सीहोर: दो परिसरों में अवैध रूप से चल रहा था 'अटल हॉस्पिटल', CMHO ने जारी किया नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के सीहोर में अटल हॉस्पिटल (गंगा आश्रम) के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है — अस्पताल प्रबंधन पर आरोप है कि उसने नियमों की अनदेखी करते हुए एक ही लाइसेंस के तहत दो बिल्कुल अलग-अलग परिसरों में अस्पताल संचालित किया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय ने अस्पताल को नोटिस जारी कर 3 दिनों में स्पष्टीकरण और 1 सप्ताह में अवैध सेटअप बंद करने का निर्देश दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
अटल हॉस्पिटल को मूल रूप से राय कॉम्पलेक्स भवन में संचालन की अनुमति दी गई थी। हालाँकि, अस्पताल प्रबंधन ने बिना किसी अनुमति के ब्लॉक 'ए' (राय कॉम्पलेक्स) और ब्लॉक 'बी' (एचडीएफसी बैंक परिसर) को दो पूरी तरह अलग-अलग स्थानों पर चालू कर दिया।
नियमों के अनुसार, किसी अस्पताल के दो ब्लॉक एक ही परिसर के भीतर अलग-अलग भवनों में हो सकते हैं — लेकिन वे भिन्न परिसरों में नहीं हो सकते। इस प्रावधान का खुलेआम उल्लंघन करते हुए अस्पताल काफी समय से अवैध तरीके से संचालित हो रहा था।
CMHO का निर्देश और कानूनी कार्रवाई
CMHO डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया ने अस्पताल संचालक को निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर राय कॉम्पलेक्स वाले अवैध सेटअप को बंद किया जाए और 3 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाए। यदि निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई नहीं होती, तो अस्पताल का पंजीयन लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जाएगा।
इस मामले में मध्य प्रदेश उपचार गृह तथा रजोउपचार गृह संबंधी स्थापनाएं अधिनियम 1973 (संशोधित 2022) के तहत कानूनी कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब निजी अस्पतालों की जवाबदेही को लेकर पूरे प्रदेश में चर्चा है। गौरतलब है कि अस्पताल काफी दिनों से इस अवैध व्यवस्था में चल रहा था, जो स्वास्थ्य विभाग की निगरानी तंत्र की कमज़ोरी को उजागर करता है। आलोचकों का कहना है कि इतने लंबे समय तक यह उल्लंघन नज़रअंदाज़ होना विभागीय चूक की ओर इशारा करता है।
आम जनता पर असर
दो अलग-अलग परिसरों में अस्पताल के संचालन से मरीजों की सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता पर सीधा असर पड़ता है। नियमों के अनुसार एकीकृत परिसर की शर्त इसीलिए है ताकि चिकित्सा सुविधाएँ, उपकरण और आपात व्यवस्था एक ही छत के नीचे सुलभ हो सकें। सीहोर की जनता अब देखना चाहती है कि यह नोटिस महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाता है या प्रशासन वास्तव में सख्त कदम उठाता है।
आगे क्या होगा
अस्पताल संचालक को दी गई समय-सीमा समाप्त होने के बाद CMHO कार्यालय की कार्रवाई पर सबकी नज़र होगी। यदि लाइसेंस निरस्त होता है, तो यह सीहोर में निजी स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।