एसपी बालासुब्रमण्यम: जिनकी आवाज़ के लिए MGR ने एक महीने रोकी थी फिल्म की रिकॉर्डिंग
सारांश
मुख्य बातें
महान पार्श्वगायक श्रीपति पंडिताराध्युला बालासुब्रमण्यम (एसपीबी या ‘बालु’) के जन्मदिवस से ठीक एक दिन पहले उनकी संगीत यात्रा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। 4 जून 1946 को नेल्लोर (आंध्र प्रदेश) में जन्मे इस कलाकार ने 8 फरवरी 1981 को बेंगलुरु में संगीतकार उपेंद्र कुमार के लिए एक ही दिन में 21 कन्नड़ गीत रिकॉर्ड कर ऐसा कीर्तिमान रचा था, जिसकी बराबरी आज तक कोई नहीं कर सका। उनके नाम एक दिन में 19 तमिल और 16 हिंदी गाने रिकॉर्ड करने का बेजोड़ रिकॉर्ड भी दर्ज है।
इंजीनियरिंग से संगीत तक का सफर
बालासुब्रमण्यम के पिता एस. पी. सांबामूर्ति ‘हरिकथा’ कलाकार थे और चाहते थे कि उनका बेटा इंजीनियर बने। पिता की इच्छा का सम्मान करते हुए ‘बालु’ ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की, लेकिन टाइफाइड के कारण पढ़ाई बीच में छूट गई और वे मद्रास (चेन्नई) पहुँच गए। यहीं से उस आवाज़ की यात्रा शुरू हुई जिसने आगे चलकर भारतीय सिनेमा के संगीत-परिदृश्य को बदल दिया।
उनके करियर की औपचारिक शुरुआत 15 दिसंबर 1966 को तेलुगु फिल्म ‘श्री श्री श्री मर्यादा रमन्ना’ के गीत ‘एमिये विंत मोहम’ से हुई। उल्लेखनीय है कि उन्होंने शास्त्रीय संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी।
MGR ने रोक दी थी रिकॉर्डिंग
वर्ष 1969 में तमिल सिनेमा के महानायक एम. जी. रामचंद्रन (MGR) अपनी फिल्म ‘अदिमै पेन’ के गीत ‘आयिरम निलावे वा’ की रिकॉर्डिंग के लिए तैयार थे, लेकिन ऐन वक्त पर बालासुब्रमण्यम बीमार पड़ गए। हैरान करने वाली बात यह रही कि MGR ने लगभग एक महीने तक फिल्म की रिकॉर्डिंग रोक दी, ताकि स्वस्थ होकर वही गायक यह गीत गाएँ। उनके ठीक होने के बाद रिकॉर्ड हुआ यह गाना तमिल फिल्म संगीत में मील का पत्थर बना।
‘शंकराभरणम’ से ‘एक दूजे के लिए’ तक
वर्ष 1980 में जब निर्देशक के. विश्वनाथ ने विशुद्ध कर्नाटक संगीत पर आधारित फिल्म ‘शंकराभरणम’ के गीत उन्हें सौंपे, तो शास्त्रीय संगीत के दिग्गजों को संशय था। लेकिन संगीतकार के. वी. महादेवन के निर्देशन में बालासुब्रमण्यम ने ‘ओंकारा नाधानु’ जैसी जटिल बंदिशें ऐसी गाईं कि उन्हें पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक) मिला।
वर्ष 1981 में के. बालचंदर की फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ से हिंदी सिनेमा में दस्तक देते ही उन्हें ‘तेरे मेरे बीच में’ के लिए दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। आगे चलकर वे बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की पर्दे पर गूँजती आधिकारिक आवाज़ बन गए — चाहे ‘मैंने प्यार किया’ (1989) का ‘दिल दीवाना’ हो या ‘हम आपके हैं कौन…’ (1994) में लता मंगेशकर के साथ गाया कालजयी ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’।
डबिंग में भी मनवाया लोहा
डबिंग की दुनिया में वे कमल हासन की तेलुगु आवाज़ बन चुके थे। फिल्म ‘दशावतारम’ (2008) में कमल हासन के 10 में से 7 किरदारों को उन्होंने अपनी आवाज़ की विविधता से जीवंत किया। उन्होंने हॉलीवुड अभिनेता बेन किंग्सले के लिए फिल्म ‘गांधी’ के तेलुगु संस्करण में भी डबिंग की।
सम्मान और विरासत
भारत सरकार ने उन्हें 2001 में पद्मश्री, 2011 में पद्म भूषण और 2021 में मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया। आंध्र प्रदेश सरकार ने उन्हें रिकॉर्ड 25 बार नंदी पुरस्कारों से नवाज़ा। 5 सितंबर 2020 को चेन्नई के एमजीएम अस्पताल में उन्होंने अंतिम साँस ली। उनकी विरासत को सम्मान देते हुए 15 दिसंबर 2025 को हैदराबाद के रवींद्र भारती में देश के दिग्गजों की उपस्थिति में उनकी कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। आने वाली पीढ़ियों के लिए ‘बालु’ की आवाज़ केवल स्मृति नहीं, बल्कि सीखने का पाठ्यक्रम बनती जा रही है।