आजम खान को गृह मंत्री बनाने के बयान पर भड़की भाजपा, सपा पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव के उस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने पर आजम खान को गृह मंत्री बनाया जाएगा। 13 अगस्त को सामने आए इस विवाद में भाजपा नेताओं ने समाजवादी पार्टी पर अपराधियों को संरक्षण देने का सीधा आरोप लगाया है।
भाजपा मंत्री रवींद्र जायसवाल का पलटवार
गाजीपुर में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री रवींद्र जायसवाल ने सपा की राजनीति को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी आतंकवादियों, गुंडों और अपराधियों को मंत्री पद देने का काम करती है, जबकि भाजपा ऐसे तत्वों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजती है।
जायसवाल ने कहा, 'सपा वाले आतंकवादी, गुंडे और अपराधियों को ही मंत्री बनाते हैं, वहीं भाजपा गुंडों और अपराधियों को जेल में डालती है। जनता ही तय करेगी कि प्रदेश में किस तरह की सरकार चाहिए।'
भाजपा विधायक पूनम संखवार की प्रतिक्रिया
कानपुर देहात से भाजपा विधायक पूनम संखवार ने भी शिवपाल यादव के बयान को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी को 2027 में सत्ता में वापसी के सपने देखना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आजम खान किसी भी स्थिति में मंत्री नहीं बनेंगे।
मंत्री संजय निषाद का तंज — 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने'
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने आजम खान को गृह मंत्री बनाए जाने की बात को 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' करार दिया। निषाद ने यह भी याद दिलाया कि जब सपा सत्ता में थी, तब भी उसने आजम खान को गृह मंत्री नहीं बनाया था।
निषाद ने आरोप लगाया कि चुनावी राजनीति में वोट साधने के लिए इस तरह के बयान सामने आ रहे हैं और सपा ने खुद आजम खान के साथ विश्वासघात किया है। यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ दोनों दलों में तेज़ हो रही हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति के एक प्रभावशाली मुस्लिम चेहरा रहे हैं और सपा के भीतर उनकी स्थिति लंबे समय से विवादास्पद रही है। विभिन्न आपराधिक मामलों में उनके नाम के उल्लेख के बाद से उन्हें लेकर किसी भी बयान पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है। आलोचकों का कहना है कि शिवपाल यादव का यह बयान सपा की आंतरिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जो अल्पसंख्यक मतदाताओं को साधने की कोशिश करता है।
आगे क्या होगा
इस पूरे विवाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के बयान और पलटवार का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। भाजपा इस मुद्दे को कानून-व्यवस्था की राजनीति से जोड़कर अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश करती दिख रही है।