सोलापुर मदरसा कांड: 11 वर्षीय छात्रा से छेड़छाड़ की कोशिश, मौलाना उमर रिजवी पॉक्सो में गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के सोलापुर में धार्मिक शिक्षा की आड़ में एक 11 वर्षीय बच्ची से छेड़छाड़ की कोशिश के आरोप में 53 वर्षीय मौलाना उमर रिजवी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, आरोपी मदरसे में मुस्लिम समुदाय की बच्चियों को धार्मिक तालीम देता था। शिकायत में कहा गया है कि वह कक्षा समाप्त होने के बाद बाकी बच्चों को घर भेज देता था और कथित तौर पर केवल पीड़िता को रोककर रखता था। बच्ची ने हिम्मत दिखाते हुए घटना की जानकारी अपने माता-पिता को दी, जिसके बाद परिजनों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस आयुक्त एम. राजकुमार के अनुसार, आरोपी के विरुद्ध लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि हिरासत अवधि में आरोपी से विभिन्न बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या इस तरह की घटनाओं में अन्य बच्चियाँ भी शिकार हुई हैं।
आरोपी की पृष्ठभूमि
जाँच में सामने आया है कि उमर रिजवी मूल रूप से उत्तर प्रदेश का निवासी है और बीते कुछ वर्षों से सोलापुर में रहकर मदरसा संचालन और धार्मिक शिक्षण से जुड़ा हुआ था। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि उसका पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड रहा है या नहीं।
परिजनों की माँग
पीड़िता के परिजनों ने पुलिस से आरोपी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा कि ‘किसी भी सूरत में आरोपी को बख्शा नहीं जाना चाहिए’ और इस तरह की हरकतों पर शून्य सहनशीलता ज़रूरी है। मोहल्ले में भी घटना को लेकर रोष का माहौल है।
व्यापक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश भर में धार्मिक संस्थानों और शिक्षण केंद्रों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज़ है। बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि मदरसा, गुरुकुल या किसी भी आवासीय शिक्षण संस्थान में नाबालिगों के लिए स्वतंत्र निगरानी तंत्र और शिकायत प्रकोष्ठ की आवश्यकता है। पॉक्सो के तहत दोष सिद्ध होने पर आरोपी को कठोर कारावास का प्रावधान है।
आगे क्या
पुलिस हिरासत अवधि समाप्त होने पर आरोपी को पुनः अदालत में पेश किया जाएगा। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण और CrPC की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया भी जारी है।