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क्या 'सकल बन' बसंत पंचमी पर अमीर खुसरो के गुरु प्रेम से लेकर भंसाली की 'हीरामंडी' तक भावनाओं का सफर दर्शाता है?

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क्या 'सकल बन' बसंत पंचमी पर अमीर खुसरो के गुरु प्रेम से लेकर भंसाली की 'हीरामंडी' तक भावनाओं का सफर दर्शाता है?

सारांश

यह लेख अमीर खुसरो के प्रसिद्ध गाने 'सकल बन' की कहानी और उसकी गहराई को उजागर करता है, जो बसंत पंचमी के अवसर पर गुरु और शिष्य के प्रेम का प्रतीक है। जानें कैसे एक गाना सदी दर सदी प्रेम और आध्यात्म को जोड़ता है।

मुख्य बातें

'सकल बन' गाना अमीर खुसरो की रचना है।
यह गाना बसंत पंचमी की खुशी को दर्शाता है।
गाने में प्रकृति के रंगों का सुंदर वर्णन है।
गुरु और शिष्य के प्रेम का प्रतीक है।
इस गाने के माध्यम से सूफी संस्कृति का महत्व भी उजागर होता है।

मुंबई, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। संजय लीला भंसाली की पहली वेब सीरीज 'हीरामंडी' नेटफ्लिक्स पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली श्रृंखला बनी। इस सीरीज में कई बेहतरीन गाने पेश किए गए हैं, जिनमें से एक 'सकल बन' विशेष रूप से इतिहास और आध्यात्म से जुड़ा हुआ है।

'सकल बन' बसंत पंचमी के उत्सव, प्राकृतिक सौंदर्य और नई आशाओं का प्रतीक है। आइए जानते हैं कि बसंत पंचमी का यह गाना, जिसे बॉलीवुड में नथ उतराई के लिए प्रस्तुत किया गया, उसका इतिहास क्या है?

गाने के बोल इस प्रकार हैं: "सकल बन फूल रही सरसों, बन बन फूल रही सरसों, अम्बवा फूटे टेसू फूले, कोयल बोले डार-डार और गोरी करत सिंगार, सकल बन।"

इस गाने में प्रकृति के बदलते रंगों का विवरण दिया गया है। जैसे-जैसे बसंत का मौसम आता है, पूरा वातावरण प्रेम और उत्साह से भर जाता है। वेब सीरीज हीरामंडी में इस गीत को 'आलमजेब' की नथ उतराई के साथ दर्शाया गया है, जहां पीले कपड़े पहने डांसर्स आलमजेब के जीवन का जश्न मना रही हैं।

क्या आप जानते हैं कि यह गीत कहाँ से आया है और पहले किसके लिए गाया गया था? 14वीं सदी के प्रसिद्ध सूफी कवि और संगीतकार अमीर खुसरो ने यह गीत अपने गुरु हजरत निजामुद्दीन औलिया के लिए लिखा। हजरत निजामुद्दीन अपने भतीजे की मृत्यु के कारण उदास थे, जिससे खुसरो चिंतित थे। बसंत पंचमी के दिन, खुसरो ने कुछ महिलाओं को पीले फूलों के साथ देखा, जो देवी सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए थे।

यह देखकर खुसरो ने पीले कपड़े पहने और हाथ में सरसों के फूल लेकर अपने गुरु के सामने 'सकल बन' गाया। उनके इस अद्भुत दृश्य ने हजरत निजामुद्दीन के चेहरे पर मुस्कान ला दी। तभी से हर साल बसंत पंचमी पर दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह में सूफी बसंत मनाया जाता है।

आज भी वहां 'सकल बन' और 'आज बसंत मना ले सुहागन' जैसे गीत गाए जाते हैं, जो गुरु-शिष्य के प्रेम का प्रतीक हैं। इस गाने को हीरामंडी में फिल्माया गया है, जहां नथ उतराई को एक महत्वपूर्ण रस्म के रूप में दिखाया गया है। फिल्म में नथ उतराई के बाद तवायफ को अपना 'राजा' भी मिल जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वे हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सकल बन गाना किसने लिखा?
यह गाना 14वीं सदी के सूफी कवि अमीर खुसरो ने लिखा था।
इस गाने का विषय क्या है?
यह गाना बसंत पंचमी और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक है।
हीरामंडी में इस गाने को कैसे दर्शाया गया है?
इस गाने को आलमजेब की नथ उतराई के साथ फिल्माया गया है।
सकल बन गाने का महत्व क्या है?
यह गाना गुरु-शिष्य के प्रेम और आध्यात्म की गहराई को दर्शाता है।
बसंत पंचमी पर इसे क्यों गाया जाता है?
इस दिन इसे गाकर सूफी बसंत मनाया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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