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मौलाना साजिद रशीदी का विवादित बयान: 15-16 साल की लड़की निकाह क्यों नहीं कर सकती?

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मौलाना साजिद रशीदी का विवादित बयान: 15-16 साल की लड़की निकाह क्यों नहीं कर सकती?

सारांश

मौलाना साजिद रशीदी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के पॉक्सो फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि 15-16 साल की लड़की का रिलेशनशिप वैध और निकाह अवैध — यह विरोधाभास 'देश का दुर्भाग्य' है। साथ ही राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय व अनिल मिश्रा को सरकारी गवाह बनाने पर षड्यंत्र का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने 27 सितंबर 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय के पॉक्सो फैसले पर तीखी आपत्ति जताई।
उनका तर्क: 15-16 साल की लड़की का रिलेशनशिप वैध माना जाता है, जबकि उसी उम्र में निकाह को अवैध ठहराया जाता है।
मौलाना ने आरोप लगाया कि देश पर यूरोपीय संस्कृति थोपी जा रही है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा को सरकारी गवाह बनाने पर षड्यंत्र का आरोप।
मौलाना ने कहा कि इस मामले का असर यूपी विधानसभा चुनाव 2027 पर दिखेगा।

नई दिल्ली में मौलाना साजिद रशीदी ने 27 सितंबर 2026 को पॉक्सो मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के एक फैसले पर तीखी आपत्ति जताते हुए कहा कि 15-16 साल की लड़की का रिलेशनशिप में रहना वैध माना जाता है, जबकि उसी उम्र में अपनी मर्जी से निकाह करने को अवैध ठहराना उचित नहीं है। यह बयान कानूनी और सामाजिक बहस को नए सिरे से तेज़ करने वाला माना जा रहा है।

मुख्य बयान और तर्क

मौलाना रशीदी ने कहा, 'सवाल यह है कि 15-16 साल की लड़की रिलेशनशिप में रह सकती है — वह वैध है — और वही लड़की अपनी मर्जी से अगर निकाह करना चाहे तो वह अवैध है। यह देश का दुर्भाग्य है।' उन्होंने यह भी कहा कि अदालत को किसी लड़की की अपनी इच्छा से की गई शादी को अवैध घोषित करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

गौरतलब है कि भारत में बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत लड़की की विवाह योग्य आयु 18 वर्ष निर्धारित है और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के साथ यौन संबंध को कानूनी तौर पर संरक्षण दिया गया है — चाहे सहमति हो या न हो।

अदालत और संस्कृति पर टिप्पणी

मौलाना रशीदी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि देश पर यूरोपीय संस्कृति थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, 'ऐसे लोग बैठे हैं जो देश की सभ्यता और संस्कृति को समझने के लिए तैयार नहीं हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में बाल विवाह के विरुद्ध कानूनी सख्ती लगातार बढ़ाई जा रही है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर आरोप

इसी बातचीत में मौलाना ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर भी तीखे सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जो मुख्य आरोपी हैं, उन्हें ही सरकारी गवाह बना दिया गया। मौलाना ने कहा, 'या तो उन्होंने गुनाह अपने ऊपर ले लिया है या फिर उन्हें जान-बूझकर फँसाया गया है।'

मौलाना ने चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि इन्हें बचाने के लिए सरकारी गवाह बनाने की प्रक्रिया अपनाई गई है। हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

यूपी चुनाव 2027 तक का संदर्भ

मौलाना रशीदी ने यह भी कहा कि देश की जनता सब कुछ देख रही है और इस मामले का असर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में देखने को मिलेगा। यह टिप्पणी राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि राम मंदिर से जुड़े मामले उत्तर प्रदेश की राजनीति में संवेदनशील विषय हैं।

कानूनी पृष्ठभूमि

भारत में पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण दिया जाता है। सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालय बार-बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि नाबालिग की 'सहमति' कानून के समक्ष वैध नहीं है। इस पृष्ठभूमि में मौलाना रशीदी के बयान को महिला अधिकार और बाल संरक्षण संगठनों की ओर से आलोचना मिलने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह कानून की बुनियादी समझ के साथ टकराता है। पॉक्सो अधिनियम का उद्देश्य नाबालिग को 'सहमति' के नाम पर शोषण से बचाना है, और सर्वोच्च न्यायालय इसे बार-बार स्पष्ट कर चुका है। रिलेशनशिप को 'वैध' बताने की दलील तथ्यात्मक रूप से भी सटीक नहीं है — कानून वहाँ भी 18 वर्ष से कम को संरक्षण देता है। राम मंदिर मामले पर आरोप राजनीतिक रूप से तीखे हैं, लेकिन उनकी पुष्टि के बिना इन्हें अभी केवल एकतरफा आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने दिल्ली हाईकोर्ट के किस फैसले पर आपत्ति जताई?
मौलाना रशीदी ने पॉक्सो मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले पर आपत्ति जताई जिसमें नाबालिग लड़की के निकाह को अवैध ठहराया गया। उनका तर्क था कि 15-16 साल की लड़की का रिलेशनशिप वैध माना जाता है, तो उसी उम्र में उसकी मर्जी से निकाह को अवैध क्यों कहा जाए।
भारत में नाबालिग की शादी के बारे में कानून क्या कहता है?
भारत में बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत लड़की की विवाह योग्य न्यूनतम आयु 18 वर्ष है। पॉक्सो अधिनियम, 2012 के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति की 'सहमति' कानूनी रूप से मान्य नहीं है और उनके साथ यौन संबंध अपराध की श्रेणी में आता है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर मौलाना ने क्या आरोप लगाए?
मौलाना रशीदी ने आरोप लगाया कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में मुख्य आरोपियों को ही सरकारी गवाह बना दिया गया, जिससे वे कार्रवाई से बच गए। उन्होंने चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम लेते हुए कहा कि यह एक बड़ा षड्यंत्र है। ये आरोप अभी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
मौलाना रशीदी ने यूपी चुनाव 2027 का जिक्र क्यों किया?
मौलाना रशीदी ने कहा कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जो कुछ हो रहा है, उसे देश की जनता देख रही है और इसका राजनीतिक असर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में दिखेगा। यह टिप्पणी राम मंदिर से जुड़े मुद्दों को चुनावी परिप्रेक्ष्य में देखने का संकेत देती है।
पॉक्सो मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले और नाबालिग निकाह पर विवाद क्यों है?
यह विवाद उस कानूनी प्रश्न के इर्द-गिर्द है कि क्या मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत नाबालिग लड़की का निकाह पॉक्सो जैसे केंद्रीय कानून के तहत वैध माना जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालय पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि पॉक्सो एक विशेष कानून है जो पर्सनल लॉ पर प्रभावी है।
राष्ट्र प्रेस
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