आजम खान को गृहमंत्री बनाने के बयान पर जदयू का पलटवार: 'जो होगा ही नहीं, उसका वादा बेमानी'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक शिवपाल सिंह यादव के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा कि 'यूपी में सपा सरकार बनी तो आजम खान गृहमंत्री बनेंगे' — जनता दल (यूनाइटेड) यानी जदयू के नेताओं ने 13 अगस्त को तीखी प्रतिक्रिया दी। पटना में जदयू विधायक श्याम रजक ने सवाल उठाया कि जो सत्ता में आने की संभावना ही नहीं है, उसके नाम पर मंत्री पद बाँटने का वादा करने का क्या औचित्य है।
जदयू विधायक श्याम रजक का तंज
श्याम रजक ने कहा, 'यह सब टीआरपी बढ़ाने के लिए है। शिवपाल यादव लोगों को भ्रमित करके असली मुद्दे से हटाकर सिर्फ आकर्षित मुद्दे लाकर वोट कैसे कैप्चर किया जाए, इसी पर काम कर रहे हैं। कौन गृहमंत्री बनेगा, कौन नहीं बनेगा — ये सब बातों पर टिप्पणी करना अपने आप को गंदा करने जैसा है।' रजक ने यह भी कहा कि जनता इन बातों से गुमराह नहीं होगी और असली मुद्दे महंगाई, बेरोज़गारी और विकास हैं।
एफसीआरए बिल और जेपीसी पर जदयू का रुख
विदेशी अंशदान विनियमन (संशोधन) विधेयक यानी एफसीआरए बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजे जाने पर जदयू ने इसे सकारात्मक कदम बताया। श्याम रजक ने कहा कि जेपीसी में सभी दलों के प्रतिनिधि होते हैं और वह गहन चर्चा के बाद निर्णय देती है, जिसके बाद बिल फिर संसद में आएगा और बहुमत के आधार पर पारित होगा।
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि यह फैसला विपक्ष के लिए भी नसीहत है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से ईसाइयों को बरगलाने की कोशिश हो रही थी, जेपीसी बनाए जाने के निर्णय का जब चर्च बॉडीज ने समर्थन किया है, तो यह स्पष्ट है कि इस फैसले से किसी भी धर्म या धर्मावलंबी को नाराज़गी नहीं है। प्रसाद ने जोड़ा कि विदेशी धन के सही नियमन के लिए यह बिल संसद में आया और अब जेपीसी का दायित्व है कि इसे तार्किक परिणति तक पहुँचाए।
पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा पर जदयू की राय
पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों के संदर्भ में राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका की गौरवशाली परंपरा रही है, लेकिन कभी-कभी कुछ न्यायाधीशों के खिलाफ जो चीज़ें सामने आती हैं, वे न्यायपालिका के लिए अग्निपरीक्षा के समान होती हैं। उन्होंने कहा कि यशवंत वर्मा के खिलाफ जो आरोप लगे हैं, वे साबित होते दिख रहे हैं, और अब संसद को तय करना है कि महाभियोग के ज़रिए फैसला होगा या कोई अन्य कार्यवाही।
प्रसाद ने स्पष्ट किया कि यशवंत वर्मा का पद से त्यागपत्र पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, 'अगर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं तो कठोर संदेश जाना बिल्कुल सही होगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों और न्यायपालिका की साख बनी रहे।'
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं और सपा अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटी है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान मतदाताओं को लुभाने की रणनीति का हिस्सा हैं, न कि किसी ठोस नीतिगत एजेंडे की झलक। गौरतलब है कि आजम खान कई कानूनी मामलों में उलझे रहे हैं, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति पहले से ही विवादास्पद रही है। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज़ होने की संभावना है।