22 सितंबर 2026
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सीतारमण का उद्योग जगत से आह्वान: 'इमैजिन्ड इन इंडिया' बनें, R&D पर GDP का 0.83% खर्च बेहद कम

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सीतारमण का उद्योग जगत से आह्वान: 'इमैजिन्ड इन इंडिया' बनें, R&D पर GDP का 0.83% खर्च बेहद कम

सारांश

वित्त मंत्री सीतारमण ने AIMA मंच से उद्योग जगत को नई चुनौती दी — 'मेड इन इंडिया' से आगे बढ़कर 'इमैजिन्ड इन इंडिया' बनो। भारत का R&D खर्च GDP का महज 0.83% है, जबकि अमेरिका 3.5% और चीन 2.6% खर्च करते हैं। निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाए बिना विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 22 सितंबर 2026 को AIMA कार्यक्रम में उद्योग जगत से 'इमैजिन्ड इन इंडिया' का लक्ष्य अपनाने का आह्वान किया।
भारत का सकल R&D व्यय (GERD) GDP का केवल 0.83% है, जबकि अमेरिका 3.5% , चीन 2.6% और OECD औसत 2.7% है।
भारत में निजी क्षेत्र का R&D योगदान केवल 36% है, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह 70% से अधिक है।
सीतारमण ने स्टार्टअप और परिवार-आधारित व्यवसायों के लिए विशेष व्यावहारिक प्रबंधन पाठ्यक्रम बनाने की अपील की।
कॉरपोरेट को ग्रामीण और असंगठित क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर भी ध्यान देने की सलाह दी गई।
उद्योग जगत से सरकार और नियामकों के साथ बातचीत-आधारित संवाद अपनाने तथा कानूनी विवादों से बचने की अपील की गई।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के एक कार्यक्रम में भारतीय उद्योग जगत को स्पष्ट संदेश दिया — केवल कारोबार का आकार बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, अब लक्ष्य नवोन्मेषी, सुशासित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंपनियाँ बनाने का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के विकास का अगला चरण गुणवत्ता-आधारित होना चाहिए, और इसके लिए कॉरपोरेट क्षेत्र को अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि करनी होगी।

मुख्य घोषणा: 'मेड इन इंडिया' से आगे

सीतारमण ने अपने संबोधन में कहा, 'हमारी महत्वाकांक्षा केवल 'मेड इन इंडिया' तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि 'इमैजिन्ड इन इंडिया' होनी चाहिए, जिसमें न केवल यहीं पर निर्मित उत्पाद हों, बल्कि यहीं पर उनकी कल्पना, डिजाइन और तकनीकी विकास भी किया जाए और फिर उन्हें दुनिया के बाज़ारों तक पहुँचाया जाए।' यह बयान 'विकसित भारत 2047' की परिकल्पना को एक नया आयाम देता है — उत्पादन से नवाचार की ओर।

उन्होंने कंपनियों को अपने स्तर पर या शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी के माध्यम से R&D खर्च बढ़ाने की अपील की, ताकि उत्पादों में सुधार हो और भारत में अधिक बौद्धिक संपदा (IP) का निर्माण हो।

R&D खर्च में भारत का अंतराल: आँकड़े क्या कहते हैं

वित्त मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत का सकल R&D व्यय (GERD) फिलहाल GDP का केवल 0.83 प्रतिशत है। तुलनात्मक रूप से, OECD देशों का औसत 2.7 प्रतिशत, चीन का 2.6 प्रतिशत और अमेरिका का 3.5 प्रतिशत है। इससे भी चिंताजनक यह है कि भारत में निजी क्षेत्र का R&D योगदान केवल 36 प्रतिशत है, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह आँकड़ा 70 प्रतिशत से अधिक है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अपनी जगह मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में नवाचार की कमज़ोर नींव भविष्य की वृद्धि को सीमित कर सकती है।

प्रबंधन शिक्षा और स्टार्टअप पारिस्थितिकी पर ज़ोर

सीतारमण ने प्रबंधन शिक्षा को अधिक व्यावहारिक बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि स्टार्टअप संस्थापकों और शुरुआती कर्मचारियों के लिए भर्ती, वित्तीय अनुशासन, ग्राहक प्रबंधन, अनुपालन और संगठनात्मक ढाँचा विकसित करने जैसे विषयों पर संक्षिप्त और उपयोगी पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए।

उन्होंने परिवार-आधारित व्यवसायों के लिए उत्तराधिकार योजना, कॉरपोरेट गवर्नेंस, पेशेवर प्रबंधन और विवाद समाधान जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता भी रेखांकित की।

ग्रामीण और असंगठित क्षेत्र पर ध्यान देने की अपील

वित्त मंत्री ने कॉरपोरेट इंडिया को आगाह किया कि वह केवल शहरी और उच्च आय वर्ग के उपभोक्ताओं पर निर्भर न रहे। उन्होंने कहा, 'यदि कॉरपोरेट इंडिया केवल शहरी प्रीमियम उपभोक्ताओं पर फोकस करेगा, तो विकास की संरचनात्मक मज़बूती कमज़ोर पड़ सकती है।' उनके अनुसार भारत की खपत का असली आधार कृषि, ग्रामीण निर्माण, परिवहन और असंगठित क्षेत्र से जुड़े करोड़ों परिवार हैं।

कॉरपोरेट गवर्नेंस और सरकार से संवाद

कॉरपोरेट गवर्नेंस पर ज़ोर देते हुए सीतारमण ने उद्योग जगत से सरकार और नियामकों के साथ रचनात्मक संवाद बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर मतभेद को तुरंत कानूनी विवाद में बदलने के बजाय बातचीत और परामर्श के ज़रिए समाधान खोजना चाहिए। उनके अनुसार, पारदर्शिता, पूर्वानुमान और संवाद की संस्कृति एक परिपक्व अर्थव्यवस्था की पहचान है — असहमति का अर्थ टकराव नहीं होना चाहिए।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि उद्योग जगत इन अपीलों को नीतिगत माँगों में किस हद तक तब्दील करता है और सरकार R&D प्रोत्साहनों के लिए कोई ठोस कर-राहत या प्रोत्साहन ढाँचा सामने लाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रहता है कि निजी R&D को GDP के 0.83% से दोगुना करने के लिए सरकार की तरफ से कोई ठोस कर-प्रोत्साहन या अनुदान ढाँचा कब आएगा। बिना नीतिगत प्रोत्साहन के केवल नैतिक अपील से निजी क्षेत्र की R&D हिस्सेदारी 36% से 70% तक नहीं पहुँचती — यह तथ्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं का इतिहास भी बताता है। ग्रामीण उपभोक्ताओं पर ध्यान देने की अपील सही दिशा में है, लेकिन कॉरपोरेट रणनीति बदलती है माँग और मुनाफे की संभावना से, भाषणों से नहीं। असली परीक्षा अगले बजट में होगी — जब देखना होगा कि ये अपीलें नीतिगत प्रावधानों में तब्दील होती हैं या केवल मंच पर दिए गए बयान बनकर रह जाती हैं।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'इमैजिन्ड इन इंडिया' से वित्त मंत्री का क्या आशय है?
'इमैजिन्ड इन इंडिया' वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत वह अवधारणा है जिसमें उत्पादों की कल्पना, डिजाइन और तकनीकी विकास भारत में ही हो और फिर उन्हें वैश्विक बाज़ारों में भेजा जाए — न कि केवल विदेशी डिज़ाइन को यहाँ असेंबल किया जाए। यह 'मेड इन इंडिया' से एक कदम आगे की अवधारणा है जो नवाचार और बौद्धिक संपदा निर्माण पर केंद्रित है।
भारत का R&D खर्च अन्य देशों की तुलना में कहाँ खड़ा है?
भारत का सकल R&D व्यय (GERD) GDP का केवल 0.83% है, जो OECD देशों के औसत 2.7%, चीन के 2.6% और अमेरिका के 3.5% से काफी कम है। इसके अतिरिक्त, भारत में निजी क्षेत्र का R&D योगदान मात्र 36% है, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह 70% से अधिक है।
सीतारमण ने स्टार्टअप और परिवार-आधारित कारोबारों के लिए क्या सुझाए?
सीतारमण ने स्टार्टअप संस्थापकों और शुरुआती कर्मचारियों के लिए भर्ती, वित्तीय अनुशासन, ग्राहक प्रबंधन, अनुपालन और संगठनात्मक ढाँचे पर संक्षिप्त व्यावहारिक पाठ्यक्रम बनाने का सुझाव दिया। परिवार-आधारित व्यवसायों के लिए उत्तराधिकार योजना, कॉरपोरेट गवर्नेंस और विवाद समाधान पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों की ज़रूरत भी रेखांकित की।
वित्त मंत्री ने ग्रामीण उपभोक्ताओं के बारे में क्या कहा?
सीतारमण ने कॉरपोरेट इंडिया को आगाह किया कि केवल शहरी प्रीमियम उपभोक्ताओं पर ध्यान केंद्रित करने से विकास की संरचनात्मक मज़बूती कमज़ोर पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि भारत की खपत का असली आधार कृषि, ग्रामीण निर्माण, परिवहन और असंगठित क्षेत्र से जुड़े करोड़ों परिवार हैं।
यह भाषण 'विकसित भारत 2047' लक्ष्य से कैसे जुड़ता है?
सीतारमण ने स्पष्ट किया कि 'विकसित भारत 2047' की दिशा में भारतीय प्रबंधन की सफलता का आकलन इस आधार पर होगा कि आज कितनी गुणवत्तापूर्ण, नवोन्मेषी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंपनियाँ तैयार हो रही हैं। उनके अनुसार, R&D में निवेश और IP निर्माण इस लक्ष्य की बुनियाद हैं।
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