संत गजानन महाराज के 150वें प्रकट दिवस पर ₹150 स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी करने की माँग, मंत्री प्रतापराव जाधव ने लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव — जो आयुष मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का दायित्व संभालते हैं — ने भारत सरकार से संत गजानन महाराज के 150वें प्रकट दिवस के उपलक्ष्य में ₹150 का स्मारक सिक्का और एक स्मारक डाक टिकट जारी करने का आग्रह किया है। यह अनुरोध 25 जुलाई 2026 को तीन वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों को संबोधित अलग-अलग पत्रों के माध्यम से किया गया।
किन मंत्रियों को लिखे गए पत्र
जाधव ने वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण, संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखे हैं। इन पत्रों में संबंधित मंत्रालयों से प्रस्ताव पर विचार कर आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।
संत गजानन महाराज की विरासत और शेगांव का महत्व
पत्रों में जाधव ने रेखांकित किया कि संत गजानन महाराज फरवरी 1878 में महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगांव में पहली बार प्रकट हुए थे। वे महाराष्ट्र और समूचे भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत में एक पूजनीय स्थान रखते हैं। उनकी जीवनी और शिक्षाएँ धार्मिक ग्रंथ श्री गजानन विजय में संकलित हैं, जो करोड़ों अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
शेगांव आज भारत के प्रमुख तीर्थ केंद्रों में गिना जाता है और देश-विदेश से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। गजानन महाराज संस्थान, शेगांव ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ग्रामीण विकास, सामाजिक कल्याण और मानवीय सेवा के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है, जिससे शेगांव की पहचान एक आध्यात्मिक एवं सामुदायिक सेवा केंद्र के रूप में और सुदृढ़ हुई है।
राष्ट्रपति की शेगांव यात्रा का संदर्भ
जाधव ने अपने पत्र में 25 फरवरी 2026 को भारत की राष्ट्रपति की शेगांव यात्रा का भी उल्लेख किया। राष्ट्रपति ने आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय आरोग्य मेले का उद्घाटन किया था। मंत्री के अनुसार, इस यात्रा ने आध्यात्मिकता, संस्कृति और जनसेवा के केंद्र के रूप में शेगांव के राष्ट्रीय महत्व को और भी रेखांकित किया।
150वाँ प्रकट दिवस: तिथि और महत्व
संत गजानन महाराज का 150वाँ प्रकट दिवस 17 फरवरी 2028 को मनाया जाएगा। यह देश भर के करोड़ों भक्तों के लिए एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक अवसर है। जाधव ने कहा कि प्रस्तावित स्मारक सिक्का और डाक टिकट संत को एक उचित राष्ट्रीय श्रद्धांजलि होगी और उनसे प्रेरित लाखों भक्तों की आस्था एवं भावनाओं का सम्मान करेगी।
आगे क्या होगा
तीनों मंत्रालयों — वित्त, संचार और संस्कृति — की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्मारक सिक्के और डाक टिकट जारी करने के लिए सामान्यतः संबंधित मंत्रालयों की अनुशंसा के बाद सरकारी प्रक्रिया पूरी की जाती है। 17 फरवरी 2028 की समय-सीमा को देखते हुए, भक्त और सांस्कृतिक संगठन इस प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।