RSS सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने किया 'संघ प्रार्थना: गीता के परिप्रेक्ष्य में' का लोकार्पण
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल की उपस्थिति में 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के विचार विनिमय न्यास सभागार, केशव कुंज, झंडेवाला में डॉ. मार्कंडेय आहूजा की पुस्तक 'संघ प्रार्थना: गीता के परिप्रेक्ष्य में' का लोकार्पण समारोह सम्पन्न हुआ। सुरुचि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस कृति में भगवद्गीता के आलोक में संघ प्रार्थना के विविध आयामों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। प्रख्यात गीता मनीषी एवं जीओ गीता के संस्थापक स्वामी श्री ज्ञानानन्द महाराज ने कार्यक्रम में आशीर्वचन प्रदान किया।
पुस्तक का परिचय और रचना-उद्देश्य
पुस्तक के लेखक डॉ. मार्कंडेय आहूजा ने रचना-प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ प्रार्थना केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दृष्टि, राष्ट्रचेतना, कर्तव्यबोध और आध्यात्मिक मूल्यों का सजीव घोष है। उनके अनुसार इस पुस्तक में भगवद्गीता के आलोक में संघ प्रार्थना के विविध पहलुओं का गहन विश्लेषण किया गया है, जो स्वयंसेवकों और सामान्य पाठकों दोनों के लिए उपयोगी है।
मुख्य वक्ता का उद्बोधन
डॉ. कृष्ण गोपाल ने अपने संबोधन में भारतीय चिंतन की परंपरा, गीता के सार्वकालिक संदेश और राष्ट्रजीवन में प्रार्थना के महत्त्व पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि गीता ने विश्व के सामने एक नवीन प्रकार का दर्शन प्रस्तुत किया है और यह मनुष्य को उसके कर्तव्य का बोध कराती है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के मोह का निवारण किया था, उसी प्रकार यह पुस्तक स्वयंसेवकों के मन में कर्तव्य और राष्ट्रभाव को जागृत करने का कार्य करेगी।
स्वामी ज्ञानानन्द महाराज का आशीर्वचन
स्वामी श्री ज्ञानानन्द महाराज ने उपस्थित जनों को गीता के संदेश को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि संघ प्रार्थना का मूल भाव गीता के संदेश से ही प्रेरित है और इसका उद्देश्य मन पर पड़े अज्ञान के आवरण को दूर करना है। सूर्य और बादलों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सत्य सदैव विद्यमान रहता है — आवश्यकता केवल उसके आवरण को हटाने की होती है। उन्होंने समारोह के अंत में सामूहिक प्रार्थना भी कराई।
सुरुचि प्रकाशन की साहित्यिक यात्रा
सुरुचि प्रकाशन के प्रबंध निदेशक रजनीश जिंदल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि प्रकाशन देशभर के 150 से अधिक पुस्तक-विक्रय केंद्रों और ऑनलाइन माध्यमों के ज़रिये 600 से अधिक शीर्षक पाठकों तक पहुँचा रहा है। कार्यक्रम में सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंकुर पाठक, न्यासी मनमोहन सिंह, सुमित मालूजा और राहुल सिंह सहित शिक्षा, साहित्य, अध्यात्म तथा सामाजिक जीवन से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
समारोह का समापन
कार्यक्रम का संचालन संपूर्ण बागड़ी ने किया। उपस्थित अतिथियों ने पुस्तक की विषयवस्तु की सराहना करते हुए इसे भारतीय चिंतन को समझने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कृति बताया। वन्दे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ समारोह का समापन हुआ। यह पुस्तक भारतीय अध्यात्म और संगठनात्मक चेतना के संगम को नए पाठकों तक पहुँचाने का एक सार्थक प्रयास है।