मनीष सिसोदिया का दावा: पंजाब सरकारी स्कूलों में 2022 से अब तक हुए बदलाव की निष्पक्ष तुलना हो
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 26 अगस्त 2026 को पंजाब के सरकारी स्कूलों को लेकर उठ रहे सवालों पर विस्तृत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि पंजाब की शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन केवल मौजूदा स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि वर्ष 2022 में भगवंत मान के मुख्यमंत्री बनने के समय की स्थिति और आज के आँकड़ों की निष्पक्ष तुलना करके किया जाना चाहिए।
2022 में क्या थी स्थिति
सिसोदिया के अनुसार, 2022 में सत्ता संभालने के समय पंजाब के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव था। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में कई स्कूलों में शौचालय तक नहीं थे, करीब 4 लाख बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे और हजारों स्कूलों में पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने इसे दशकों की उपेक्षा का परिणाम बताते हुए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 15-20 वर्षों के कार्यकाल की ओर इशारा किया।
साढ़े चार वर्षों में किए गए दावे
सिसोदिया ने दावा किया कि AAP सरकार ने करीब 20,000 सरकारी स्कूलों में बड़े पैमाने पर सुधार कार्य कराए। उनके अनुसार इस अवधि में 9,000 से अधिक नए क्लासरूम और प्रयोगशालाएँ बनाई गईं, 13,920 नए शौचालयों का निर्माण हुआ और करीब 2 लाख नए डेस्क उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा 10,000 से अधिक स्कूलों में इंटरैक्टिव पैनल लगाए गए और 5,012 स्कूलों में एडवांस कंप्यूटर लैब तैयार की गई हैं।
सिसोदिया ने यह भी दावा किया कि सभी सरकारी स्कूलों को वाई-फाई से जोड़ा गया है और करीब 99 प्रतिशत स्कूलों में बाउंड्री वॉल मौजूद है। उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब में आई दो बड़ी बाढ़ों के कारण 7,000 से अधिक स्कूल प्रभावित हुए, जिनमें से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त करीब 500 स्कूलों का पुनर्निर्माण और पुनर्स्थापना कार्य अभी जारी है।
शैक्षणिक परिणामों पर दावे
बुनियादी ढाँचे से आगे बढ़ते हुए सिसोदिया ने शैक्षणिक परिणामों के आँकड़े भी पेश किए। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में 3.64 लाख बच्चे निजी स्कूलों को छोड़कर पंजाब के सरकारी स्कूलों में दाखिल हुए हैं। नीट परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 80 से बढ़कर 882 हो गई है। चार वर्षों में 2,166 विद्यार्थियों ने नीट और 786 ने जेईई क्वालिफाई किया है।
इसके अलावा उन्होंने बताया कि 2.30 लाख बच्चों ने 'बिजनेस ब्लास्टर्स' कार्यक्रम के माध्यम से उद्यमिता की जानकारी हासिल की। सिसोदिया ने दावा किया कि कक्षा एक से 12वीं तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की पढ़ाई शुरू करने वाला पंजाब देश का पहला राज्य बना है और 40 स्किल एजुकेशन स्कूल भी शुरू किए गए हैं।
राजनीतिक संदर्भ और विपक्ष पर निशाना
सिसोदिया ने BJP और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब की शिक्षा व्यवस्था की तुलना राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर नहीं, बल्कि आँकड़ों और जमीनी स्थिति के आधार पर होनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब के सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को लेकर विपक्षी दलों की आलोचनाएँ तेज हुई हैं। गौरतलब है कि दिल्ली में AAP की शिक्षा नीति की तर्ज पर पंजाब में भी सरकारी स्कूल सुधार AAP की राजनीतिक पहचान का अहम हिस्सा रहा है।
आगे की राह
सिसोदिया ने स्पष्ट किया कि सरकार यह दावा नहीं कर रही कि पंजाब में शिक्षा के क्षेत्र में काम पूरा हो गया है, लेकिन दशकों से चली आ रही समस्याओं में 'बदलाव की शुरुआत' हुई है। उनके अनुसार, सरकारी स्कूलों की सफलता का असली पैमाना अभिभावकों का भरोसा और बच्चों के बेहतर परिणाम हैं — केवल बजट आवंटन नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन दावों की स्वतंत्र सत्यापन की आवश्यकता है ताकि जमीनी हकीकत सामने आ सके।