26 अगस्त 2026
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मनीष सिसोदिया का दावा: पंजाब सरकारी स्कूलों में 2022 से अब तक हुए बदलाव की निष्पक्ष तुलना हो

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मनीष सिसोदिया का दावा: पंजाब सरकारी स्कूलों में 2022 से अब तक हुए बदलाव की निष्पक्ष तुलना हो

सारांश

मनीष सिसोदिया ने पंजाब के सरकारी स्कूलों पर उठ रहे सवालों का जवाब आँकड़ों से दिया — 20,000 स्कूलों में सुधार, 3.64 लाख बच्चों का निजी से सरकारी स्कूलों में आना, और नीट क्वालिफायर्स की संख्या 80 से 882 तक पहुँचने का दावा। लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पड़ताल अभी बाकी है।

मुख्य बातें

मनीष सिसोदिया ने 26 अगस्त को पंजाब के सरकारी स्कूलों में 2022 से हुए बदलावों के आँकड़े पेश किए।
दावा: करीब 20,000 स्कूलों में सुधार; 9,000+ नए क्लासरूम, 13,920 शौचालय और 2 लाख डेस्क जोड़े गए।
3.64 लाख बच्चे निजी स्कूलों से निकलकर सरकारी स्कूलों में दाखिल हुए।
नीट क्वालिफायर्स की संख्या 80 से बढ़कर 882 ; चार वर्षों में 786 ने जेईई भी पास किया।
पंजाब को कक्षा 1 से 12 तक AI शिक्षा लागू करने वाला देश का पहला राज्य बताया गया।
7,000+ स्कूल बाढ़ से प्रभावित; 500 गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त स्कूलों का पुनर्निर्माण जारी।

आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 26 अगस्त 2026 को पंजाब के सरकारी स्कूलों को लेकर उठ रहे सवालों पर विस्तृत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि पंजाब की शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन केवल मौजूदा स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि वर्ष 2022 में भगवंत मान के मुख्यमंत्री बनने के समय की स्थिति और आज के आँकड़ों की निष्पक्ष तुलना करके किया जाना चाहिए।

2022 में क्या थी स्थिति

सिसोदिया के अनुसार, 2022 में सत्ता संभालने के समय पंजाब के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव था। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में कई स्कूलों में शौचालय तक नहीं थे, करीब 4 लाख बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे और हजारों स्कूलों में पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने इसे दशकों की उपेक्षा का परिणाम बताते हुए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 15-20 वर्षों के कार्यकाल की ओर इशारा किया।

साढ़े चार वर्षों में किए गए दावे

सिसोदिया ने दावा किया कि AAP सरकार ने करीब 20,000 सरकारी स्कूलों में बड़े पैमाने पर सुधार कार्य कराए। उनके अनुसार इस अवधि में 9,000 से अधिक नए क्लासरूम और प्रयोगशालाएँ बनाई गईं, 13,920 नए शौचालयों का निर्माण हुआ और करीब 2 लाख नए डेस्क उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा 10,000 से अधिक स्कूलों में इंटरैक्टिव पैनल लगाए गए और 5,012 स्कूलों में एडवांस कंप्यूटर लैब तैयार की गई हैं।

सिसोदिया ने यह भी दावा किया कि सभी सरकारी स्कूलों को वाई-फाई से जोड़ा गया है और करीब 99 प्रतिशत स्कूलों में बाउंड्री वॉल मौजूद है। उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब में आई दो बड़ी बाढ़ों के कारण 7,000 से अधिक स्कूल प्रभावित हुए, जिनमें से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त करीब 500 स्कूलों का पुनर्निर्माण और पुनर्स्थापना कार्य अभी जारी है।

शैक्षणिक परिणामों पर दावे

बुनियादी ढाँचे से आगे बढ़ते हुए सिसोदिया ने शैक्षणिक परिणामों के आँकड़े भी पेश किए। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में 3.64 लाख बच्चे निजी स्कूलों को छोड़कर पंजाब के सरकारी स्कूलों में दाखिल हुए हैं। नीट परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 80 से बढ़कर 882 हो गई है। चार वर्षों में 2,166 विद्यार्थियों ने नीट और 786 ने जेईई क्वालिफाई किया है।

इसके अलावा उन्होंने बताया कि 2.30 लाख बच्चों ने 'बिजनेस ब्लास्टर्स' कार्यक्रम के माध्यम से उद्यमिता की जानकारी हासिल की। सिसोदिया ने दावा किया कि कक्षा एक से 12वीं तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की पढ़ाई शुरू करने वाला पंजाब देश का पहला राज्य बना है और 40 स्किल एजुकेशन स्कूल भी शुरू किए गए हैं।

राजनीतिक संदर्भ और विपक्ष पर निशाना

सिसोदिया ने BJP और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब की शिक्षा व्यवस्था की तुलना राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर नहीं, बल्कि आँकड़ों और जमीनी स्थिति के आधार पर होनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब के सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को लेकर विपक्षी दलों की आलोचनाएँ तेज हुई हैं। गौरतलब है कि दिल्ली में AAP की शिक्षा नीति की तर्ज पर पंजाब में भी सरकारी स्कूल सुधार AAP की राजनीतिक पहचान का अहम हिस्सा रहा है।

आगे की राह

सिसोदिया ने स्पष्ट किया कि सरकार यह दावा नहीं कर रही कि पंजाब में शिक्षा के क्षेत्र में काम पूरा हो गया है, लेकिन दशकों से चली आ रही समस्याओं में 'बदलाव की शुरुआत' हुई है। उनके अनुसार, सरकारी स्कूलों की सफलता का असली पैमाना अभिभावकों का भरोसा और बच्चों के बेहतर परिणाम हैं — केवल बजट आवंटन नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन दावों की स्वतंत्र सत्यापन की आवश्यकता है ताकि जमीनी हकीकत सामने आ सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ये सभी स्व-घोषित दावे हैं जिनकी कोई स्वतंत्र सत्यापन एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। नीट क्वालिफायर्स का 80 से 882 तक पहुँचना उल्लेखनीय है, पर यह स्पष्ट नहीं कि यह वृद्धि केवल सरकारी नीति का परिणाम है या व्यापक राष्ट्रीय रुझान का हिस्सा। दिल्ली में AAP की शिक्षा नीति के दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच जो खाई उजागर हुई है, वह पंजाब के संदर्भ में भी प्रासंगिक सवाल खड़े करती है — असली परीक्षा तब होगी जब कोई निष्पक्ष संस्था इन आँकड़ों की पड़ताल करे।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनीष सिसोदिया ने पंजाब के सरकारी स्कूलों को लेकर क्या दावे किए हैं?
सिसोदिया ने दावा किया कि 2022 से अब तक करीब 20,000 सरकारी स्कूलों में सुधार हुए, 9,000 से अधिक नए क्लासरूम बने और 3.64 लाख बच्चे निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों में आए। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि 2022 की स्थिति और आज के आँकड़ों की निष्पक्ष तुलना की जाए।
पंजाब के सरकारी स्कूलों में नीट और जेईई के नतीजे कैसे बदले हैं?
सिसोदिया के दावे के अनुसार नीट क्वालिफाई करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 80 से बढ़कर 882 हो गई है। चार वर्षों में कुल 2,166 विद्यार्थियों ने नीट और 786 ने जेईई उत्तीर्ण किया है।
पंजाब में बाढ़ से कितने स्कूल प्रभावित हुए और उनकी स्थिति क्या है?
सिसोदिया के अनुसार पंजाब में आई दो बड़ी बाढ़ों के कारण 7,000 से अधिक स्कूल प्रभावित हुए। इनमें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त करीब 500 स्कूलों का पुनर्निर्माण और पुनर्स्थापना कार्य अभी जारी है।
AI शिक्षा के मामले में पंजाब का क्या दावा है?
सिसोदिया ने दावा किया कि कक्षा एक से 12वीं तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई शुरू करने वाला पंजाब देश का पहला राज्य बना है। इसके साथ ही 40 स्किल एजुकेशन स्कूल और 5,012 स्कूलों में एडवांस कंप्यूटर लैब भी स्थापित की गई हैं।
सिसोदिया ने विपक्षी दलों पर क्या आरोप लगाए?
सिसोदिया ने BJP और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों के 15-20 वर्षों के शासन में पंजाब के स्कूलों में बुनियादी सुविधाएँ तक नहीं थीं। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि तुलना राजनीतिक आरोपों पर नहीं, बल्कि आँकड़ों और जमीनी स्थिति पर आधारित हो।
राष्ट्र प्रेस
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