13 अगस्त 2026
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आजम खान को गृहमंत्री बनाने के बयान पर जदयू का पलटवार: 'जो होगा ही नहीं, उसका वादा बेमानी'

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आजम खान को गृहमंत्री बनाने के बयान पर जदयू का पलटवार: 'जो होगा ही नहीं, उसका वादा बेमानी'

सारांश

सपा विधायक शिवपाल सिंह यादव के आजम खान को गृहमंत्री बनाने के वादे पर जदयू ने तीखा पलटवार किया — 'जो होगा ही नहीं, उसका वादा सिर्फ वोट की राजनीति है।' साथ ही जदयू ने एफसीआरए बिल के जेपीसी को जाने और न्यायाधीश यशवंत वर्मा मामले पर भी अपना रुख स्पष्ट किया।

मुख्य बातें

जदयू विधायक श्याम रजक ने शिवपाल सिंह यादव के आजम खान को गृहमंत्री बनाने के बयान को 'टीआरपी की राजनीति' बताया।
रजक ने कहा कि असली मुद्दे महंगाई , बेरोज़गारी और विकास हैं, न कि मंत्री पद के वादे।
जदयू ने एफसीआरए बिल को जेपीसी भेजे जाने को सकारात्मक कदम बताया; कहा — सभी दलों की भागीदारी से गहन चर्चा होगी।
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि चर्च बॉडीज के समर्थन से साफ है कि एफसीआरए बिल किसी धर्म के खिलाफ नहीं।
पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा पर प्रसाद बोले — त्यागपत्र पर्याप्त नहीं, महाभियोग या कठोर कार्यवाही ज़रूरी।

समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक शिवपाल सिंह यादव के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा कि 'यूपी में सपा सरकार बनी तो आजम खान गृहमंत्री बनेंगे' — जनता दल (यूनाइटेड) यानी जदयू के नेताओं ने 13 अगस्त को तीखी प्रतिक्रिया दी। पटना में जदयू विधायक श्याम रजक ने सवाल उठाया कि जो सत्ता में आने की संभावना ही नहीं है, उसके नाम पर मंत्री पद बाँटने का वादा करने का क्या औचित्य है।

जदयू विधायक श्याम रजक का तंज

श्याम रजक ने कहा, 'यह सब टीआरपी बढ़ाने के लिए है। शिवपाल यादव लोगों को भ्रमित करके असली मुद्दे से हटाकर सिर्फ आकर्षित मुद्दे लाकर वोट कैसे कैप्चर किया जाए, इसी पर काम कर रहे हैं। कौन गृहमंत्री बनेगा, कौन नहीं बनेगा — ये सब बातों पर टिप्पणी करना अपने आप को गंदा करने जैसा है।' रजक ने यह भी कहा कि जनता इन बातों से गुमराह नहीं होगी और असली मुद्दे महंगाई, बेरोज़गारी और विकास हैं।

एफसीआरए बिल और जेपीसी पर जदयू का रुख

विदेशी अंशदान विनियमन (संशोधन) विधेयक यानी एफसीआरए बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजे जाने पर जदयू ने इसे सकारात्मक कदम बताया। श्याम रजक ने कहा कि जेपीसी में सभी दलों के प्रतिनिधि होते हैं और वह गहन चर्चा के बाद निर्णय देती है, जिसके बाद बिल फिर संसद में आएगा और बहुमत के आधार पर पारित होगा।

जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि यह फैसला विपक्ष के लिए भी नसीहत है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से ईसाइयों को बरगलाने की कोशिश हो रही थी, जेपीसी बनाए जाने के निर्णय का जब चर्च बॉडीज ने समर्थन किया है, तो यह स्पष्ट है कि इस फैसले से किसी भी धर्म या धर्मावलंबी को नाराज़गी नहीं है। प्रसाद ने जोड़ा कि विदेशी धन के सही नियमन के लिए यह बिल संसद में आया और अब जेपीसी का दायित्व है कि इसे तार्किक परिणति तक पहुँचाए।

पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा पर जदयू की राय

पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों के संदर्भ में राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका की गौरवशाली परंपरा रही है, लेकिन कभी-कभी कुछ न्यायाधीशों के खिलाफ जो चीज़ें सामने आती हैं, वे न्यायपालिका के लिए अग्निपरीक्षा के समान होती हैं। उन्होंने कहा कि यशवंत वर्मा के खिलाफ जो आरोप लगे हैं, वे साबित होते दिख रहे हैं, और अब संसद को तय करना है कि महाभियोग के ज़रिए फैसला होगा या कोई अन्य कार्यवाही।

प्रसाद ने स्पष्ट किया कि यशवंत वर्मा का पद से त्यागपत्र पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, 'अगर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं तो कठोर संदेश जाना बिल्कुल सही होगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों और न्यायपालिका की साख बनी रहे।'

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं और सपा अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटी है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान मतदाताओं को लुभाने की रणनीति का हिस्सा हैं, न कि किसी ठोस नीतिगत एजेंडे की झलक। गौरतलब है कि आजम खान कई कानूनी मामलों में उलझे रहे हैं, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति पहले से ही विवादास्पद रही है। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ नाम और पद की घोषणाएँ ज़मीनी मुद्दों से ध्यान हटाने का काम करती हैं। जदयू की प्रतिक्रिया भले ही तार्किक हो, लेकिन यह भी उसी मीडिया चक्र को हवा देती है जिसे वह 'टीआरपी की राजनीति' कह रही है। एफसीआरए बिल पर जदयू का जेपीसी-समर्थन एनडीए की एकजुटता दिखाता है, पर असली सवाल यह है कि विदेशी धन के नियमन में पारदर्शिता कितनी सुनिश्चित होगी। यशवंत वर्मा मामले में 'त्यागपत्र पर्याप्त नहीं' की माँग न्यायिक जवाबदेही की दिशा में सही संकेत है, लेकिन महाभियोग की प्रक्रिया की धीमी गति ऐतिहासिक रूप से निराशाजनक रही है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवपाल सिंह यादव ने आजम खान के बारे में क्या बयान दिया?
सपा विधायक शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनती है तो आजम खान गृहमंत्री बनेंगे। इस बयान पर जदयू नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
जदयू ने इस बयान पर क्या कहा?
जदयू विधायक श्याम रजक ने कहा कि जो सत्ता में आएगी ही नहीं, उसके मंत्री पद का वादा करना सिर्फ टीआरपी की राजनीति है और जनता को भ्रमित करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि असली मुद्दे महंगाई, बेरोज़गारी और विकास हैं।
एफसीआरए बिल को जेपीसी भेजे जाने पर जदयू का क्या रुख है?
जदयू ने एफसीआरए बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) भेजे जाने को सकारात्मक कदम बताया। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि जेपीसी में सभी दलों के प्रतिनिधि होते हैं और चर्च बॉडीज के समर्थन से स्पष्ट है कि यह बिल किसी धर्म के खिलाफ नहीं है।
पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा मामले में जदयू की क्या माँग है?
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि यशवंत वर्मा का पद से त्यागपत्र पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि संसद को महाभियोग या कठोर कार्यवाही के ज़रिए स्पष्ट संदेश देना चाहिए ताकि न्यायपालिका की साख बनी रहे।
क्या आजम खान वाकई यूपी के गृहमंत्री बन सकते हैं?
यह पूरी तरह काल्पनिक परिदृश्य पर आधारित बयान है क्योंकि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार है। जदयू का कहना है कि सपा के सत्ता में आने की संभावना नहीं है, इसलिए ऐसे वादे निराधार हैं।
राष्ट्र प्रेस
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