जबलपुर के शैल्बी अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड, आग के बाद फायर सेफ्टी ऑडिट का इंतजार
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को जबलपुर स्थित शैल्बी अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई 11 अक्टूबर को अस्पताल के सेमी प्राइवेट वार्ड में लगी आग की घटना के बाद जाँच टीम के निरीक्षण में कथित तौर पर सुरक्षा मानकों में गंभीर कमियाँ उजागर होने के बाद की गई। प्रशासन अब अगली कार्रवाई तय करने से पहले स्वास्थ्य, नगर निगम के बिल्डिंग और फायर विभाग की अद्यतन रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
11 अक्टूबर 2026 को शैल्बी अस्पताल के सेमी प्राइवेट वार्ड के एक कमरे में आग भड़क उठी, जिसके बाद मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया। इस घटना ने अस्पताल की अग्नि सुरक्षा प्रणालियों और नियामक मानकों के अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल एक जाँच दल गठित कर निरीक्षण कराया और उसकी रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंस निलंबित कर दिया।
जाँच में पाई गई कमियाँ
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, निरीक्षण दल को अस्पताल में कई कथित खामियाँ मिलीं — जिनमें निष्क्रिय फायर अलार्म सिस्टम, फायर एग्जिट के पास अवरोध और इलेक्ट्रिकल पैनल में गड़बड़ियाँ शामिल बताई जा रही हैं। गौरतलब है कि ये कमियाँ, यदि सत्यापित होती हैं, तो मध्य प्रदेश नैदानिक प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत अनिवार्य अग्नि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मानी जाएंगी।
सरकार की प्रतिक्रिया
चीफ मेडिकल ऑफिसर नवीन कोठारी ने बताया कि आगे की कार्रवाई तीन विभागों — स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम बिल्डिंग विभाग और नगर निगम फायर विभाग — की संयुक्त रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि ये विभाग हमें इलेक्ट्रिकल ऑडिट की अपडेटेड रिपोर्ट देंगे।" रिपोर्ट में यह आकलन किया जाएगा कि अस्पताल आवश्यक सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता है या नहीं।
आम जनता और मरीजों पर असर
लाइसेंस निलंबन के साथ ही अस्पताल को नए मरीजों को भर्ती न करने का निर्देश दिया गया है। पहले से भर्ती मरीजों की देखभाल जारी रखी जाएगी और उनकी चिकित्सा स्थिति के अनुसार उन्हें सुरक्षित रूप से डिस्चार्ज या अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया जाएगा। यह कदम ऐसे समय में आया है जब देशभर में निजी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा मानकों की निगरानी को लेकर बहस तेज हो रही है।
क्या होगा आगे
तीनों विभागों की अंतिम ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग यह तय करेगा कि लाइसेंस बहाल किया जाए, निलंबन बढ़ाया जाए या अस्पताल के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। कोठारी ने स्पष्ट किया कि जब तक सुरक्षा मानकों की पूर्ण पुष्टि नहीं हो जाती, अस्पताल को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।