सोहराबुद्दीन एनकाउंटर: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 22 पुलिसकर्मियों की बरी के खिलाफ याचिका खारिज की
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 मई 2025 को सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में 22 पुलिस अधिकारियों को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया। यह याचिका सोहराबुद्दीन के भाइयों रुबाबुद्दीन और नयाबुद्दीन शेख की ओर से दायर की गई थी, जिन्होंने सीबीआई की विशेष अदालत के बरी करने के आदेश को चुनौती दी थी।
फैसला किसने सुनाया
बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अश्विन अनखड़ की डबल बेंच ने गुरुवार को खुली अदालत में यह निर्णय सुनाया। अदालत ने अपील खारिज करते हुए फिलहाल विस्तृत आदेश जारी नहीं किया है, जिससे खारिज करने के आधार अभी स्पष्ट नहीं हो पाए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 2005 में सामने आया था, जब गुजरात पुलिस द्वारा सोहराबुद्दीन शेख की कथित फर्जी एनकाउंटर में हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि गुजरात और राजस्थान पुलिस के कुछ अधिकारियों ने सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी कौसर बी का अपहरण किया था। बाद में सोहराबुद्दीन को एनकाउंटर में मार दिया गया और कौसर बी का आज तक कोई सुराग नहीं मिला। उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की भी एक वर्ष बाद एक अन्य कथित एनकाउंटर में मौत हो गई थी।
सीबीआई जांच और ट्रायल
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी। जांच के दौरान गुजरात और राजस्थान पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया। कुल 38 आरोपियों में से 16 पहले ही बरी हो चुके थे। शेष 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ ट्रायल चला, जिन्हें सीबीआई की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। अदालत ने तब कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में नाकाम रहा।
परिवार के वकील की प्रतिक्रिया
रुबाबुद्दीन शेख के अधिवक्ता गौतम तिवारी ने फैसले के बाद कहा,