बंगाल कोयला तस्करी: सुप्रीम कोर्ट ने अनूप माझी की अग्रिम जमानत रद्द करने की ईडी याचिका पर नोटिस जारी किया
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार, 12 मई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें पश्चिम बंगाल के कथित अवैध कोयला खनन रैकेट के कथित सरगना अनूप माझी उर्फ 'लाला' को दी गई अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की गई है। यह मामला ₹2,742.32 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के पट्टे वाले क्षेत्रों से कोयले की गैर-कानूनी खुदाई और चोरी का आरोप है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच और नोटिस
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने माझी से दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश पर जवाब माँगा है, जिसमें उन्हें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दर्ज प्रवर्तन मामले की सूचना (ईसीआईआर) से जुड़ी कार्यवाही में अग्रिम जमानत दी गई थी। ईडी ने इसी आदेश को विशेष अनुमति याचिका के ज़रिए सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
ईडी का पक्ष
ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि माझी इस पूरे सिंडिकेट का 'मुख्य व्यक्ति' और 'सरगना' था। उन्होंने तर्क दिया कि माझी कथित तौर पर फरार हो गया था और पीएमएलए की धारा 50 के तहत बार-बार समन जारी किए जाने के बावजूद उसने शुरुआत में जाँच में सहयोग नहीं किया। ईडी के अनुसार, इस अवैध नेटवर्क में ईसीएल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), रेलवे और अन्य विभागों के अधिकारियों की कथित सक्रिय मिलीभगत शामिल थी।
माझी का पक्ष और दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश
माझी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल ने कई मौकों पर जाँच में सहयोग किया है और अब हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने 13 जून के आदेश में जस्टिस तेजस करिया की एकल-न्यायाधीश पीठ के माध्यम से कहा था कि