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मुंबई पुलिस ने अंधेरी से 7 अवैध बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार, 15 साल से थे फरार

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मुंबई पुलिस ने अंधेरी से 7 अवैध बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार, 15 साल से थे फरार

सारांश

मुंबई के अंधेरी में एमआईडीसी पुलिस के एंटी-टेररिज्म सेल ने खुफिया जानकारी के आधार पर जाल बिछाकर 7 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा — जो 15 साल से फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में छिपे थे। यह कार्रवाई महाराष्ट्र में चल रहे व्यापक अवैध प्रवासी-विरोधी अभियान का हिस्सा है।

मुख्य बातें

मुंबई एमआईडीसी पुलिस ने 6 जून 2026 को अंधेरी से 7 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया।
आरोपी कथित तौर पर 15 वर्षों से बिना वैध दस्तावेजों के भारत में अवैध रूप से रह रहे थे।
गिरफ्तार समूह में 4 पुरुष, 2 महिलाएं और 1 नाबालिग लड़का शामिल हैं।
आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल किए थे; भारतीय और बांग्लादेशी दस्तावेज बरामद किए गए।
पुलिस उन लोगों की तलाश में है जिन्होंने इस समूह को घुसपैठ, आश्रय या रोजगार दिलाने में मदद की।
इससे पहले फरवरी 2026 में वर्सोवा पुलिस ने अंधेरी वेस्ट से 25 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था।

मुंबई पुलिस की एमआईडीसी (महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम) शाखा ने अंधेरी में एक सुनियोजित ऑपरेशन के तहत सात बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर बिना किसी वैध दस्तावेज के करीब 15 वर्षों से भारत में अवैध रूप से रह रहे थे। अधिकारियों ने शनिवार, 6 जून 2026 को यह जानकारी सार्वजनिक की। यह कार्रवाई महाराष्ट्र पुलिस के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है जो राज्य के विभिन्न शहरों में कथित अवैध प्रवासियों के विरुद्ध जारी है।

ऑपरेशन कैसे हुआ

एमआईडीसी पुलिस के एंटी-टेररिज्म सेल (एटीसी) को खुफिया सूत्रों से जानकारी मिली थी कि बिना आवश्यक दस्तावेजों वाले विदेशी नागरिकों का एक समूह नौकरी की तलाश में अंधेरी क्षेत्र में आने वाला है। इस सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने जाल बिछाया और सातों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया।

जांचकर्ताओं के अनुसार, गिरफ्तार समूह में चार पुरुष, दो महिलाएं और एक नाबालिग लड़का शामिल हैं। हिरासत के तुरंत बाद इन सभी की पृष्ठभूमि, आवाजाही और संपर्कों की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई।

प्रारंभिक पूछताछ में खुलासे

शुरुआती पूछताछ में जांचकर्ताओं को पता चला कि आरोपी टेलीफोन के माध्यम से बांग्लादेश में अपने रिश्तेदारों और सहयोगियों के साथ नियमित संपर्क में थे। अधिकारियों के अनुसार, ये लोग गैर-कानूनी तरीके से भारत में दाखिल हुए और अधिकारियों की नजर से बचते हुए डेढ़ दशक तक मुंबई में रहे।

पुलिस अब उन लोगों की पहचान करने में जुटी है जिन्होंने इस समूह को भारत में प्रवेश दिलाने, रहने की व्यवस्था करने या रोजगार उपलब्ध कराने में कथित तौर पर सहायता की। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों के पास से भारतीय और बांग्लादेशी दस्तावेजों की बड़ी संख्या बरामद की गई है, जिन्हें जब्त कर जांच के लिए भेजा गया है।

नकली दस्तावेजों का नेटवर्क

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने मुंबई में बसने के बाद कथित तौर पर फर्जी भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल किए, ताकि वे अधिकारियों की पकड़ से बचे रहें। पुलिस के अनुसार, इनमें से कई लोग पहले कोलकाता आए, फिर दिल्ली और गुजरात होते हुए अंततः मुंबई में बस गए।

अधिकारी अब महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों में सक्रिय ऐसे अवैध प्रवासन नेटवर्क के पूरे दायरे का पता लगाने की कोशिश में हैं। दस्तावेजों में धोखाधड़ी और अवैध आप्रवासन से जुड़े संभावित गिरोह की जांच जारी है।

पिछले ऑपरेशन का संदर्भ

यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब फरवरी 2026 में मुंबई की वर्सोवा पुलिस ने अंधेरी वेस्ट के यारी रोड इलाके से 25 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। उस ऑपरेशन में 21 ट्रांसजेंडर, दो महिलाएं और दो पुरुष शामिल थे, जिन पर बिना कानूनी अनुमति के भारत में रहने का आरोप था। उस मामले में पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों को बांग्लादेश वापस भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की थी।

गौरतलब है कि हाल के महीनों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने देश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए खुफिया-आधारित कई ऑपरेशन और सत्यापन अभियान चलाए हैं। इस मामले में आगे की जांच जारी है और अतिरिक्त गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह एक उभरते पैटर्न की ओर इशारा करती है जिसमें अवैध प्रवासन नेटवर्क दशकों तक सक्रिय रहते हैं। असली सवाल यह है कि 15 वर्षों तक ये लोग फर्जी दस्तावेजों के सहारे सिस्टम में कैसे बने रहे — यह पुलिस की सफलता की कहानी उतनी नहीं है जितनी सत्यापन तंत्र की विफलता की। जब तक नेटवर्क के सूत्रधारों — दस्तावेज जालसाजों, दलालों और आश्रय देने वालों — पर कार्रवाई नहीं होती, ऐसे ऑपरेशन लक्षण का उपचार करते रहेंगे, बीमारी का नहीं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई में गिरफ्तार 7 बांग्लादेशी नागरिक कौन हैं और उन पर क्या आरोप है?
ये सात बांग्लादेशी नागरिक हैं — चार पुरुष, दो महिलाएं और एक नाबालिग लड़का — जिन्हें एमआईडीसी पुलिस ने अंधेरी से गिरफ्तार किया। इन पर बिना वैध दस्तावेजों के भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने और करीब 15 वर्षों तक रहने का आरोप है।
मुंबई पुलिस ने यह ऑपरेशन कैसे अंजाम दिया?
एमआईडीसी पुलिस के एंटी-टेररिज्म सेल को खुफिया सूचना मिली थी कि बिना दस्तावेजों वाले विदेशी नागरिकों का एक समूह नौकरी की तलाश में अंधेरी क्षेत्र में आने वाला है। इस सूचना पर अधिकारियों ने जाल बिछाया और सभी सात संदिग्धों को हिरासत में ले लिया।
क्या आरोपियों के पास फर्जी दस्तावेज थे?
जांच के अनुसार, आरोपियों ने मुंबई में बसने के बाद कथित तौर पर फर्जी भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल किए ताकि अधिकारियों की पकड़ से बच सकें। ऑपरेशन के दौरान उनके पास से भारतीय और बांग्लादेशी दोनों तरह के दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
इससे पहले मुंबई में ऐसी कोई बड़ी कार्रवाई हुई थी?
हाँ, फरवरी 2026 में मुंबई की वर्सोवा पुलिस ने अंधेरी वेस्ट के यारी रोड इलाके से 25 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था, जिनमें 21 ट्रांसजेंडर, दो महिलाएं और दो पुरुष शामिल थे। उस मामले में पुलिस ने उन्हें बांग्लादेश वापस भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की थी।
पुलिस आगे क्या कदम उठाएगी?
अधिकारी उन लोगों की पहचान करने की कोशिश में हैं जिन्होंने इस समूह को भारत में घुसपैठ कराने, रहने की व्यवस्था या रोजगार दिलाने में सहायता की। साथ ही महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों में सक्रिय अवैध प्रवासन नेटवर्क के पूरे दायरे का पता लगाने की जांच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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