एसआरएफटीआई कोलकाता में छात्र झड़प पर अधीर रंजन बोले — 'सत्यजीत रे के संस्थान में गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई), कोलकाता में 28 सितंबर को छात्रों के दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने इस घटना को 'बहुत गलत' करार देते हुए कहा कि देश के एक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्थान में इस तरह की हिंसा पश्चिम बंगाल की छवि को नुकसान पहुँचाती है।
मुख्य घटनाक्रम
संस्थान परिसर में अखिल भारतीय गृह पंचायत के एक कार्यक्रम को लेकर तनाव भड़का। संगठन का आरोप है कि कुछ छात्रों ने कार्यक्रम का विरोध करते हुए पोस्टर और बैनर फाड़ दिए। दूसरी ओर, छात्रों ने दावा किया कि उन्हें लात-घूंसों और लाठियों से पीटा गया, चाकू से हमला किया गया, उनके कपड़े फाड़े गए और मोबाइल फोन छीन लिए गए। छात्रों के अनुसार इस हमले में छात्राएँ भी निशाना बनीं।
गौरतलब है कि एसआरएफटीआई वही संस्थान है जिसका नाम महान फिल्मकार सत्यजीत रे के नाम पर रखा गया है — जिन्हें फिल्म जगत के सर्वोच्च सम्मानों में से एक ऑस्कर पुरस्कार से नवाज़ा गया था।
अधीर रंजन चौधरी की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'यह बहुत गलत है। सत्यजीत रे फिल्म इंस्टीट्यूट हमारे देश के लिए गर्व का संस्थान है। सत्यजीत रे को ऑस्कर से सम्मानित किया गया था। ऑस्कर को फिल्म जगत का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है। ऐसे महान फिल्मकार के नाम पर बने संस्थान में इस तरह की गुंडागर्दी राज्य की छवि खराब करती है।'
चौधरी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल में शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक हिंसा को लेकर पहले से ही बहस चल रही है।
डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस का रुख और आरोप
डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजु दत्ता ने कहा कि शिक्षण संस्थानों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने स्वामी विवेकानंद और भारत माता के पोस्टरों के साथ आपत्तिजनक व्यवहार किया और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की माँग की।
दत्ता ने यह भी आरोप लगाया — हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी — कि यह पूरा घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष द्वारा मीडिया का ध्यान ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से हटाने के उद्देश्य से रचा गया था।
गीता-पाठ विवाद और बंगाली संस्कृति पर बहस
इस घटना के समानांतर, कथित तौर पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नागरिकों से निडर होकर श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करने का आह्वान किया और कहा कि राज्य सरकार साधु-संतों का अपमान करने वालों को जेल भेजेगी।
रिजु दत्ता ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है। उन्होंने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री से बंगाली संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करने की अपील भी की।
आगे क्या होगा
फिलहाल मामले में कानूनी कार्रवाई की माँग उठ रही है, लेकिन किसी गिरफ्तारी की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। एसआरएफटीआई प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। विभिन्न दलों के परस्पर विरोधी आरोपों के बीच यह देखना बाकी है कि राज्य सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।