दिल्ली में कश्मीरी युवक की कथित पिटाई पर नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता शेख बशीर बोले — 'यह गुंडाराज है'
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता शेख बशीर ने 8 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में एक कश्मीरी युवक के साथ कथित मारपीट की घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'गुंडाराज' करार दिया। बशीर ने चेतावनी दी कि भारत को नेपाल या बांग्लादेश जैसी अस्थिर स्थिति की ओर नहीं जाना चाहिए, और इस घटना को देशभर में लोकतांत्रिक अधिकारों एवं कानून-व्यवस्था पर उठ रहे व्यापक सवालों से जोड़ा।
मुख्य घटनाक्रम
जम्मू में पत्रकारों से बात करते हुए शेख बशीर ने कहा कि उनके पास इस बात की पूरी जानकारी नहीं है कि कश्मीरी युवक के साथ मारपीट किसने की और घटना में कौन शामिल था। उन्होंने कहा, 'लेकिन ऐसी घटनाएं कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।' बशीर ने यह भी सवाल उठाया कि संबंधित युवक दिल्ली में जाकर नारे क्यों लगा रहा था, जबकि वह जम्मू-कश्मीर में भी अपनी बात रख सकता था।
कथित तौर पर इस घटना की पृष्ठभूमि में वोट चोरी और एसआईआर (SIR) जैसे मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन शामिल हैं, जिन पर जम्मू-कश्मीर में भी प्रदर्शन हुए थे।
लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल
शेख बशीर ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी सहित अन्य विपक्षी नेताओं को पुलिस वाहनों में ले जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन एक मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो मुद्दे उठाए जा रहे हैं, उन पर जवाब देने के बजाय पुलिस बल का सहारा लिया जा रहा है।
बशीर ने कहा, 'यदि किसी व्यक्ति को अपनी बात रखने या नारे लगाने का अधिकार है, तो वह अधिकार बना रहना चाहिए।' उन्होंने पुलिस व्यवस्था में मौजूद 'कुछ लोगों' के आचरण पर भी आपत्ति जताई।
साजिश का आरोप
शेख बशीर ने दावा किया कि दिल्ली में हुई कथित मारपीट के पीछे 'सोची-समझी साजिश' हो सकती है और कुछ लोगों को इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने के लिए लाया जा रहा है। उन्होंने इस मामले में आरएसएस और सरकार पर भी आरोप लगाए। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक माहौल पहले से ही संवेदनशील है।
आम जनता और नागरिक अधिकारों पर असर
बशीर के अनुसार, मौजूदा घटनाक्रम का केंद्रीय सवाल यह है कि देश में लोकतंत्र और नागरिकों को कानून से मिले अधिकार कायम रहेंगे या नहीं। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार मिलना ही चाहिए। गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पूरे देश में नागरिक स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था को लेकर विभिन्न दलों में बहस तेज हो रही है।
क्या होगा आगे
अभी तक इस मामले में किसी गिरफ्तारी या आधिकारिक जाँच की पुष्टि नहीं हुई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से इस घटना पर आगे की कार्रवाई की माँग किए जाने की संभावना है। राजनीतिक हलकों में इस बयान को जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय राजनीति और राष्ट्रीय नागरिक अधिकारों की बहस दोनों के संदर्भ में देखा जा रहा है।