शिवसेना (यूबीटी) की सीएम विजय को चेतावनी: 'दिल्ली की सत्ता की चालों से सावधान रहें'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) ने 12 मई 2026 को अपने मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक संपादकीय के ज़रिए तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री विजय को आगाह किया कि वे नई दिल्ली के सत्ता-खेल के जाल में न फँसें। उद्धव ठाकरे गुट ने कहा कि तमिलनाडु में हुआ यह ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन उत्साहजनक है, लेकिन आगे का रास्ता चुनौतियों से भरा है।
तमिलनाडु में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी तमिझगा वेट्री कषगम (टीवीके) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) की दशकों पुरानी बारी-बारी से सत्ता में आने की परंपरा को तोड़ दिया। 'सामना' के संपादकीय में स्वीकार किया गया कि राज्य में जश्न का माहौल है, परंतु साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि विजय की सरकार के पास मामूली बहुमत है, जिससे स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
दिल्ली के प्रभाव से सावधान रहने की सलाह
'सामना' में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जैसे केंद्रीय नेताओं के राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए नई सरकार के लिए स्थिरता बनाए रखना और भी कठिन हो सकता है। शिवसेना (यूबीटी) ने पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को भी भाजपा से दूर रहने की सलाह दी और उनसे आग्रह किया कि वे 'राज्य और राष्ट्र के हित के लिए प्रधानमंत्री मोदी और शाह के छल में न फँसें।' संपादकीय में यह भी कहा गया कि मामूली बहुमत वाली सरकारों को केंद्र की ओर से अस्थिर करने के प्रयास अतीत में भी देखे गए हैं।
विजय की 'आम आदमी' छवि और शासन की चुनौती
'सामना' में कहा गया कि जब विजय सिल्वर स्क्रीन से सचिवालय की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, तो पूरा देश यह देखने के लिए उत्सुक है कि क्या वे शासन की जटिल वास्तविकताओं से निपटते हुए अपनी 'आम आदमी' की छवि को बरकरार रख पाएंगे। गौरतलब है कि नए मुख्यमंत्री ईसाई धर्म के अनुयायी हैं और उन्होंने सभी धर्मों के नेता बनने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को सुरक्षा प्रदान करना उनका प्राथमिक कर्तव्य है।
शपथ ग्रहण और पहले प्रशासनिक फैसले
संपादकीय के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत 'वंदे मातरम' से हुई, उसके बाद 'जन गण मन' गाया गया और अंत में तमिलनाडु राज्य गीत से समापन हुआ। 'सामना' ने कहा कि यह क्रम राष्ट्रीय भावना को प्राथमिकता देने के लिए बनाया गया प्रतीत होता है। विजय ने अपने मंत्रिमंडल और विधायकों को कड़ी चेतावनी दी है कि सार्वजनिक धन की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने नशीली दवाओं के नेटवर्क को खत्म करने के लिए एक विशेष कार्य बल गठित करने का आदेश दिया है और पुलिस विभाग में एक समर्पित महिला सुरक्षा विंग की स्थापना को मंजूरी दी है। राज्य पर ₹10 लाख करोड़ के कर्ज को स्वीकार करते हुए विजय ने सख्त वित्तीय अनुशासन का आह्वान किया। उनकी पहली आधिकारिक फाइल घरेलू उपभोक्ताओं को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने से संबंधित थी।
राष्ट्रीय राजनीति पर असर और डीएमके का रुख
शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया कि इस नई सरकार के गठन से राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मच गई है। कांग्रेस पार्टी ने विजय को सरकार बनाने में मदद की, जिससे कथित तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन की डीएमके नाराज हो गई और उसने 'इंडिया' गठबंधन से बाहर निकलने का फैसला किया। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, स्टालिन ने नए प्रशासन को शुभकामनाएं देकर शालीनता बनाए रखी। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विजय सरकार राजनीतिक दबावों के बीच अपनी नीतियों को किस तरह लागू करती है।