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क्या राजस्थान के सीकर में कांग्रेस की रैली में 'अरावली बचाओ-मनरेगा बचाओ' अभियान के तहत सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुआ?

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क्या राजस्थान के सीकर में कांग्रेस की रैली में 'अरावली बचाओ-मनरेगा बचाओ' अभियान के तहत सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुआ?

सारांश

राजस्थान के सीकर में आयोजित कांग्रेस की रैली ने 'अरावली बचाओ-मनरेगा बचाओ' अभियान के तहत सरकार के खिलाफ जंग का ऐलान किया। क्या यह आंदोलन पर्यावरण की रक्षा करेगा?

मुख्य बातें

अरावली की सुरक्षा राजस्थान के पर्यावरण के लिए आवश्यक है।
सरकार द्वारा खनन की अनुमति से पर्यावरण को खतरा हो सकता है।
मनरेगा का नाम बदलना मजदूरों के अधिकारों के खिलाफ है।
कांग्रेस का यह आंदोलन जनहित के लिए है।
रैली में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

सीकर, 27 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान के सीकर में कांग्रेस द्वारा एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। यह रैली 'अरावली बचाओ-मनरेगा बचाओ' अभियान के अंतर्गत आयोजित की गई, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। रैली का आयोजन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर हुआ। इसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आमजन और महिलाएं भी शामिल हुईं।

रैली की शुरुआत शहर में स्थित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा से की गई। यहां कार्यकर्ताओं ने अंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद, बांग्लादेश में हाल ही में हुई हिंसा में मारे गए हिंदू समुदाय के लोगों और छात्रों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया। इसके पश्चात कार्यकर्ताओं ने “अरावली बचाओ–राजस्थान बचाओ” और “मनरेगा बचाओ” के नारे लगाते हुए शहर में मार्च किया। रैली बजरंग कांटा और सिल्वर जुबली रोड से होते हुए कल्याण सर्किल पहुंची, जहां सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया गया।

सीकर विधायक राजेंद्र पारीक, फतेहपुर विधायक हाकम अली खान, निवर्तमान नगर परिषद सभापति जीवण खां और जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुनीता गठाला इस रैली में प्रमुख रूप से मौजूद रहे। नेताओं के साथ सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और सरकार की नीतियों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया।

सीकर विधायक राजेंद्र पारीक ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अरावली पर्वतमाला केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की जीवन रेखा है। उन्होंने बताया कि अरावली पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, वर्षा को प्रभावित करने, हरियाली को संरक्षित करने और मरुस्थलीकरण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पारीक ने चेतावनी दी कि सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइन के तहत 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली करीब एक लाख अठारह हजार पहाड़ियां अरावली की परिभाषा से बाहर हो सकती हैं, जिससे उनमें खनन की अनुमति मिल जाएगी। इससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचेगा और राजस्थान में रेगिस्तान तेजी से फैल सकता है। उन्होंने कहा कि भाजपा पुरानी बातों को उठाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है, जबकि असली सवाल यह है कि वर्तमान सरकार अरावली को बचाने के लिए क्या कर रही है।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुनीता गठाला ने अपने संबोधन में कहा कि अरावली राजस्थान की आत्मा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक ओर पर्यावरण संरक्षण की बातें करती है और दूसरी ओर बड़े पैमाने पर खनन को बढ़ावा दे रही है।

उन्होंने कहा कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों में खनन की अनुमति मिलने से बहुत कम पहाड़ियां ही सुरक्षित बचेंगी, जिससे जलवायु परिवर्तन का खतरा और बढ़ जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि अरावली को पूरी तरह बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाए।

कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा का नाम बदलने का भी विरोध किया। उनका कहना था कि मनरेगा गरीब और मजदूर वर्ग की आजीविका का प्रमुख साधन है और इसका नाम बदलना मजदूरों के अधिकारों के साथ अन्याय है। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि जब तक सरकार अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करती, तब तक अरावली और मनरेगा को बचाने का आंदोलन जारी रहेगा। रैली शांतिपूर्ण रही, लेकिन सरकार के खिलाफ विरोध का संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरावली पर्वतमाला क्यों महत्वपूर्ण है?
अरावली पर्वतमाला राजस्थान की जीवन रेखा है, जो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मनरेगा का नाम बदलने का क्या प्रभाव होगा?
मनरेगा का नाम बदलना गरीब और मजदूर वर्ग के अधिकारों के साथ अन्याय है, जो उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है।
इस रैली में कौन-कौन शामिल थे?
रैली में सीकर विधायक राजेंद्र पारीक, फतेहपुर विधायक हाकम अली खान, और जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुनीता गठाला सहित कई अन्य नेता शामिल हुए।
प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य अरावली पर्वतमाला और मनरेगा की सुरक्षा के लिए सरकार के खिलाफ आवाज उठाना था।
क्या यह रैली शांतिपूर्ण रही?
हाँ, रैली शांतिपूर्ण रही, लेकिन सरकार के खिलाफ विरोध का संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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