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सबरीमाला सोना चोरी: सीपीआई (एम) ने पद्मकुमार को केवल निलंबित किया, कड़ी कार्रवाई से बचा

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सबरीमाला सोना चोरी: सीपीआई (एम) ने पद्मकुमार को केवल निलंबित किया, कड़ी कार्रवाई से बचा

सारांश

सबरीमाला सोना चोरी मामले में सीपीआई (एम) ने पूर्व विधायक और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ए. पद्मकुमार को केवल निलंबित किया। पार्टी पर दबाव था क्योंकि पद्मकुमार ने कथित तौर पर कड़ी कार्रवाई होने पर कई बातें उजागर करने की चेतावनी दी थी।

मुख्य बातें

सीपीआई (एम) ने 15 जून 2026 को सबरीमाला सोना चोरी मामले में ए.
पद्मकुमार के खिलाफ कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित रखी।
इस निर्णय की घोषणा पूर्व वित्त मंत्री और केंद्रीय समिति के सदस्य थॉमस आइजैक ने की।
सूत्रों के अनुसार पद्मकुमार ने कथित तौर पर कड़ी कार्रवाई होने पर कई बातें उजागर करने और आत्मकथा लिखने की चेतावनी दी थी।
पथानामथिट्टा जिला सचिवालय में कड़ी कार्रवाई की वकालत हुई, लेकिन जिला समिति ने निलंबन को प्राथमिकता दी।
पद्मकुमार त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और पार्टी के पूर्व विधायक हैं; गिरफ्तारी के बाद उन्हें जमानत मिल चुकी है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई (एम)] ने सोमवार, 15 जून 2026 को सबरीमाला सोना चोरी विवाद में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ए. पद्मकुमार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को केवल निलंबन तक सीमित रखने का निर्णय लिया। पार्टी के पूर्व विधायक पद्मकुमार को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत मिली थी।

निर्णय की घोषणा

इस फैसले की आधिकारिक घोषणा पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व वित्त मंत्री और केंद्रीय समिति के सदस्य थॉमस आइजैक ने की। यह निर्णय पथानामथिट्टा जिला सचिवालय में हुई तीखी बहस के बाद आया, जहाँ कुछ नेताओं ने पद्मकुमार के खिलाफ कड़े अनुशासनात्मक कदम उठाने की जोरदार वकालत की थी।

पार्टी पर दबाव और खुलासे की चेतावनी

सूत्रों के अनुसार, पद्मकुमार के खिलाफ कार्रवाई तय करने में पार्टी पर असामान्य दबाव था। कथित तौर पर पद्मकुमार ने अपने करीबी सहयोगियों को संकेत दिया था कि यदि उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कदम उठाए गए, तो वे कई महत्वपूर्ण बातें सार्वजनिक कर देंगे। यहाँ तक कि उन्होंने आत्मकथा लिखने का भी इशारा किया था, जिससे विवाद से जुड़े संभावित खुलासों को लेकर अटकलें और तेज हो गईं।

जिला सचिवालय में बहस और प्रक्रिया

पथानामथिट्टा जिला सचिवालय में इस मुद्दे पर गहरी बहस हुई। पार्टी नेताओं ने कथित तौर पर कहा कि सबरीमाला स्वर्ण विवाद से जुड़े आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सीपीआई (एम) बिना सख्त कार्रवाई के आगे नहीं बढ़ सकती। जिला सचिवालय की सिफारिशें विचार के लिए जिला समिति के समक्ष रखी गईं। हालाँकि, विस्तृत चर्चा के बाद पार्टी ने कठोर उपायों की बजाय निलंबन का विकल्प चुना।

सबरीमाला स्वर्ण विवाद की पृष्ठभूमि

सबरीमाला सोना चोरी विवाद राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बन चुका है। इसमें त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड द्वारा प्रबंधित मंदिर की संपत्तियों के प्रशासन और निर्णय-प्रक्रिया से जुड़े गंभीर आरोप-प्रत्यारोप शामिल हैं। पूर्व विधायक पद्मकुमार, जो बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं, इस पूरे घटनाक्रम में जाँच के केंद्र में हैं।

आगे की राह

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पद्मकुमार के कथित खुलासों की चेतावनी के मद्देनज़र सीपीआई (एम) आगे क्या कदम उठाती है। मंदिर प्रशासन और राजनीतिक जवाबदेही के इस संवेदनशील मामले में आने वाले दिनों में नए घटनाक्रम सामने आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह पार्टी अनुशासन की साख पर सीधा सवाल है। सबरीमाला जैसे धार्मिक रूप से संवेदनशील संस्थान में कथित वित्तीय अनियमितता और उससे जुड़े राजनीतिक संरक्षण के आरोप केरल में सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए दीर्घकालिक छवि-क्षति का कारण बन सकते हैं। यह मामला दिखाता है कि मंदिर प्रशासन में राजनीतिक नियुक्तियाँ जवाबदेही की जगह वफादारी को प्राथमिकता देती हैं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सबरीमाला सोना चोरी मामला क्या है?
सबरीमाला सोना चोरी विवाद केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर की संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़ा एक गंभीर मामला है, जिसमें त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के प्रशासनिक निर्णयों और मंदिर की संपत्तियों के कथित दुरुपयोग के आरोप शामिल हैं। इस मामले में पूर्व बोर्ड अध्यक्ष ए. पद्मकुमार को गिरफ्तार किया गया था।
सीपीआई (एम) ने पद्मकुमार के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
सीपीआई (एम) ने 15 जून 2026 को ए. पद्मकुमार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को केवल निलंबन तक सीमित रखने का निर्णय लिया। पथानामथिट्टा जिला सचिवालय में कड़ी कार्रवाई की माँग उठी थी, लेकिन जिला समिति ने निलंबन को प्राथमिकता दी।
पद्मकुमार ने क्या चेतावनी दी थी?
सूत्रों के अनुसार पद्मकुमार ने कथित तौर पर अपने करीबी सहयोगियों से कहा था कि यदि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हुई तो वे कई बातें उजागर कर देंगे और आत्मकथा लिखने का भी संकेत दिया था। इस चेतावनी से पार्टी के भीतर दबाव बना और अंततः निलंबन जैसे नरम कदम पर सहमति बनी।
थॉमस आइजैक इस मामले में किस भूमिका में हैं?
थॉमस आइजैक सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता, पूर्व वित्त मंत्री और केंद्रीय समिति के सदस्य हैं। उन्होंने पद्मकुमार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को निलंबन तक सीमित रखने के पार्टी के निर्णय की आधिकारिक घोषणा की।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
पद्मकुमार के कथित खुलासों की चेतावनी को देखते हुए आने वाले दिनों में नए घटनाक्रम सामने आने की संभावना है। मंदिर प्रशासन और राजनीतिक जवाबदेही से जुड़ा यह मामला केरल की राजनीति में संवेदनशील बना रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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