बंगाल कोयला तस्करी: सुप्रीम कोर्ट ने अनूप माझी की अग्रिम जमानत रद्द करने की ईडी याचिका पर नोटिस जारी किया

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बंगाल कोयला तस्करी: सुप्रीम कोर्ट ने अनूप माझी की अग्रिम जमानत रद्द करने की ईडी याचिका पर नोटिस जारी किया

सारांश

बंगाल के कथित कोयला तस्करी सरगना अनूप माझी उर्फ 'लाला' को दिल्ली उच्च न्यायालय से मिली अग्रिम जमानत अब सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के घेरे में है। ईडी ने ₹2,742 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यह याचिका दायर की है। यह मामला राजनीतिक सलाहकार कंपनी आई-पैक से जुड़े आरोपों के कारण पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी केंद्रबिंदु बना हुआ है।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने 12 मई को ईडी की याचिका पर अनूप माझी उर्फ 'लाला' को नोटिस जारी किया।
मामला ₹2,742.32 करोड़ के कथित अवैध कोयला खनन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
ईडी ने अब तक ₹482.22 करोड़ की संपत्ति जब्त की है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने माझी को अग्रिम जमानत दी थी, जिसे ईडी ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी।
माझी 13 मौकों पर ईडी के सामने पेश हुआ था, जिसे उच्च न्यायालय ने जमानत देते समय आधार बनाया।

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार, 12 मई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें पश्चिम बंगाल के कथित अवैध कोयला खनन रैकेट के कथित सरगना अनूप माझी उर्फ 'लाला' को दी गई अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की गई है। यह मामला ₹2,742.32 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के पट्टे वाले क्षेत्रों से कोयले की गैर-कानूनी खुदाई और चोरी का आरोप है।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच और नोटिस

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने माझी से दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश पर जवाब माँगा है, जिसमें उन्हें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दर्ज प्रवर्तन मामले की सूचना (ईसीआईआर) से जुड़ी कार्यवाही में अग्रिम जमानत दी गई थी। ईडी ने इसी आदेश को विशेष अनुमति याचिका के ज़रिए सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

ईडी का पक्ष

ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि माझी इस पूरे सिंडिकेट का 'मुख्य व्यक्ति' और 'सरगना' था। उन्होंने तर्क दिया कि माझी कथित तौर पर फरार हो गया था और पीएमएलए की धारा 50 के तहत बार-बार समन जारी किए जाने के बावजूद उसने शुरुआत में जाँच में सहयोग नहीं किया। ईडी के अनुसार, इस अवैध नेटवर्क में ईसीएल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), रेलवे और अन्य विभागों के अधिकारियों की कथित सक्रिय मिलीभगत शामिल थी।

माझी का पक्ष और दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश

माझी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल ने कई मौकों पर जाँच में सहयोग किया है और अब हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने 13 जून के आदेश में जस्टिस तेजस करिया की एकल-न्यायाधीश पीठ के माध्यम से कहा था कि

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे तटस्थ न्यायिक दृष्टि और भी ज़रूरी हो जाती है। सर्वोच्च न्यायालय का यह नोटिस संकेत देता है कि पीएमएलए मामलों में अग्रिम जमानत की 'दोहरी शर्तों' की व्याख्या पर एक बड़ा स्पष्टीकरण आ सकता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बंगाल कोयला तस्करी मामला क्या है?
यह मामला पश्चिम बंगाल में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के पट्टे वाले क्षेत्रों से कोयले की कथित गैर-कानूनी खुदाई और चोरी से जुड़ा है, जिसमें ₹2,742.32 करोड़ की अपराध से अर्जित संपत्ति का आरोप है। यह मामला 2020 में सामने आया था और इसमें ईसीएल, सीआईएसएफ व रेलवे के अधिकारियों की कथित मिलीभगत के आरोप हैं।
अनूप माझी उर्फ 'लाला' कौन हैं?
अनूप माझी उर्फ 'लाला' को ईडी ने कथित अवैध कोयला खनन सिंडिकेट का मुख्य सरगना बताया है। ईडी के अनुसार, वह ईसीएल के पट्टे वाले क्षेत्रों से कोयले की गैर-कानूनी खुदाई और परिवहन के पीछे मुख्य आयोजक था।
सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस क्यों जारी किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने ईडी की उस विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी किया है जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा माझी को दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती दी गई है। ईडी का तर्क है कि पीएमएलए की धारा 45 की 'दोहरी शर्तें' इस मामले में पूरी नहीं होती थीं।
ईडी ने इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने इस मामले में अब तक ₹482.22 करोड़ की संपत्ति जब्त की है, जिसमें पिछले महीने ₹159.51 करोड़ की अतिरिक्त जब्ती शामिल है। एजेंसी ने शेल कंपनियों और हवाला नेटवर्क के ज़रिए मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप भी लगाए हैं।
इस मामले का राजनीतिक पहलू क्या है?
ईडी ने कथित हवाला नेटवर्क और राजनीतिक सलाहकार कंपनी आई-पैक के बीच संबंधों का आरोप लगाया है। जब ईडी ने आई-पैक के कोलकाता कार्यालय पर छापा मारा, तो तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कथित तौर पर वहाँ पहुँचीं, जिससे यह मामला पश्चिम बंगाल में बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया।
राष्ट्र प्रेस