31 अक्टूबर 2026
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सरदार पटेल की 151वीं जयंती: राष्ट्रपति मुर्मु, गृहमंत्री शाह समेत नेताओं ने पटेल चौक पर अर्पित की पुष्पांजलि

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सरदार पटेल की 151वीं जयंती: राष्ट्रपति मुर्मु, गृहमंत्री शाह समेत नेताओं ने पटेल चौक पर अर्पित की पुष्पांजलि

सारांश

सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और गृहमंत्री अमित शाह ने पटेल चौक पर श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रीय एकता दिवस पर एकता नगर में 'रन फॉर यूनिटी' का आयोजन भी किया जा रहा है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 31 अक्टूबर 2026 को पटेल चौक, नई दिल्ली में सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की।
राधाकृष्णन , गृहमंत्री अमित शाह , दिल्ली उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी समारोह में उपस्थित रहे।
भारत सरकार 2014 से 31 अक्टूबर को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मनाती है।
इस वर्ष एकता नगर में शाम को 'रन फॉर यूनिटी' का आयोजन किया जा रहा है; PM मोदी ने युवाओं से भागीदारी की अपील की।
सरदार पटेल ने आजादी के बाद 500 से अधिक रियासतों का भारत संघ में एकीकरण किया; उनका निधन 15 दिसंबर 1950 को हुआ था।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 31 अक्टूबर 2026 को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर नई दिल्ली स्थित पटेल चौक पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस 'राष्ट्रीय एकता दिवस' पर देश के शीर्ष संवैधानिक और राजनीतिक नेतृत्व ने 'लौह पुरुष' को एक साथ श्रद्धांजलि दी।

मुख्य समारोह और उपस्थित गणमान्य

पटेल चौक पर आयोजित इस श्रद्धांजलि समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी पुष्पांजलि अर्पित की। लोकसभा सांसद बांसुरी स्वराज भी इस अवसर पर उपस्थित रहीं और उन्होंने भी 'लौह पुरुष' को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।

पटेल चौक, नई दिल्ली के मध्य भाग में स्थित, प्रमुख सरकारी मंत्रालयों और संस्थाओं का केंद्र है। इसका नामकरण स्वयं भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री के नाम पर हुआ है, जो इस स्थल को प्रतीकात्मक रूप से और भी महत्वपूर्ण बनाता है।

राष्ट्रीय एकता दिवस: पृष्ठभूमि और महत्व

भारत सरकार ने वर्ष 2014 में 31 अक्टूबर को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की थी। तब से प्रत्येक वर्ष इस दिन देशभर में देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को सुदृढ़ करने का संदेश दिया जाता है।

इस दिवस पर देशभर में 'रन फॉर यूनिटी' और एकता मार्च जैसे विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इस वर्ष एकता नगर में 'रन फॉर यूनिटी' का आयोजन शाम को किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बनासकांठा में एक कार्यक्रम के दौरान इसकी जानकारी देते हुए युवाओं से बड़ी संख्या में इसमें भाग लेने की अपील की।

सरदार पटेल: जीवन और विरासत

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। वे स्वाधीनता संग्राम के अग्रणी सेनानी, प्रख्यात वकील और दूरदर्शी राजनेता थे।

आजादी के बाद 500 से अधिक रियासतों को भारत संघ में एकीकृत करने में उनकी भूमिका अतुलनीय रही। इसी अद्वितीय योगदान के कारण उन्हें 'लौह पुरुष' और भारत के एकीकरणकर्ता की उपाधि से सम्मानित किया जाता है। उनका निधन 15 दिसंबर 1950 को हुआ था। गौरतलब है कि उनकी यह विरासत आज भी भारत के संघीय ढाँचे की नींव मानी जाती है।

आम जनता पर असर और व्यापक संदेश

राष्ट्रीय एकता दिवस केवल एक सरकारी समारोह नहीं, बल्कि यह नागरिकों को देश की विविधता में एकता के मूल्य से जोड़ने का अवसर है। देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थाओं में इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

यह ऐसे समय में आता है जब देश राष्ट्रीय एकजुटता और संस्थागत विश्वास को और मजबूत करने पर विशेष जोर दे रहा है। आने वाले वर्षों में इस दिवस की प्रासंगिकता और व्यापक होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु असली परीक्षा यह है कि पटेल की विरासत — संस्थाओं की निष्पक्षता और संघवाद की भावना — को औपचारिक श्रद्धांजलि से आगे नीतिगत व्यवहार में कितना उतारा जाता है। 500 से अधिक रियासतों का एकीकरण सिर्फ राजनीतिक दृढ़ता का नहीं, बल्कि राज्यों के साथ भरोसे और संवाद का भी प्रतीक था। आज जब केंद्र-राज्य संबंध बहस के केंद्र में हैं, तो पटेल को याद करना केवल प्रतीकात्मक नहीं होना चाहिए — यह उनके संवैधानिक दर्शन की पुनर्परीक्षा का अवसर भी है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर क्या हुआ?
31 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, गृहमंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित कई नेताओं ने नई दिल्ली के पटेल चौक पर पुष्पांजलि अर्पित की। यह दिन 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
राष्ट्रीय एकता दिवस क्या है और यह कब से मनाया जाता है?
राष्ट्रीय एकता दिवस प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर मनाया जाता है। भारत सरकार ने इसकी शुरुआत वर्ष 2014 में की थी, जिसका उद्देश्य देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा का संदेश फैलाना है।
सरदार पटेल को 'लौह पुरुष' क्यों कहा जाता है?
आजादी के बाद 500 से अधिक देशी रियासतों को भारत संघ में एकीकृत करने में सरदार वल्लभभाई पटेल की केंद्रीय भूमिका थी। उनकी इसी दृढ़ इच्छाशक्ति और राजनीतिक कुशलता के कारण उन्हें 'लौह पुरुष' और भारत के एकीकरणकर्ता के रूप में जाना जाता है।
'रन फॉर यूनिटी' 2026 कहाँ और कब आयोजित हो रहा है?
इस वर्ष 'रन फॉर यूनिटी' का आयोजन एकता नगर में शाम को किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बनासकांठा में एक कार्यक्रम के दौरान इसकी जानकारी देते हुए युवाओं से बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की।
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म और निधन कब हुआ था?
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था और उनका निधन 15 दिसंबर 1950 को हुआ। वे भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री रहे।
राष्ट्र प्रेस
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