24 अगस्त 2026
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सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस: नयाबुद्दीन शेख ने 22 आरोपियों की बरी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की

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सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस: नयाबुद्दीन शेख ने 22 आरोपियों की बरी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की

सारांश

सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर मामले में दो दशक बाद भी न्याय की लड़ाई जारी है। नयाबुद्दीन शेख ने 22 आरोपियों की बरी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जबकि सीबीआई पहले ही 2018 के फैसले को स्वीकार कर चुकी है।

मुख्य बातें

नयाबुद्दीन शेख ने 13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी।
हाई कोर्ट ने 7 मई को 21 पुलिसकर्मियों समेत सभी 22 आरोपियों की बरी को बरकरार रखा था।
स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दिसंबर 2018 में सभी आरोपियों को बरी किया था; सीबीआई ने उस फैसले को स्वीकार कर लिया था।
मामला 22-23 नवंबर 2005 की रात सोहराबुद्दीन शेख , कौसर बी और तुलसीराम प्रजापति के कथित अपहरण और हत्या से जुड़ा है।
याचिका फिलहाल 90 दिनों की वैध डिफेक्ट लिस्ट के अंतर्गत सूचीबद्ध है।

सुप्रीम कोर्ट में 24 अगस्त 2026 को एक अहम याचिका दाखिल हुई, जिसमें कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख के छोटे भाई नयाबुद्दीन शेख ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें 21 पुलिसकर्मियों समेत सभी 22 आरोपियों को बरी किए जाने को बरकरार रखा गया था। यह याचिका वकील अचिंत कुमार के माध्यम से दाखिल की गई है और इसमें केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को प्रतिवादी बनाया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 22-23 नवंबर 2005 की रात से जुड़ा है, जब हैदराबाद से सांगली जा रही एक लग्जरी बस से सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति का कथित अपहरण किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, नवंबर 2005 में अहमदाबाद के निकट गुजरात और राजस्थान पुलिस की एक संयुक्त टीम ने कथित तौर पर फर्जी मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन की हत्या कर दी। कौसर बी की भी कुछ दिनों बाद कथित तौर पर हत्या की गई और उनके शव को गुपचुप तरीके से ठिकाने लगाया गया।

इस मामले के मुख्य चश्मदीद गवाह माने जाने वाले तुलसीराम प्रजापति की दिसंबर 2006 में गुजरात-राजस्थान सीमा पर एक और कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई।

ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट का रुख

स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दिसंबर 2018 में सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके बाद सोहराबुद्दीन के भाइयों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर की, जिसमें बरी करने के फैसले को रद्द करने या दोबारा ट्रायल कराने की माँग की गई थी। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 7 मई को अपने फैसले में ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष भरोसेमंद साक्ष्यों के आधार पर कथित साजिश और हत्याओं को प्रमाणित करने में विफल रहा।

अपीलकर्ताओं के तर्क

नयाबुद्दीन शेख सहित अपील करने वालों ने ट्रायल में गंभीर प्रक्रियागत खामियाँ गिनाई थीं। उनका तर्क था कि उन मजिस्ट्रेटों को गवाह के रूप में नहीं बुलाया गया, जिनके सामने कुछ शत्रु गवाहों ने पहले अपने बयान दर्ज कराए थे। इसके अलावा, कई गवाहों ने बाद में दावा किया कि ट्रायल के दौरान उनके बयान सही तरीके से दर्ज नहीं किए गए। हालाँकि, बॉम्बे हाई कोर्ट इन आधारों पर बरी करने के फैसले को पलटने के लिए राजी नहीं हुआ।

सीबीआई का रुख और याचिका की स्थिति

उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने हाई कोर्ट को बताया था कि उसने 2018 के बरी करने के फैसले को स्वीकार कर लिया था और उसे अपील में चुनौती न देने का निर्णय किया था। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, नयाबुद्दीन शेख की यह याचिका 13 अगस्त को रात लगभग 10.52 बजे दाखिल की गई थी। फिलहाल इसे 90 दिनों के लिए वैध डिफेक्ट लिस्ट के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है। अब यह देखना होगा कि सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति देता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें सीबीआई खुद 2018 में बरी के फैसले को चुनौती देने से पीछे हट चुकी है — यह असाधारण स्थिति है। जब जाँच एजेंसी ही अपील न करे, तो पीड़ित परिवार के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना अंतिम विकल्प बन जाता है। मगर सवाल यह है कि जब अभियोजन पक्ष हाई कोर्ट में साक्ष्य की कमी साबित हो चुकी है, तो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष नई दलीलों की गुंजाइश कितनी है। यह मामला भारत में फर्जी एनकाउंटर की जवाबदेही और संस्थागत जाँच की सीमाओं पर एक बड़ा सवालिया निशान छोड़ता है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस क्या है?
यह मामला नवंबर 2005 में गुजरात और राजस्थान पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या से जुड़ा है। तीनों को हैदराबाद से सांगली जा रही एक बस से कथित तौर पर अगवा किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका किसने और क्यों दायर की?
सोहराबुद्दीन शेख के छोटे भाई नयाबुद्दीन शेख ने वकील अचिंत कुमार के जरिए यह याचिका दाखिल की है। याचिका बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देती है, जिसमें 22 आरोपियों की बरी को बरकरार रखा गया था।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बरी के फैसले को क्यों बरकरार रखा?
हाई कोर्ट ने 7 मई के अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष भरोसेमंद साक्ष्यों के जरिए कथित साजिश और हत्याओं को साबित करने में नाकाम रहा। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
सीबीआई ने इस मामले में अपील क्यों नहीं की?
सीबीआई ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया था कि उसने 2018 में स्पेशल सीबीआई कोर्ट के बरी करने के फैसले को स्वीकार कर लिया था और उसे अपील में चुनौती न देने का निर्णय किया था।
याचिका की अभी क्या स्थिति है?
याचिका 13 अगस्त को रात लगभग 10.52 बजे दाखिल की गई थी और फिलहाल इसे 90 दिनों के लिए वैध डिफेक्ट लिस्ट के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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