सोहराबुद्दीन एनकाउंटर: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 22 पुलिसकर्मियों की बरी के खिलाफ याचिका खारिज की

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सोहराबुद्दीन एनकाउंटर: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 22 पुलिसकर्मियों की बरी के खिलाफ याचिका खारिज की

सारांश

20 साल पुराने सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने 22 पुलिसकर्मियों की बरी के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी। सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए अदालत ने याचिका ठुकराई। परिवार अब सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रहा है।

मुख्य बातें

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 मई 2025 को सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में 22 पुलिसकर्मियों की बरी के खिलाफ याचिका खारिज की।
याचिका सोहराबुद्दीन के भाइयों रुबाबुद्दीन और नयाबुद्दीन शेख ने दायर की थी।
मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अश्विन अनखड़ की डबल बेंच ने फैसला सुनाया।
कुल 38 आरोपियों में से सभी बरी; सीबीआई की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में 22 को बरी किया था।
परिवार के वकील गौतम तिवारी ने कहा कि विस्तृत आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार किया जाएगा।

मुंबई के बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 मई 2025 को सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में 22 पुलिस अधिकारियों को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया। यह याचिका सोहराबुद्दीन के भाइयों रुबाबुद्दीन और नयाबुद्दीन शेख की ओर से दायर की गई थी, जिन्होंने सीबीआई की विशेष अदालत के बरी करने के आदेश को चुनौती दी थी।

फैसला किसने सुनाया

बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अश्विन अनखड़ की डबल बेंच ने गुरुवार को खुली अदालत में यह निर्णय सुनाया। अदालत ने अपील खारिज करते हुए फिलहाल विस्तृत आदेश जारी नहीं किया है, जिससे खारिज करने के आधार अभी स्पष्ट नहीं हो पाए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 2005 में सामने आया था, जब गुजरात पुलिस द्वारा सोहराबुद्दीन शेख की कथित फर्जी एनकाउंटर में हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि गुजरात और राजस्थान पुलिस के कुछ अधिकारियों ने सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी कौसर बी का अपहरण किया था। बाद में सोहराबुद्दीन को एनकाउंटर में मार दिया गया और कौसर बी का आज तक कोई सुराग नहीं मिला। उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की भी एक वर्ष बाद एक अन्य कथित एनकाउंटर में मौत हो गई थी।

सीबीआई जांच और ट्रायल

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी। जांच के दौरान गुजरात और राजस्थान पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया। कुल 38 आरोपियों में से 16 पहले ही बरी हो चुके थे। शेष 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ ट्रायल चला, जिन्हें सीबीआई की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। अदालत ने तब कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में नाकाम रहा।

परिवार के वकील की प्रतिक्रिया

रुबाबुद्दीन शेख के अधिवक्ता गौतम तिवारी ने फैसले के बाद कहा,

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस क्या है?
सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस 2005 का वह मामला है जिसमें गुजरात पुलिस पर सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी कौसर बी के अपहरण तथा कथित फर्जी एनकाउंटर में हत्या का आरोप लगाया गया था। उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की भी एक वर्ष बाद कथित एनकाउंटर में मौत हो गई थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 22 पुलिसकर्मियों की बरी के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया, हालांकि विस्तृत आदेश अभी जारी नहीं हुआ है। खारिज करने के विशेष आधार तब स्पष्ट होंगे जब अदालत का पूर्ण लिखित निर्णय सामने आएगा।
इस मामले में कुल कितने आरोपी थे और उनका क्या हुआ?
इस मामले में कुल 38 आरोपी थे, जिनमें से 16 पहले ही बरी हो चुके थे। शेष 22 पुलिसकर्मियों को सीबीआई की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी किया था, और अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी उस फैसले को बरकरार रखा है।
क्या परिवार सुप्रीम कोर्ट जाएगा?
रुबाबुद्दीन शेख के वकील गौतम तिवारी के अनुसार, विस्तृत आदेश आने के बाद परिवार से परामर्श करके सुप्रीम कोर्ट जाने पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि परिवार ने इतने वर्षों में बहुत कुछ झेला है।
इस मामले की जांच किसने की थी?
शुरुआत में राज्य पुलिस ने जांच की, लेकिन मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक पहलुओं को देखते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई। सीबीआई ने जांच के दौरान गुजरात और राजस्थान पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले