने वाले आतंकियों का अब तक पता नहीं चल पाया और पुलवामा हमले में 40 जवानों की जान लेने वाले आरडीएक्स का स्रोत भी सार्वजनिक नहीं हुआ। इसके बावजूद, पार्टी के अनुसार, पूरी सरकारी मशीनरी इस बात की जाँच में लगी है कि जुनैद के भोजन अभियान के लिए पैसा कहाँ से आया — और संपादकीय ने यह भी कहा कि यह जाँच कथित तौर पर इसलिए हो रही है क्योंकि वे 'दाढ़ी और टोपी पहनते हैं'।
यह ऐसे समय में आया है जब देश में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को घेर रहा है।
पारदर्शिता की माँग
सामना संपादकीय में शिवसेना (यूबीटी) ने माँग की कि जिस तरह जुनैद के राहत अभियान की फंडिंग की जाँच हो रही है, उसी तरह सरकार और राजनीतिक दलों की आर्थिक व्यवस्था की भी पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। पार्टी ने BJP के चुनावी फंड की भी आधिकारिक जाँच कराने की माँग उठाई।
एकजुटता की अपील और आंदोलन का मूल्यांकन
संपादकीय में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से अपील की गई कि वे मोहम्मद जुनैद, शादाब सैफी और अन्य जमीनी सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित सरकारी कार्रवाई के विरोध में एकजुट होकर आवाज़ उठाएँ। पार्टी ने जंतर-मंतर आंदोलन को 'तानाशाही के खिलाफ युवाओं का विशाल और जीवंत महोत्सव' करार देते हुए कहा कि पुलिस की लाठी, पैलेट गन, नुकीले डंडों और आँसू गैस का सामना करने के बावजूद युवाओं के चेहरे पर डर या दर्द नहीं था।
गौरतलब है कि यह संपादकीय ऐसे समय में आया है जब NEET-UG परीक्षा विवाद को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन जारी है और विपक्षी दल केंद्र सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज़ होने की संभावना है।