31 जुलाई 2026
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सावन सोमवार व्रत और पीरियड्स: धर्म शास्त्रों की मान्यता और पालन के नियम

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सावन सोमवार व्रत और पीरियड्स: धर्म शास्त्रों की मान्यता और पालन के नियम

सारांश

सावन सोमवार व्रत के बीच पीरियड्स आने पर व्रत तोड़ना ज़रूरी नहीं — धर्म शास्त्र इसे प्राकृतिक प्रक्रिया मानते हैं। शिवलिंग स्पर्श से परहेज़ करें, परिवार के किसी सदस्य से पूजा करवाएं और मंत्र जाप व कथा श्रवण से भक्ति जारी रखें।

मुख्य बातें

धर्म शास्त्रों के अनुसार सावन सोमवार व्रत का संकल्प लेने के बाद मासिक धर्म आने पर व्रत बीच में नहीं छोड़ना चाहिए।
मासिक धर्म को प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया माना गया है; इस दौरान फलाहार जारी रखा जा सकता है।
इस अवस्था में शिवलिंग स्पर्श, जलाभिषेक और पूजा सामग्री अर्पण से परहेज़ करने की परंपरा है।
परिवार का कोई अन्य सदस्य महिला के नाम से पूजा संपन्न कर सकता है।
'ॐ नमः शिवाय' मंत्र जाप, शिव चालीसा और व्रत कथा श्रवण इस दौरान उचित माने गए हैं।
पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराएं भिन्न हो सकती हैं; घर की परंपरा का पालन करना उचित है।

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वाधिक पवित्र माना जाता है और इस दौरान सावन सोमवार का व्रत विशेष धार्मिक महत्व रखता है। सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए और कुंवारी कन्याएं मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं। किंतु अनेक महिलाओं के मन में यह जिज्ञासा उठती है कि यदि व्रत के दौरान मासिक धर्म (पीरियड्स) आ जाए, तो क्या व्रत जारी रखना उचित है?

धर्म शास्त्रों की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी महिला ने पहले से सावन सोमवार व्रत का संकल्प ले लिया है और बीच में मासिक धर्म आ जाए, तो व्रत को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए। शास्त्रों में मासिक धर्म को महिला की एक स्वाभाविक शारीरिक प्रक्रिया माना गया है, इसलिए इसे अशुभ मानकर व्रत भंग करने की आवश्यकता नहीं है। महिलाएं इस अवस्था में व्रत रख सकती हैं और फलाहार भी ग्रहण कर सकती हैं।

पूजा के विशेष नियम

हालांकि मासिक धर्म के दौरान पूजा-अर्चना के कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक बताया गया है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस समय महिलाओं को शिवलिंग का स्पर्श नहीं करना चाहिए, जलाभिषेक नहीं करना चाहिए और पूजा सामग्री सीधे अर्पित नहीं करनी चाहिए। यदि घर में शिवलिंग की पूजा हो रही हो, तो परिवार का कोई अन्य सदस्य उस महिला के नाम से पूजा संपन्न कर सकता है।

आध्यात्मिक साधना के विकल्प

ऐसी परिस्थिति में महिलाएं घर के किसी शांत स्थान पर बैठकर भगवान शिव का ध्यान कर सकती हैं। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप, शिव चालीसा, शिव पुराण या सावन सोमवार व्रत कथा को मोबाइल अथवा ऑडियो माध्यम से सुनना पूर्णतः उचित माना गया है। मान्यता है कि भगवान शिव सच्ची श्रद्धा और भाव से की गई प्रार्थना को सहर्ष स्वीकार करते हैं।

स्वास्थ्य और स्वच्छता का ध्यान

व्रत के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। शरीर को पर्याप्त विश्राम दें और फल, दूध, दही, नारियल पानी जैसी हल्की एवं पौष्टिक चीज़ों का सेवन करें, जिससे कमज़ोरी न हो और व्रत सुचारु रूप से पूर्ण हो सके।

पारिवारिक परंपरा का महत्व

गौरतलब है कि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रीय परंपराओं में पूजा-पाठ के नियम भिन्न हो सकते हैं। यदि किसी घर में कोई विशेष परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है, तो उसका पालन करना ही उचित माना जाता है। आस्था और श्रद्धा का भाव ही किसी भी व्रत की आत्मा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सामाजिक भी है — सदियों से महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों से दूर रखने की परंपरा रही है, जिसे आधुनिक धर्मशास्त्री और महिला अधिकार संगठन दोनों चुनौती दे रहे हैं। शास्त्रों का यह स्पष्टीकरण कि संकल्पित व्रत नहीं तोड़ना चाहिए, एक सकारात्मक पहलू है, किंतु शिवलिंग स्पर्श पर प्रतिबंध जैसे नियम अभी भी बहस का विषय हैं। मुख्यधारा की धार्मिक कवरेज अक्सर इन विरोधाभासों को नज़रअंदाज़ करती है — आस्था और शारीरिक स्वायत्तता के बीच संतुलन का यह सवाल लाखों महिलाओं के लिए हर सावन में प्रासंगिक बनता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पीरियड्स के दौरान सावन सोमवार का व्रत रखा जा सकता है?
हाँ, धर्म शास्त्रों के अनुसार यदि पहले से व्रत का संकल्प लिया जा चुका है तो मासिक धर्म आने पर भी व्रत जारी रखा जा सकता है। मासिक धर्म को प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया माना गया है और इसे अशुभ मानकर व्रत तोड़ने की आवश्यकता नहीं है।
पीरियड्स में सावन व्रत के दौरान कौन-से नियमों का पालन करना चाहिए?
इस अवस्था में शिवलिंग का स्पर्श, जलाभिषेक और पूजा सामग्री का सीधा अर्पण वर्जित माना गया है। परिवार का कोई अन्य सदस्य महिला के नाम से पूजा कर सकता है, और महिला स्वयं मंत्र जाप व कथा श्रवण कर सकती हैं।
पीरियड्स में सावन व्रत के दौरान भगवान शिव की भक्ति कैसे करें?
घर के किसी शांत स्थान पर बैठकर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। शिव चालीसा, शिव पुराण या सावन सोमवार व्रत कथा को मोबाइल या ऑडियो के माध्यम से सुनना पूर्णतः उचित माना गया है।
व्रत के दौरान पीरियड्स में क्या खाना चाहिए?
फलाहार जारी रखा जा सकता है। फल, दूध, दही और नारियल पानी जैसी हल्की व पौष्टिक चीज़ों का सेवन करें ताकि शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिले और कमज़ोरी न हो।
क्या हर परिवार में पीरियड्स और व्रत के नियम एक जैसे होते हैं?
नहीं, अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रीय परंपराओं में पूजा-पाठ के नियम भिन्न हो सकते हैं। यदि आपके घर में कोई विशेष परंपरा चली आ रही है, तो उसका पालन करना ही उचित माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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