सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस: नयाबुद्दीन शेख ने 22 आरोपियों की बरी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
सारांश
मुख्य बातें
सुप्रीम कोर्ट में 24 अगस्त 2026 को एक अहम याचिका दाखिल हुई, जिसमें कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख के छोटे भाई नयाबुद्दीन शेख ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें 21 पुलिसकर्मियों समेत सभी 22 आरोपियों को बरी किए जाने को बरकरार रखा गया था। यह याचिका वकील अचिंत कुमार के माध्यम से दाखिल की गई है और इसमें केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को प्रतिवादी बनाया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 22-23 नवंबर 2005 की रात से जुड़ा है, जब हैदराबाद से सांगली जा रही एक लग्जरी बस से सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति का कथित अपहरण किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, नवंबर 2005 में अहमदाबाद के निकट गुजरात और राजस्थान पुलिस की एक संयुक्त टीम ने कथित तौर पर फर्जी मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन की हत्या कर दी। कौसर बी की भी कुछ दिनों बाद कथित तौर पर हत्या की गई और उनके शव को गुपचुप तरीके से ठिकाने लगाया गया।
इस मामले के मुख्य चश्मदीद गवाह माने जाने वाले तुलसीराम प्रजापति की दिसंबर 2006 में गुजरात-राजस्थान सीमा पर एक और कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई।
ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट का रुख
स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दिसंबर 2018 में सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके बाद सोहराबुद्दीन के भाइयों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर की, जिसमें बरी करने के फैसले को रद्द करने या दोबारा ट्रायल कराने की माँग की गई थी। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 7 मई को अपने फैसले में ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष भरोसेमंद साक्ष्यों के आधार पर कथित साजिश और हत्याओं को प्रमाणित करने में विफल रहा।
अपीलकर्ताओं के तर्क
नयाबुद्दीन शेख सहित अपील करने वालों ने ट्रायल में गंभीर प्रक्रियागत खामियाँ गिनाई थीं। उनका तर्क था कि उन मजिस्ट्रेटों को गवाह के रूप में नहीं बुलाया गया, जिनके सामने कुछ शत्रु गवाहों ने पहले अपने बयान दर्ज कराए थे। इसके अलावा, कई गवाहों ने बाद में दावा किया कि ट्रायल के दौरान उनके बयान सही तरीके से दर्ज नहीं किए गए। हालाँकि, बॉम्बे हाई कोर्ट इन आधारों पर बरी करने के फैसले को पलटने के लिए राजी नहीं हुआ।
सीबीआई का रुख और याचिका की स्थिति
उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने हाई कोर्ट को बताया था कि उसने 2018 के बरी करने के फैसले को स्वीकार कर लिया था और उसे अपील में चुनौती न देने का निर्णय किया था। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, नयाबुद्दीन शेख की यह याचिका 13 अगस्त को रात लगभग 10.52 बजे दाखिल की गई थी। फिलहाल इसे 90 दिनों के लिए वैध डिफेक्ट लिस्ट के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है। अब यह देखना होगा कि सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति देता है या नहीं।