22 सितंबर 2026
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निर्मला सीतारमण का आह्वान: 'मेड इन इंडिया' से आगे 'इमैजिन्ड इन इंडिया' की ओर बढ़े भारत

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निर्मला सीतारमण का आह्वान: 'मेड इन इंडिया' से आगे 'इमैजिन्ड इन इंडिया' की ओर बढ़े भारत

सारांश

वित्त मंत्री सीतारमण ने AIMA मंच से साफ कहा — भारत का भविष्य असेंबली लाइन में नहीं, बल्कि डिज़ाइन लैब और पेटेंट कार्यालयों में है। 'इमैजिन्ड इन इंडिया' का यह आह्वान मैन्युफैक्चरिंग की सीमाओं को स्वीकार करते हुए मूल्य श्रृंखला में ऊपर चढ़ने की नई सरकारी सोच का संकेत है।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 22 सितंबर 2026 को AIMA के 53वें नेशनल मैनेजमेंट कन्वेंशन में 'इमैजिन्ड इन इंडिया' का आह्वान किया।
अगला विकास चरण डिजाइन, इंजीनियरिंग, पेटेंट, सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी से उच्च मूल्य हासिल करने पर केंद्रित होगा।
उन्होंने पारिवारिक व्यवसायों में स्वामित्व प्रबंधन पृथक्करण, उत्तराधिकार नियोजन और पेशेवर शासन की जरूरत पर बल दिया।
सीतारमण ने कहा — असली सफलता यूनिकॉर्न की संख्या नहीं, बल्कि उनकी दीर्घकालिक टिकाऊपन में है।
क्रियान्वयन को उन्होंने सफलता की अनिवार्य शर्त बताया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि भारत की अगली पीढ़ी की आर्थिक प्रगति केवल मैन्युफैक्चरिंग पर टिकी नहीं रह सकती — इसे इनोवेशन, डिजाइन और टेक्नोलॉजी की बुनियाद पर खड़ा होना होगा। ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के 53वें नेशनल मैनेजमेंट कन्वेंशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 'मेड इन इंडिया' से आगे बढ़कर 'इमैजिन्ड इन इंडिया' की दिशा में जाने का समय आ गया है।

मुख्य संदेश: मूल्य श्रृंखला में ऊपर चढ़ने की जरूरत

सीतारमण ने कहा, "मैन्युफैक्चरिंग का पैमाना अहम है, लेकिन अगला चरण डिजाइन, इंजीनियरिंग, पेटेंट, सॉफ्टवेयर, टेक्नोलॉजी और जानकारी से मिलने वाले ज्यादा मूल्य को हासिल करना है।" उन्होंने उद्यमियों से आग्रह किया कि उत्पाद दुनिया भर के बाज़ारों तक पहुँचाने से पहले उन्हें भारत में ही सोचा, डिज़ाइन और तकनीकी रूप से विकसित किया जाए।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत का मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र पिछले एक दशक से GDP में 17–18% की हिस्सेदारी पर स्थिर बना हुआ है, जबकि कोरिया और चीन जैसी अर्थव्यवस्थाओं ने उत्पादन से नवाचार की ओर सफलतापूर्वक छलाँग लगाई है।

भारत की क्षमता पर भरोसा, लेकिन क्रियान्वयन की शर्त

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के पास विकास के उच्चतम स्तर तक पहुँचने के लिए आवश्यक बाज़ार का आकार, उद्यमियों की ऊर्जा और संस्थागत क्षमता मौजूद है। हालाँकि, उन्होंने आगाह भी किया कि इन खूबियों को दीर्घकालिक राष्ट्रीय क्षमताओं में बदलने की सफलता असरदार क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। गौरतलब है कि यह सावधानी भरा रुख स्वयं सरकार की जवाबदेही को रेखांकित करता है।

पारिवारिक व्यवसायों में प्रोफेशनलिज्म की दरकार

सीतारमण ने पारिवारिक स्वामित्व वाले कारोबारों की चुनौतियों पर भी ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने स्वामित्व और प्रबंधन को स्पष्ट रूप से अलग रखने, जिम्मेदारियों का सुव्यवस्थित वितरण, उत्तराधिकार नियोजन और विवाद समाधान के पूर्व निर्मित तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने AIMA से आग्रह किया कि वे गवर्नेंस, उत्तराधिकार योजना, प्रत्यायोजन और विवाद प्रबंधन जैसे विषयों पर केंद्रित व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम बढ़ाएं, ताकि पारिवारिक व्यवसाय पीढ़ियों तक विकास बनाए रख सकें।

यूनिकॉर्न नहीं, टिकाऊ कंपनियाँ हों लक्ष्य

वित्त मंत्री ने स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र पर एक महत्त्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा, "असली कामयाबी इस बात में नहीं है कि हम कितने यूनिकॉर्न बनाते हैं, बल्कि इस बात में है कि उनमें से कितने टिके रहते हैं और आज के स्टार्टअप कल की बड़ी कंपनियाँ बनती हैं।" यह टिप्पणी उस पृष्ठभूमि में विशेष महत्त्व रखती है जब भारत के कई यूनिकॉर्न IPO के बाद मूल्यांकन क्षरण से जूझ रहे हैं।

आगे की राह

सीतारमण के इस संबोधन को नीति निर्माण की दिशा में एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है — कि सरकार अब केवल उत्पादन आधारित प्रोत्साहन से आगे बढ़कर बौद्धिक संपदा, अनुसंधान एवं विकास और डिज़ाइन इकोसिस्टम को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगी। उद्योग जगत की नज़रें अब आने वाले बजट और नीतिगत घोषणाओं पर होंगी, यह देखने के लिए कि यह दृष्टि ठोस योजनाओं का रूप कब लेती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या नीतिगत ढाँचा इस महत्वाकांक्षा के अनुरूप है। भारत का R&D खर्च GDP के 0.65% के आसपास बना हुआ है — चीन के 2.4% और दक्षिण कोरिया के 4% से कहीं पीछे। पेटेंट और डिज़ाइन इकोसिस्टम को मैन्युफैक्चरिंग की तरह PLI शैली के प्रोत्साहन की जरूरत है, जिसका अभी कोई ठोस खाका सामने नहीं आया है। भाषण की दिशा सही है, पर बिना बजटीय प्रतिबद्धता और मापने योग्य नवाचार संकेतकों के, यह घोषणा भी उन कॉर्पोरेट हॉल तक सीमित रह सकती है जहाँ इसे सुनाया गया।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'इमैजिन्ड इन इंडिया' से वित्त मंत्री का क्या तात्पर्य है?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आशय है कि भारत में केवल उत्पाद बनाना पर्याप्त नहीं — उन्हें यहीं सोचा, डिज़ाइन किया और तकनीकी रूप से विकसित भी किया जाना चाहिए। यह 'मेड इन इंडिया' से आगे की अगली पायदान है, जो इनोवेशन, पेटेंट और सॉफ्टवेयर आधारित मूल्य सृजन पर केंद्रित है।
सीतारमण ने यह बात किस मंच पर कही?
उन्होंने 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के 53वें नेशनल मैनेजमेंट कन्वेंशन को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं।
क्या सरकार ने इनोवेशन आधारित विकास के लिए कोई नई योजना घोषित की?
सीतारमण के भाषण में कोई नई वित्तीय योजना या आवंटन की घोषणा नहीं की गई। उन्होंने एक नीतिगत दृष्टि प्रस्तुत की और AIMA से पारिवारिक व्यवसायों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम बढ़ाने का आग्रह किया।
पारिवारिक व्यवसायों के बारे में वित्त मंत्री ने क्या सुझाव दिए?
उन्होंने स्वामित्व और प्रबंधन को स्पष्ट रूप से अलग रखने, उत्तराधिकार नियोजन, जिम्मेदारियों का सुव्यवस्थित वितरण और विवाद समाधान के पूर्व निर्मित तंत्र अपनाने की सलाह दी, ताकि व्यवसाय पीढ़ियों तक टिकाऊ रह सकें।
यूनिकॉर्न पर सीतारमण का क्या रुख था?
उन्होंने कहा कि असली सफलता यूनिकॉर्न की संख्या में नहीं, बल्कि इस बात में है कि उनमें से कितने दीर्घकालिक रूप से टिके रहते हैं और आज के स्टार्टअप कल की बड़ी स्थायी कंपनियाँ बनती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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