'भक्षक' में भास्कर बने संजय मिश्रा को 72वाँ नेशनल अवॉर्ड, बोले — 'अच्छे किरदार ही कलाकार की असली चाहत'
सारांश
मुख्य बातें
हिंदी सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता संजय मिश्रा को फिल्म 'भक्षक' में उनके यादगार अभिनय के लिए 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के सम्मान से नवाज़ा गया है। दशकों के फिल्मी सफर में गंभीर और हल्की — दोनों तरह की भूमिकाओं में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले मिश्रा के लिए यह पुरस्कार उनके करियर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
पुरस्कार पर संजय मिश्रा की प्रतिक्रिया
इस सम्मान पर खुशी जाहिर करते हुए संजय मिश्रा ने कहा, 'एक अभिनेता की सबसे बड़ी चाहत यही होती है कि उसे अच्छी कहानियों और मजबूत किरदारों के साथ काम करने का मौका मिलता रहे। जब उसी मेहनत और सफर को नेशनल अवॉर्ड जैसे बड़े सम्मान से सम्मानित किया जाता है तो यह किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि बन जाती है।'
उन्होंने आगे कहा, ''भक्षक' सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि एक जरूरी कहानी है, जिसे दर्शकों तक पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण था। मैं फिल्म के निर्देशक पुलकित, रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और नेटफ्लिक्स का धन्यवाद करता हूं। यह पुरस्कार सिर्फ मेरे व्यक्तिगत प्रदर्शन का सम्मान नहीं है, बल्कि पूरी फिल्म की टीम की मेहनत और लगन की पहचान है।'
फिल्म में भास्कर का किरदार
फिल्म 'भक्षक' में संजय मिश्रा ने भास्कर नाम का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा। उनकी शांत लेकिन गहरी अदाकारी ने इस किरदार को एक अलग ही आयाम दिया। संवादों, भावनाओं और सूक्ष्म अभिव्यक्तियों के ज़रिए उन्होंने भास्कर को जीवंत कर दिया।
गौरतलब है कि 'भक्षक' को अपनी मजबूत कहानी और एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करने के लिए व्यापक प्रशंसा मिली थी। फिल्म का निर्देशन पुलकित ने किया है और निर्माण रेड चिलीज एंटरटेनमेंट ने।
टीम को श्रेय और सामाजिक संदेश
संजय मिश्रा ने फिल्म से जुड़े हर कलाकार और तकनीशियन को इस सफलता का बराबर का हिस्सेदार बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी कहानियाँ समाज में ज़रूरी मुद्दों पर बातचीत का रास्ता खोलती हैं और इन्हें पर्दे पर लाना एक ज़िम्मेदारी भी है।
यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी ओटीटी सिनेमा में सामाजिक विषयों पर आधारित कंटेंट को राष्ट्रीय मंचों पर बढ़-चढ़कर पहचान मिल रही है।
करियर का सफर और आगे की राह
दशकों के करियर में संजय मिश्रा ने कॉमेडी से लेकर ड्रामा तक हर विधा में अपनी काबिलियत साबित की है। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मिला यह सम्मान उनके उस सफर की स्वीकृति है जिसमें उन्होंने हर भूमिका को पूरी ईमानदारी से जिया। इस पुरस्कार के बाद उनसे और भी सशक्त किरदारों में नज़र आने की उम्मीद बढ़ गई है।