सुप्रीम कोर्ट ने अनिल टुटेजा की जमानत के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार की SLP खारिज, HC को दुरुपयोग पर कार्रवाई का अधिकार
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 29 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ सरकार की उन विशेष अनुमति याचिकाएँ (SLP) खारिज कर दीं, जिनमें कथित शराब घोटाले और कस्टम राइस मिलिंग घोटाले के मामलों में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को मिली नियमित जमानत को चुनौती दी गई थी। हालाँकि, शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को यह अधिकार सुरक्षित रखा कि जमानत शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में वह छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा सकती है।
पीठ की संरचना और मुख्य टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया: 'यदि जमानत की सुविधा का कोई दुरुपयोग होता है, तो आप जमानत को तुरंत रद्द कराने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं।' पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि उच्च न्यायालय द्वारा जमानत देते समय की गई टिप्पणियाँ केवल उसी सीमित उद्देश्य तक बाधित हैं और ट्रायल कोर्ट उनसे प्रभावित नहीं होगा।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, 'उच्च न्यायालय के निष्कर्ष केवल जमानत देने के सीमित उद्देश्य के लिए हैं। ट्रायल कोर्ट इन टिप्पणियों से प्रभावित नहीं होगा।' यह स्पष्टीकरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निचली अदालत में मामले का गुण-दोष के आधार पर निर्णय अभी बाकी है।
मामले की पृष्ठभूमि
कस्टम राइस मिलिंग घोटाले के मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 13 जनवरी 2026 को न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ द्वारा टुटेजा को नियमित जमानत दी थी। यह मामला इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) और एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज किया गया था।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में राइस मिलरों से 'कस्टम मिलिंग' के नाम पर अवैध वसूली की गई और यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा था जिसमें सरकारी अधिकारी एवं निजी व्यक्ति शामिल थे। हालाँकि, टुटेजा ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है।
गौरतलब है कि जमानत देते समय उच्च न्यायालय ने टुटेजा द्वारा जेल में बिताई गई अवधि, जाँच के चरण, साक्ष्यों की प्रकृति और मुकदमे के लंबा खिंचने की संभावना को आधार बनाया था। हाई कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि अभियोजन पक्ष ने टुटेजा पर मुकदमा चलाने के लिए ज़रूरी अभियोजन मंजूरी नहीं ली थी, जिस कारण ट्रायल कोर्ट उनके विरुद्ध आरोपों पर संज्ञान नहीं ले सका।
राज्य सरकार का पक्ष और SLP की अस्वीकृति
छत्तीसगढ़ सरकार ने दोनों मामलों — शराब घोटाला और कस्टम राइस मिलिंग घोटाला — में उच्च न्यायालय के जमानत आदेशों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने इन SLP को खारिज कर दिया, परंतु साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जमानत शर्तों का उल्लंघन या सुविधा का दुरुपयोग सिद्ध होने पर राज्य सरकार उच्च न्यायालय में जमानत रद्द कराने की माँग कर सकती है।
यह ऐसे समय में आया है जब छत्तीसगढ़ में कथित घोटालों से जुड़े कई मामले अदालतों में विचाराधीन हैं और राज्य सरकार इनमें आक्रामक कानूनी रुख अपनाती रही है।
ट्रायल पर असर और आगे की राह
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय की टिप्पणियाँ ट्रायल कोर्ट को बाधित नहीं करेंगी, इसलिए मामले के गुण-दोष पर फैसला निचली अदालत स्वतंत्र रूप से करेगी। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर किसी अभियुक्त को अनिश्चित काल तक कारागार में नहीं रखा जा सकता, विशेषकर जब मुकदमे के शीघ्र समाप्त होने की संभावना न हो।
अब मामला ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ेगा, जबकि राज्य सरकार के पास जमानत के दुरुपयोग की स्थिति में उच्च न्यायालय जाने का विकल्प सुरक्षित है।