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खड़गे परिवार पर सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट से जमीन हड़पने का आरोप, BJP प्रवक्ता भंडारी ने गिनाए कई मामले

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खड़गे परिवार पर सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट से जमीन हड़पने का आरोप, BJP प्रवक्ता भंडारी ने गिनाए कई मामले

सारांश

BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और मंत्री पुत्र प्रियांक खड़गे पर सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट के ज़रिए ₹100 करोड़ मूल्य की एयरोस्पेस भूमि और गुलबर्गा में 19 एकड़ सरकारी ज़मीन हड़पने का आरोप लगाया है — ये सभी आरोप अभी न्यायिक पुष्टि से परे हैं।

मुख्य बातें

BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने 24 जून को मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियांक खड़गे पर सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट के माध्यम से जमीन हड़पने के कई कथित मामले सार्वजनिक किए।
KIADB ने कथित तौर पर 2024 में ₹100 करोड़ मूल्य की 5 एकड़ एयरोस्पेस भूमि इस निजी ट्रस्ट को आवंटित की।
कर्नाटक के गुलबर्गा में 19 एकड़ सरकारी जमीन भी कथित रूप से खड़गे परिवार के ट्रस्ट को हस्तांतरित की गई।
भंडारी ने ट्रस्ट द्वारा एक कथित फर्जी विक्रेता खड़े किए जाने का भी आरोप लगाया।
भंडारी ने इन कृत्यों को 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' की धारा 131ए और 131बी के तहत अपराध बताया।
ये सभी आरोप अभी तक किसी न्यायालय या जाँच एजेंसी द्वारा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने 24 जून को नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके पुत्र व कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खड़गे पर सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट के माध्यम से कर्नाटक में जमीन हड़पने और भ्रष्टाचार के कथित गंभीर आरोप लगाए। भंडारी ने दावा किया कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित पैटर्न है जिसमें खड़गे परिवार ने कथित तौर पर अपनी राजनीतिक ताकत और रसूख का उपयोग करके गरीबों की जमीन हड़पी।

सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट और KIADB जमीन का मामला

भंडारी के अनुसार, सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट में मल्लिकार्जुन खड़गे, उनके पुत्र प्रियांक खड़गे, उनके दामाद और उनकी पत्नी सदस्य हैं। भंडारी ने आरोप लगाया कि 2024 में कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट बोर्ड (KIADB) ने कांग्रेस शासनकाल में इस ट्रस्ट को 5 एकड़ भूमि आवंटित की, जिसकी वर्तमान बाज़ार कीमत कथित तौर पर ₹100 करोड़ बताई जाती है।

भंडारी ने कहा कि यह भूमि एयरोस्पेस और डिफेंस क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास के उद्देश्य से किसी औद्योगिक संस्था को दी जानी चाहिए थी। उनके अनुसार, इसके बजाय इसे कांग्रेस अध्यक्ष के परिवार से जुड़े एक निजी ट्रस्ट को आवंटित कर दिया गया और उस ट्रस्ट ने अब तक कोई अनुसंधान कार्य नहीं किया।

गुलबर्गा में 19 एकड़ जमीन का आरोप

भंडारी ने एक और मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने गुलबर्गा में 19 एकड़ सरकारी जमीन खड़गे परिवार के इसी निजी ट्रस्ट को दे दी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस जमीन को हासिल करने के लिए अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग किया।

भंडारी ने कांग्रेस पार्टी से सार्वजनिक रूप से जवाब देने की माँग की और कहा कि खड़गे को स्पष्ट करना चाहिए कि उनके ट्रस्ट को एयरोस्पेस और डिफेंस रिसर्च की जमीन किस आधार पर आवंटित की गई।

फर्जी विक्रेता का आरोप

तीसरे आरोप में भंडारी ने दावा किया कि सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट ने जमीन के हस्तांतरण के लिए एक कथित फर्जी विक्रेता का सहारा लिया। उनके अनुसार, इस विक्रेता की पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है और यह भूमि स्थायी रूप से गुलबर्गा में खड़गे के निजी ट्रस्ट के पास चली गई।

भंडारी ने इन सभी कथित कृत्यों को 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' की धारा 131ए और 131बी के तहत अपराध बताया।

गांधी-वाड्रा से तुलना

भंडारी ने यह भी कहा कि राहुल गांधी और गांधी-वाड्रा परिवार — जिनमें रॉबर्ट वाड्रा भी शामिल हैं — पर विभिन्न क्षेत्रों में जमीन हड़पने के समान आरोप पहले से चल रहे हैं। उनके अनुसार, मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी वही तरीका अपनाया जो गांधी-वाड्रा परिवार पर लगाए गए आरोपों में सामने आया था।

गौरतलब है कि ये सभी आरोप भाजपा प्रवक्ता द्वारा लगाए गए हैं और अभी तक किसी न्यायालय या जाँच एजेंसी द्वारा इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। राष्ट्र प्रेस ने कांग्रेस और खड़गे परिवार की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया।

आगे क्या होगा

यह देखना होगा कि क्या भाजपा इन आरोपों के आधार पर औपचारिक शिकायत दर्ज कराती है या कोई संसदीय कार्यवाही शुरू करती है। कांग्रेस की प्रतिक्रिया और कर्नाटक सरकार का रुख इस विवाद की अगली दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ सत्तारूढ़ कांग्रेस पहले से कई विवादों में घिरी है — इसलिए इन आरोपों की राजनीतिक टाइमिंग को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। हालाँकि, यदि KIADB द्वारा एयरोस्पेस भूमि का आवंटन वास्तव में बिना अनुसंधान कार्य के एक निजी ट्रस्ट को हुआ है, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर प्रश्न उठाता है — चाहे राजनीतिक रंग कोई भी हो। असली कसौटी यह है कि क्या कोई स्वतंत्र एजेंसी — लोकायुक्त, ED या CBI — इन दस्तावेज़ों की जाँच करती है, या यह विवाद केवल प्रेस वार्ताओं तक सीमित रहता है। बिना न्यायिक या जाँच-आधारित निष्कर्ष के, ये आरोप राजनीतिक बयानबाज़ी की श्रेणी में ही रहेंगे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट क्या है और इस पर क्या आरोप हैं?
सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट एक निजी ट्रस्ट है जिसमें कथित तौर पर मल्लिकार्जुन खड़गे, उनके पुत्र प्रियांक खड़गे, उनके दामाद और पत्नी सदस्य हैं। BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया है कि इस ट्रस्ट के ज़रिए कर्नाटक में सरकारी और गरीबों की जमीन कथित रूप से हड़पी गई।
KIADB ने सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को कितनी जमीन दी?
BJP के अनुसार, 2024 में KIADB ने एयरोस्पेस और डिफेंस रिसर्च के नाम पर 5 एकड़ भूमि इस ट्रस्ट को आवंटित की, जिसकी बाज़ार कीमत कथित तौर पर ₹100 करोड़ है। भंडारी का आरोप है कि ट्रस्ट ने इस भूमि पर कोई अनुसंधान कार्य नहीं किया।
गुलबर्गा की 19 एकड़ जमीन का मामला क्या है?
भंडारी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने गुलबर्गा में 19 एकड़ सरकारी जमीन खड़गे परिवार के निजी ट्रस्ट को हस्तांतरित कर दी। उनका कहना है कि इसके लिए मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपनी राजनीतिक शक्ति का उपयोग किया।
क्या इन आरोपों की कोई न्यायिक या जाँच-एजेंसी पुष्टि हुई है?
अभी तक ये सभी आरोप केवल BJP प्रवक्ता की प्रेस वार्ता पर आधारित हैं। किसी न्यायालय, लोकायुक्त, ED या CBI ने इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। कांग्रेस और खड़गे परिवार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है।
भंडारी ने किस कानून के तहत इसे अपराध बताया?
भंडारी ने इन कथित कृत्यों को 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' की धारा 131ए और 131बी के तहत अपराध बताया। उन्होंने इसकी तुलना गांधी-वाड्रा परिवार पर लगे जमीन हड़पने के आरोपों से भी की।
राष्ट्र प्रेस
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