5 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

संचार साथी पोर्टल पर 30 करोड़ से अधिक विजिट्स; ₹5,000 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी रोकने में मिली सफलता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
संचार साथी पोर्टल पर 30 करोड़ से अधिक विजिट्स; ₹5,000 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी रोकने में मिली सफलता

सारांश

संचार साथी पोर्टल महज़ एक सरकारी वेबसाइट नहीं — यह ₹5,000 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी रोकने वाला नागरिक-संचालित सुरक्षा तंत्र बन चुका है। 30 करोड़ विजिट्स और 14 लाख हैंडसेट बरामदगी के साथ, यह डिजिटल भारत की सबसे प्रभावशाली सामूहिक साइबर ढाल के रूप में उभरा है।

मुख्य बातें

संचार साथी पोर्टल पर मई 2023 से अब तक 30 करोड़ से अधिक विजिट्स दर्ज हो चुकी हैं।
पोर्टल की मदद से ₹5,000 करोड़ से ज़्यादा की संदिग्ध साइबर धोखाधड़ी को रोका गया।
14 लाख से अधिक खोए और चोरी हुए हैंडसेट बरामद कराने में सहायता मिली।
नागरिकों के 4 करोड़ से ज़्यादा मोबाइल कनेक्शन जाँच-संबंधी अनुरोधों का समाधान किया गया।
संचार साथी ऐप अंग्रेज़ी, हिंदी और 21 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है।

संचार साथी पोर्टल पर मई 2023 में लॉन्च होने के बाद से अब तक कुल विजिट्स की संख्या 30 करोड़ से अधिक हो चुकी है, और इस पोर्टल की मदद से ₹5,000 करोड़ से ज़्यादा के संदिग्ध साइबर-फ्रॉड से होने वाले नुकसान को रोकने में सफलता मिली है। संचार मंत्रालय ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी सार्वजनिक की।

मुख्य उपलब्धियाँ

मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, संचार साथी पोर्टल ने 14 लाख से अधिक खोए और चोरी हुए हैंडसेट बरामद कराने में सहायता की है। इसके अलावा, नागरिकों के 4 करोड़ से ज़्यादा उन अनुरोधों का समाधान किया गया है, जिनमें लोगों ने अपने नाम पर चल रहे मोबाइल कनेक्शन की जानकारी माँगी थी।

दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा विकसित यह पोर्टल प्रत्येक मोबाइल उपयोगकर्ता को सरल और सुलभ डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराता है। इन टूल्स के ज़रिये नागरिक संदिग्ध कॉल या संदेशों की रिपोर्ट कर सकते हैं, अपने नाम पर जारी कनेक्शन की संख्या जाँच सकते हैं, खोए या चोरी हुए हैंडसेट को ब्लॉक कर सकते हैं, और हैंडसेट खरीदने से पूर्व उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि कर सकते हैं।

साइबर सुरक्षा में नागरिक भागीदारी

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पोर्टल पर प्रत्येक विजिट किसी न किसी नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी को कार्रवाई योग्य डेटा में रूपांतरित किया जाता है, जिससे DoT, बैंक और कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ धोखेबाजों को उनके अगले शिकार तक पहुँचने से पहले ही रोकने में सक्षम होती हैं।

मंत्रालय के बयान के अनुसार, 'संचार साथी' का उपयोग करने वाला प्रत्येक नागरिक एक 'साइबर योद्धा' की भूमिका निभाता है और साइबर धोखाधड़ी के विरुद्ध एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है। यह ऐसे समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब देश में डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

पोर्टल की विशेषताएँ और पहुँच

संचार साथी पोर्टल को उपयोगकर्ता के अनुकूल सेवा प्रक्रियाओं के साथ तैयार किया गया है। इसमें एक सार्वजनिक डैशबोर्ड के साथ-साथ दूरसंचार सुरक्षा, धोखाधड़ी से बचाव और ज़िम्मेदार डिजिटल व्यवहार पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।

गौरतलब है कि संचार साथी मोबाइल ऐप अंग्रेज़ी, हिंदी और 21 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे देश के कोने-कोने के नागरिक इसे अपनी मातृभाषा में इस्तेमाल कर सकते हैं। यह भाषाई समावेशिता इसे डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक व्यापक जन-केंद्रित पहल बनाती है।

आगे की राह

संचार साथी पोर्टल की बढ़ती उपयोगकर्ता संख्या और उपलब्धियाँ दर्शाती हैं कि साइबर सुरक्षा के प्रति नागरिकों में जागरूकता बढ़ रही है। आँकड़ों के अनुसार, जैसे-जैसे डिजिटल लेनदेन का दायरा विस्तृत होगा, ऐसे प्लेटफ़ॉर्म का महत्व और भी बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिक-संचालित रिपोर्टिंग मॉडल साइबर अपराध पर नकेल कसने का एक प्रभावी और स्केलेबल तरीका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ₹5,000 करोड़ की 'रोकी गई धोखाधड़ी' को मापने की पद्धति क्या है — क्योंकि इस तरह के अनुमान अक्सर व्यापक मान्यताओं पर आधारित होते हैं। 30 करोड़ विजिट्स बताते हैं कि नागरिक जागरूकता बढ़ी है, पर यह भी दर्शाते हैं कि साइबर अपराध का भय कितना व्यापक हो चुका है। 21 भाषाओं में उपलब्धता डिजिटल समावेश की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, लेकिन ग्रामीण और वृद्ध उपयोगकर्ताओं तक वास्तविक पहुँच के स्वतंत्र आकलन के बिना यह संख्या अधूरी तस्वीर पेश करती है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संचार साथी पोर्टल क्या है और यह कैसे काम करता है?
संचार साथी पोर्टल दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा विकसित एक नागरिक-केंद्रित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है, जो मई 2023 में लॉन्च हुआ था। इसके ज़रिये नागरिक संदिग्ध कॉल की रिपोर्ट कर सकते हैं, अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन जाँच सकते हैं, खोए हैंडसेट ब्लॉक करा सकते हैं और हैंडसेट की प्रामाणिकता सत्यापित कर सकते हैं।
संचार साथी पोर्टल से कितनी साइबर धोखाधड़ी रोकी गई है?
संचार मंत्रालय के अनुसार, इस पोर्टल की मदद से ₹5,000 करोड़ से अधिक की संदिग्ध साइबर धोखाधड़ी को रोका जा चुका है। साथ ही 14 लाख से अधिक खोए और चोरी हुए हैंडसेट बरामद कराने में भी सहायता मिली है।
क्या संचार साथी ऐप हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है?
हाँ, संचार साथी मोबाइल ऐप अंग्रेज़ी और हिंदी के अलावा 21 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। इससे देश के विभिन्न राज्यों के नागरिक अपनी मातृभाषा में इस सेवा का लाभ उठा सकते हैं।
संचार साथी पोर्टल पर अब तक कितने लोग आ चुके हैं?
मई 2023 में लॉन्च होने के बाद से संचार साथी पोर्टल पर कुल विजिट्स की संख्या 30 करोड़ से अधिक हो गई है। नागरिकों के 4 करोड़ से ज़्यादा मोबाइल कनेक्शन जाँच-संबंधी अनुरोधों का भी समाधान किया जा चुका है।
संचार साथी पोर्टल पर संदिग्ध कॉल या मैसेज की रिपोर्ट कैसे करें?
संचार साथी पोर्टल पर जाकर या इसका मोबाइल ऐप डाउनलोड करके नागरिक सीधे संदिग्ध कॉल या संदेशों की रिपोर्ट कर सकते हैं। रिपोर्ट की गई जानकारी DoT, बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा की जाती है ताकि त्वरित कार्रवाई हो सके।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 39 मिनट पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 10 महीने पहले
  4. 10 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले