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संचार साथी पोर्टल के 30 करोड़ विजिट्स पूरे, 14 लाख से अधिक चोरी-खोए मोबाइल बरामद

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संचार साथी पोर्टल के 30 करोड़ विजिट्स पूरे, 14 लाख से अधिक चोरी-खोए मोबाइल बरामद

सारांश

मई 2023 में लॉन्च हुए संचार साथी पोर्टल ने 30 करोड़ विजिट्स का पड़ाव पार किया। 14 लाख से अधिक चोरी-खोए मोबाइल बरामद, 50 लाख फर्जी कनेक्शन काटे गए और 12.80 लाख साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज — यह आँकड़े बताते हैं कि यह पोर्टल अब भारत की डिजिटल सुरक्षा का अहम स्तंभ बन चुका है।

मुख्य बातें

संचार साथी पोर्टल ने मई 2023 के लॉन्च के बाद से 30 करोड़ से अधिक विजिट्स दर्ज की हैं।
देशभर में 60.96 लाख खोए-चोरी हुए मोबाइल ब्लॉक; 14 लाख से अधिक बरामद।
चक्षु प्लेटफॉर्म पर 12.80 लाख शिकायतें; लगभग 59.82 लाख मामलों में कार्रवाई और 50 लाख+ कनेक्शन काटे गए।
नागरिकों के 4 करोड़ से अधिक अनुरोधों का निपटारा; फर्जी सिम दुरुपयोग पर अंकुश।
FRI और DIP प्रणाली के ज़रिए बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ रीयल-टाइम खुफिया जानकारी साझा।

दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा विकसित संचार साथी पोर्टल ने मई 2023 में लॉन्च होने के बाद से 30 करोड़ से अधिक विजिट्स का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। संचार मंत्रालय ने 5 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक बयान में कहा कि यह उपलब्धि दूरसंचार-आधारित साइबर धोखाधड़ी के विरुद्ध भारतीय नागरिकों की बढ़ती सतर्कता और सक्रिय भागीदारी का प्रमाण है। पोर्टल के माध्यम से अब तक देशभर में 14 लाख से अधिक खोए और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं।

मुख्य उपलब्धियाँ एक नज़र में

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, संचार साथी के अंतर्गत 60.96 लाख खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन ब्लॉक किए गए हैं। इनमें से 37.85 लाख मोबाइल ट्रेस किए जा चुके हैं और DoT, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं तथा राज्य पुलिस के संयुक्त समन्वय से 14 लाख से अधिक फोन नागरिकों को वापस दिलाए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, नागरिकों द्वारा अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जाँच के लिए दर्ज 4 करोड़ से अधिक अनुरोधों का निपटारा किया जा चुका है, जिससे फर्जी पहचान या चोरी के आधार पर जारी सिम कार्डों के दुरुपयोग पर प्रभावी अंकुश लगा है।

चक्षु: धोखाधड़ी रिपोर्टिंग का केंद्र

संचार साथी की प्रमुख सेवाओं में 'चक्षु' प्लेटफॉर्म शामिल है, जहाँ नागरिक फर्जी केवाईसी अपडेट, नकली निवेश योजनाओं, सरकारी अधिकारियों के नाम पर की जाने वाली ठगी, और फर्जी नौकरी व ऋण प्रस्तावों जैसे संदिग्ध संचार की शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

मंत्रालय के अनुसार, चक्षु पर अब तक 12.80 लाख संदिग्ध धोखाधड़ी संबंधी शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों के आधार पर करीब 59.82 लाख मामलों में कार्रवाई की गई है, जिनमें 50 लाख से अधिक मोबाइल कनेक्शन डिस्कनेक्ट किए गए हैं। गौरतलब है कि यह कार्रवाई धोखाधड़ी होने से पहले ही की जा रही है, जो इस पोर्टल की प्रतिबंधात्मक क्षमता को रेखांकित करती है।

वित्तीय धोखाधड़ी के विरुद्ध डिजिटल नेटवर्क

नागरिकों की शिकायतों से प्राप्त जानकारी फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI) प्रणाली को भी सशक्त बनाती है, जो उन मोबाइल नंबरों के वित्तीय जोखिम का आकलन करती है जो साइबर ठगी से जुड़े हो सकते हैं।

यह खुफिया जानकारी डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) के ज़रिए बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं, टेलीकॉम कंपनियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच साझा की जाती है। इससे संदिग्ध लेनदेन की पहचान और वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम में प्रणालीगत मज़बूती आई है।

आम नागरिक के लिए क्या-क्या सुविधाएँ

संचार साथी पोर्टल पर उपयोगकर्ता संदिग्ध कॉल, एसएमएस और व्हाट्सएप संदेशों की शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा, वे अपने नाम पर जारी सभी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी जाँच सकते हैं, खोया या चोरी हुआ फोन ब्लॉक करा सकते हैं, और नया मोबाइल खरीदने से पहले उसकी प्रामाणिकता सत्यापित कर सकते हैं।

मंत्रालय ने पोर्टल के उपयोगकर्ताओं को 'साइबर वॉरियर्स' की संज्ञा दी है, यह कहते हुए कि उनकी जानकारी फर्जी नंबरों, संदिग्ध उपकरणों और नए साइबर ठगी के पैटर्न की समय रहते पहचान में निर्णायक भूमिका निभाती है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में साइबर अपराध की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं और डिजिटल भुगतान का दायरा भी विस्तृत हो रहा है। संचार साथी की बढ़ती पहुँच और प्रभाव यह संकेत देती है कि DoT का नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण ज़मीनी स्तर पर परिणाम दे रहा है। आने वाले महीनों में DIP और FRI प्रणाली के और अधिक एकीकरण से साइबर धोखाधड़ी पर शिकंजा और कसा जा सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 30 करोड़ विजिट्स में से कितने उपयोगकर्ता एक बार आकर चले गए और कितने नियमित रूप से प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं — यह अंतर पोर्टल की दीर्घकालिक प्रभावशीलता तय करेगा। 14 लाख मोबाइल की बरामदगी उत्साहजनक है, परंतु 60.96 लाख ब्लॉक किए गए फोन में से केवल 37.85 लाख ट्रेस हो पाए और उनमें से भी 14 लाख ही वापस मिले — यह अनुपात बताता है कि तकनीकी ढाँचे में अभी भी गैप हैं। साइबर ठगी के बढ़ते परिष्कार के सामने चक्षु जैसे प्लेटफॉर्म की सफलता तभी टिकाऊ होगी जब नागरिक साक्षरता और एजेंसियों के बीच वास्तविक समय समन्वय को और गहरा किया जाए।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संचार साथी पोर्टल क्या है और इसे किसने बनाया है?
संचार साथी दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा विकसित एक नागरिक-केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे मई 2023 में लॉन्च किया गया था। यह पोर्टल नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी की शिकायत, मोबाइल ब्लॉकिंग, फोन की प्रामाणिकता जाँच और अपने नाम पर जारी कनेक्शनों की निगरानी जैसी सुविधाएँ देता है।
संचार साथी के ज़रिए कितने मोबाइल फोन बरामद हुए हैं?
अब तक पोर्टल के माध्यम से 60.96 लाख खोए या चोरी हुए मोबाइल ब्लॉक किए गए हैं, जिनमें से 37.85 लाख ट्रेस किए गए और DoT, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं तथा राज्य पुलिस के समन्वय से 14 लाख से अधिक फोन बरामद कर नागरिकों को लौटाए गए हैं।
चक्षु प्लेटफॉर्म क्या है और यह कैसे काम करता है?
चक्षु संचार साथी के अंतर्गत एक शिकायत सेवा है, जहाँ नागरिक फर्जी केवाईसी, नकली निवेश योजनाओं, सरकारी अधिकारी बनकर की जाने वाली ठगी और फर्जी नौकरी-ऋण प्रस्तावों जैसे संदिग्ध संचार की रिपोर्ट कर सकते हैं। इन शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए अब तक 59.82 लाख मामलों में कदम उठाए गए हैं।
संचार साथी पर कौन-कौन सी सेवाएँ उपलब्ध हैं?
पोर्टल पर नागरिक संदिग्ध कॉल, एसएमएस और व्हाट्सएप संदेशों की शिकायत दर्ज कर सकते हैं, अपने नाम पर जारी सभी मोबाइल कनेक्शनों की जाँच कर सकते हैं, खोया-चोरी हुआ फोन ब्लॉक करा सकते हैं, और नया मोबाइल खरीदने से पहले उसकी प्रामाणिकता सत्यापित कर सकते हैं।
संचार साथी की जानकारी बैंकों और पुलिस को कैसे मिलती है?
नागरिकों की शिकायतों से तैयार खुफिया जानकारी फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI) प्रणाली को सशक्त करती है और डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) के ज़रिए बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं, टेलीकॉम कंपनियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा की जाती है।
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