इंडी गठबंधन में फूट: सपा-कांग्रेस एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतार रहे — दानिश अंसारी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने 2 अक्टूबर 2026 को विपक्षी गठबंधन 'इंडी' पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस अब एक-दूसरे के विरुद्ध प्रत्याशी खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि गठबंधन के भीतर की दरार अब सार्वजनिक हो चुकी है और दोनों दलों को पहले अपना राजनीतिक रुख स्पष्ट करना चाहिए।
गठबंधन में टकराव की मुख्य वजह
मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि 'इंडी' गठबंधन के दो प्रमुख दल — समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस — परस्पर विरोधी सीटों पर उम्मीदवार उतार रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो दल एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतर रहे हों, वे एकजुट गठबंधन का दावा कैसे कर सकते हैं।
अंसारी ने यह भी आरोप लगाया कि 30 तारीख को हुई गठबंधन की बैठक में कई दल अनुपस्थित रहे और सपा की ओर से भी अपेक्षित भागीदारी नहीं हुई। उन्होंने इसे भीतरी बिखराव का स्पष्ट संकेत बताया।
सपा पर 'गफलत और नफरत' का आरोप
मंत्री ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने 'गफलत और नफरत की राजनीति' को बढ़ावा दिया है। उनके अनुसार, प्रदेश की जनता सपा को इसके लिए कभी माफ नहीं करेगी और 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को अब तक की सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज हो रही हैं और सभी दल अपनी-अपनी रणनीति बना रहे हैं। गौरतलब है कि इंडी गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर पहले भी तनाव के संकेत मिले थे।
BJP की जीत का दावा
अंसारी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 'इंडी' गठबंधन का प्रयोग पूरी तरह विफल साबित हो चुका है। उनके अनुसार, 2027 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।
मोदी की विदेश नीति की सराहना
मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की भी प्रशंसा की और कहा कि प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर पर देश का मान-सम्मान बढ़ाया है। उन्होंने एक 'कैप्टन साहब' से प्रधानमंत्री की बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की वीरता और उपलब्धियों की दुनिया भर में चर्चा हो रही है तथा संबंधित कैप्टन और उनके परिवार का भारत लौटने पर भव्य स्वागत किया जाएगा।
आगे की राजनीतिक तस्वीर
राजनीतिक विश्लेषकों की दृष्टि में सपा और कांग्रेस के बीच का यह खुला टकराव उत्तर प्रदेश में विपक्षी एकता की कमज़ोरी को उजागर करता है। यदि दोनों दल सीट बंटवारे का सामंजस्य नहीं बिठा पाते, तो 2027 के चुनावों में सत्तारूढ़ दल को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।