29 अगस्त 2026
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सीतारमण का शिकागो में वैश्विक निवेशकों को आह्वान: भारत बाज़ार, प्रतिभा और सुधारों का अनूठा संगम

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सीतारमण का शिकागो में वैश्विक निवेशकों को आह्वान: भारत बाज़ार, प्रतिभा और सुधारों का अनूठा संगम

सारांश

शिकागो की उच्चस्तरीय बैठक में वित्त मंत्री सीतारमण ने वैश्विक निवेशकों के सामने भारत को सिर्फ उपभोक्ता बाज़ार नहीं, बल्कि विनिर्माण और नवाचार के वैश्विक मंच के रूप में प्रस्तुत किया। गिफ्ट IFSC में 1,250 संस्थाएँ और GCC का नवाचार केंद्रों में रूपांतरण — यह भारत की 'चाइना-प्लस-वन' दावेदारी की सबसे ठोस पिच थी।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 29 अगस्त 2026 को शिकागो में उच्चस्तरीय बिजनेस गोलमेज बैठक को संबोधित किया।
भारत को विनिर्माण, AI, डिजिटल टेक्नोलॉजी, डिफेंस और फाइनेंशियल सर्विसेज़ में निवेश के लिए वैश्विक मंच के रूप में प्रस्तुत किया।
गिफ्ट IFSC में जून 2026 तक 1,250 पंजीकृत संस्थाएँ कार्यरत हो चुकी हैं।
भारत के GCC अब सेवा केंद्रों से वैश्विक नवाचार केंद्रों में तब्दील हो रहे हैं।
आधार, UPI, ONDC जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भारत की विशिष्ट निवेश-योग्यता के प्रमाण के रूप में पेश किया।
वैश्विक आपूर्ति शृंखला पुनर्गठन को भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 29 अगस्त 2026 को शिकागो, अमेरिका में आयोजित एक उच्चस्तरीय बिजनेस गोलमेज बैठक में वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के नेताओं से भारत में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जब वैश्विक कंपनियाँ अपनी आपूर्ति शृंखलाओं और निवेश रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन कर रही हैं, ऐसे निर्णायक दौर में भारत उन्हें बाज़ार, प्रतिभा, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और निरंतर सुधारों का एक अद्वितीय संयोजन प्रदान करता है।

भारत को मंच के रूप में अपनाने का आग्रह

सीतारमण ने वैश्विक कंपनियों से कहा कि वे भारत को केवल एक बड़े उपभोक्ता बाज़ार की दृष्टि से न देखें, बल्कि इसे एक ऐसे मंच के रूप में अपनाएँ जहाँ वे विनिर्माण कर सकें, नवाचार विकसित कर सकें और पूरी दुनिया के लिए उत्पाद एवं सेवाएँ तैयार कर सकें। उन्होंने 'भारत में विनिर्माण — भारत के लिए और दुनिया के लिए' की अवधारणा को आज की वैश्विक आर्थिक ज़रूरतों के अनुरूप बताया।

वित्त मंत्री ने मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल टेक्नोलॉजी, फाइनेंशियल सर्विसेज़, इंफ्रास्ट्रक्चर, फूड प्रोसेसिंग, डिफेंस और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में वैश्विक कंपनियों के लिए व्यापक अवसरों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत की निवेश क्षमता किसी एक क्षेत्र पर नहीं, बल्कि पिछले एक दशक में विकसित हुई अनेक संरचनात्मक ताकतों पर टिकी है।

'भारत ही क्यों, अभी क्यों' — मुख्य तर्क

सीतारमण ने 'भारत ही क्यों, अभी क्यों' विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकतें हैं — विशाल घरेलू बाज़ार, मज़बूत उपभोक्ता माँग, निवेश-आधारित विकास मॉडल, व्यापक आर्थिक स्थिरता, कुशल मानव संसाधन और तेज़ी से विकसित हो रहा डिजिटल तथा भौतिक अवसंरचना नेटवर्क। यह तर्क ऐसे समय में आया है जब चीन-प्लस-वन रणनीति के तहत कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वैकल्पिक उत्पादन केंद्रों की तलाश में हैं।

डिजिटल अर्थव्यवस्था और AI में भारत की बढ़त

डिजिटल अर्थव्यवस्था का ज़िक्र करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि भारत ने आधार, UPI, DigiLocker, ONDC और India Stack जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म को जनसंख्या स्तर पर सफलतापूर्वक लागू किया है, जिससे वित्तीय समावेशन, डिजिटल लेनदेन और सेवा वितरण में क्रांतिकारी बदलाव आया है।

उन्होंने कहा कि अगला बड़ा अवसर AI, इंजीनियरिंग, विश्लेषण, उत्पाद विकास, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उच्च-मूल्य क्षेत्रों में नए व्यवसाय विकसित करने का है। उनके अनुसार, भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) अब केवल सेवा केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं।

गिफ्ट सिटी में वैश्विक वित्तीय संस्थानों को आमंत्रण

वित्त मंत्री ने वैश्विक वित्तीय संस्थानों को गिफ्ट सिटी में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि जून 2026 तक गिफ्ट इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज़ सेंटर (IFSC) में 1,250 पंजीकृत संस्थाएँ कार्यरत हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि गिफ्ट IFSC तेज़ी से एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के रूप में उभर रहा है जो वैश्विक पूंजी को भारत के निवेश अवसरों से जोड़ता है — बैंकिंग, फंड मैनेजमेंट, पुनर्बीमा, विमान एवं जहाज़ लीज़िंग, सतत वित्त और सीमा-पार वित्तीय सेवाओं में।

वैश्विक आपूर्ति शृंखला पुनर्गठन से ऐतिहासिक अवसर

विनिर्माण क्षेत्र पर बोलते हुए सीतारमण ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के पुनर्गठन ने भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर उत्पन्न किया है। विशाल घरेलू बाज़ार, प्रतिस्पर्धी उत्पादन क्षमताएँ, कुशल कार्यबल और नीतिगत समर्थन भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने निवेशकों से भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनने का आग्रह करते हुए कहा कि देश आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास का एक प्रमुख इंजन बनने की क्षमता रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रतिभा, सुधार — लेकिन इस बार संदर्भ अलग है: वैश्विक आपूर्ति शृंखला पुनर्गठन ने भारत को एक वास्तविक विकल्प बना दिया है, न केवल एक आकांक्षा। गिफ्ट IFSC में 1,250 संस्थाओं का आँकड़ा और GCC का नवाचार केंद्रों में रूपांतरण ठोस संकेत हैं। असली परीक्षण यह है कि क्या नीतिगत निरंतरता — विशेषकर कर ढाँचे और श्रम कानूनों में — उस गति से चलेगी जो वैश्विक निवेशक अपेक्षा करते हैं। वादों और क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटना ही भारत की असली साख बनाएगा।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्मला सीतारमण ने शिकागो में किस बैठक को संबोधित किया?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 29 अगस्त 2026 को शिकागो में आयोजित एक उच्चस्तरीय बिजनेस गोलमेज बैठक को संबोधित किया, जिसमें वैश्विक निवेशक और उद्योग जगत के नेता शामिल थे। इस बैठक में उन्होंने भारत में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया।
सीतारमण ने निवेश के लिए कौन-से प्रमुख क्षेत्र गिनाए?
उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, फाइनेंशियल सर्विसेज़, इंफ्रास्ट्रक्चर, फूड प्रोसेसिंग, डिफेंस, सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को प्रमुख निवेश क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया। उनके अनुसार इन सभी क्षेत्रों में वैश्विक कंपनियों के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।
गिफ्ट IFSC में अभी कितनी संस्थाएँ पंजीकृत हैं?
वित्त मंत्री के अनुसार जून 2026 तक गिफ्ट इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज़ सेंटर (IFSC) में 1,250 पंजीकृत संस्थाएँ कार्यरत थीं। गिफ्ट IFSC बैंकिंग, फंड मैनेजमेंट, पुनर्बीमा और सतत वित्त जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के रूप में उभर रहा है।
भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) क्यों अहम हो रहे हैं?
सीतारमण के अनुसार भारत के GCC अब केवल सेवा केंद्र नहीं रहे, बल्कि वैश्विक नवाचार केंद्रों के रूप में विकसित हो रहे हैं। AI, इंजीनियरिंग, विश्लेषण और उत्पाद विकास जैसे उच्च-मूल्य क्षेत्रों में नए व्यवसाय विकसित करने का अगला बड़ा अवसर इन्हीं केंद्रों के ज़रिए आएगा।
वैश्विक आपूर्ति शृंखला पुनर्गठन से भारत को क्या फायदा है?
वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के पुनर्गठन ने भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर पैदा किया है। विशाल घरेलू बाज़ार, प्रतिस्पर्धी उत्पादन क्षमताएँ, कुशल कार्यबल और नीतिगत समर्थन के संयोजन से भारत वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
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