नोएडा: श्रमिक आंदोलन में हिंसा भड़काने का आरोपी अनिल कुमार गिरफ्तार, मोबाइल बरामद

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नोएडा: श्रमिक आंदोलन में हिंसा भड़काने का आरोपी अनिल कुमार गिरफ्तार, मोबाइल बरामद

सारांश

नोएडा पुलिस ने श्रमिक आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट फैलाने के आरोप में अनिल कुमार को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उन दावों को भी खारिज किया जिनमें आरोपी को किसी पुलिस अधिकारी का ड्राइवर बताया जा रहा था।

मुख्य बातें

नोएडा थाना फेस-2 पुलिस ने 20 मई 2025 को श्रमिक आंदोलन में हिंसा भड़काने के आरोप में अनिल कुमार को गिरफ्तार किया।
आरोपी जिला हापुड़ का मूल निवासी है और नोएडा के नया गांव में किराये पर रह रहा था।
सोशल मीडिया पर आरोपी को पुलिस अधिकारी का ड्राइवर बताने वाले दावों को पुलिस ने पूरी तरह निराधार करार दिया।
आरोपी के खिलाफ पहले हापुड़ में आयुध अधिनियम के तहत मामला दर्ज हो चुका है; वर्तमान में BNS की धाराओं में मुकदमा दर्ज।
पुलिस ने आरोपी के पास से एक रियलमी मोबाइल फोन बरामद किया है; सोशल मीडिया नेटवर्क की जाँच जारी।

नोएडा के थाना फेस-2 पुलिस ने 20 मई 2025 को श्रमिक आंदोलन के दौरान कथित रूप से हिंसा भड़काने और भ्रामक प्रचार फैलाने के आरोप में एक वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किया गया एक मोबाइल फोन भी बरामद किया है।

कौन है गिरफ्तार आरोपी

गिरफ्तार आरोपी की पहचान अनिल कुमार के रूप में हुई है, जो मूलतः ग्राम मुक्तेशरा, थाना बाबूगढ़ छावनी, जिला हापुड़ का निवासी है और वर्तमान में नोएडा के नया गांव में किराये पर रह रहा था। अधिकारियों के अनुसार, अनिल कुमार दिल्ली में एक निजी व्यक्ति के यहाँ निजी चालक के रूप में कार्यरत है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी पुलिस अधिकारी का ड्राइवर नहीं है।

गिरफ्तारी कैसे हुई

पुलिस के मुताबिक, 20 मई को गोपनीय सूचना के आधार पर मदरसन कंपनी के पीछे हनुमान मंदिर के निकट से अनिल कुमार को पकड़ा गया। जाँच में सामने आया कि वह श्रमिक आंदोलन से जुड़े एक सोशल मीडिया ग्रुप में सक्रिय था, जहाँ भड़काऊ पोस्ट और वीडियो प्रसारित किए जा रहे थे।

भ्रामक प्रचार और पुलिस का खंडन

जाँच में यह तथ्य उजागर हुआ कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा था कि अनिल कुमार यूपी पुलिस के किसी अधिकारी या डीसीपी का ड्राइवर है और उसे जानबूझकर मजदूर आंदोलन में हिंसा फैलाने के लिए लगाया गया है। पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह निराधार करार दिया है। यह भी स्पष्ट किया गया कि अनिल कुमार का वर्तमान में रिचा ग्लोबल कंपनी से कोई संबंध नहीं है — वह करीब दो वर्ष पहले उस कंपनी में काम करता था।

गौरतलब है कि जिस व्हाट्सएप ग्रुप में भड़काऊ संदेश डाले गए, उसमें अनिल को गौतमबुद्धनगर पुलिस ने नहीं, बल्कि मजदूर आंदोलन से जुड़े एक अन्य व्यक्ति ने जोड़ा था। पुलिस के अनुसार, ग्रुप में 'मोदी आ रहा है, बाईपास के उद्घाटन के लिए पूरा रोड जाम कर देना चाहिए' जैसे संदेश पोस्ट किए गए थे, जिन्हें हिंसा और अव्यवस्था फैलाने की कोशिश माना जा रहा है।

आरोपी का आपराधिक इतिहास

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अनिल कुमार की शैक्षणिक योग्यता पाँचवीं कक्षा तक है। उसके खिलाफ पहले भी हापुड़ नगर थाने में आयुध अधिनियम के तहत मामला दर्ज हो चुका है। वर्तमान मामले में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

आगे की जाँच

थाना फेस-2 पुलिस ने आरोपी के पास से एक रियलमी कंपनी का मोबाइल फोन बरामद किया है, जिसकी जाँच कर सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान की जा रही है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि श्रमिक आंदोलन की आड़ में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

कभी-कभी भीड़ को उकसाने के लिए। पुलिस द्वारा 'पुलिस ड्राइवर' वाले दावे का खंडन महत्वपूर्ण है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि ऐसे भ्रामक आख्यान किसके हित में फैलाए जाते हैं। व्हाट्सएप ग्रुप में 'रोड जाम' जैसे संदेशों की जाँच यह भी बताएगी कि क्या यह एकल कृत्य था या किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा।
RashtraPress
22 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा में श्रमिक आंदोलन के दौरान किसे गिरफ्तार किया गया?
नोएडा थाना फेस-2 पुलिस ने 20 मई 2025 को अनिल कुमार को गिरफ्तार किया, जो जिला हापुड़ का मूल निवासी है और नोएडा के नया गांव में किराये पर रह रहा था। उस पर श्रमिक आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट और वीडियो फैलाने का आरोप है।
आरोपी अनिल कुमार पर क्या आरोप हैं?
अनिल कुमार पर श्रमिक आंदोलन से जुड़े व्हाट्सएप ग्रुप में भड़काऊ संदेश और वीडियो प्रसारित करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार ग्रुप में 'रोड जाम' जैसे उकसावे वाले संदेश पोस्ट किए गए थे। उसके खिलाफ BNS की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज है।
क्या अनिल कुमार वाकई किसी पुलिस अधिकारी का ड्राइवर था?
नहीं। पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया है। अधिकारियों के अनुसार अनिल कुमार दिल्ली में एक निजी व्यक्ति के यहाँ निजी चालक के रूप में काम करता है और किसी भी पुलिस अधिकारी से उसका कोई संबंध नहीं है।
आरोपी को व्हाट्सएप ग्रुप में किसने जोड़ा था?
जाँच में सामने आया कि अनिल कुमार को उस व्हाट्सएप ग्रुप में गौतमबुद्धनगर पुलिस ने नहीं, बल्कि मजदूर आंदोलन से जुड़े एक अन्य व्यक्ति ने जोड़ा था। इस सूत्र के आधार पर पुलिस आगे की जाँच कर रही है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
पुलिस ने आरोपी के रियलमी मोबाइल फोन की जाँच शुरू कर दी है, जिससे सोशल मीडिया नेटवर्क और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि श्रमिक आंदोलन की आड़ में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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