कलाडी विश्वविद्यालय विवाद: एबीवीपी ने एसएफआई प्रदर्शनकारियों को बताया 'कैंपस अपराधी'
सारांश
मुख्य बातें
केरल के कलाडी स्थित श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय में छात्र संगठनों के बीच टकराव एक नए मोड़ पर आ गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 6 नवंबर 2026 को आरोप लगाया कि स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) का नेतृत्व अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करने के बाद खुद को पीड़ित की तरह पेश कर रहा है और विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एसएफआई सदस्य वास्तव में 'कैंपस अपराधी' हैं। यह आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब विश्वविद्यालय परिसर में एसएफआई की एक नेता अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एबीवीपी के आरोप
अलुवा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एबीवीपी के राज्य सचिव यदु कृष्णन ने दावा किया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर रहे छात्र स्वयं कैंपस में हुई झड़पों में शामिल थे। उन्होंने कहा कि एसएफआई यूनिट की अध्यक्ष अर्चना द्वारा की जा रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल उनके विरुद्ध दर्ज मामलों से ध्यान भटकाने की एक कोशिश मात्र है।
कृष्णन ने दावा किया कि कलाडी पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले में अर्चना का नाम है, जो कथित तौर पर घातक हथियारों से छात्रों पर हमले से संबंधित है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एसएफआई के कार्यकर्ता अभिजीत के खिलाफ पेरुम्बावूर की एक अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया है। एसएफआई के कुछ अन्य कार्यकर्ताओं पर भी पुलिस में दर्ज विभिन्न मामलों में शामिल होने का आरोप एबीवीपी ने लगाया।
ट्रांसजेंडर स्कॉलर पर भी आरोप
कृष्णन ने रितुषा पर भी आरोप लगाए, जिन्हें विश्वविद्यालय की पहली ट्रांसजेंडर पीएचडी स्कॉलर बताया जाता है। एबीवीपी नेता का दावा है कि रितुषा ने छात्रों के साथ दुर्व्यवहार किया और परिसर में हुई झड़पों को भड़काया। गौरतलब है कि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्षों का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
एबीवीपी कार्यकर्ताओं के निलंबन का संदर्भ
एबीवीपी नेता ने बताया कि विश्वविद्यालय में मौजूदा अशांति की जड़ें एबीवीपी कार्यकर्ता उज्ज्वल उन्नी और पाँच अन्य छात्रों के निलंबन में हैं। कैंपस में हुई एक झड़प के बाद वामपंथी नेतृत्व वाले सिंडिकेट ने इन छात्रों को नौ महीने के लिए निलंबित कर दिया था। एबीवीपी ने इस झड़प को 'गैर-राजनीतिक' करार दिया है।
कृष्णन ने बताया कि निलंबन के कारण इनमें से पाँच छात्रों को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। बाद में उज्ज्वल उन्नी ने संबंधित पाठ्यक्रम छोड़कर उसी विश्वविद्यालय में एक अन्य कार्यक्रम में प्रवेश लिया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उज्ज्वल उन्नी और एबीवीपी की जिला समिति के सदस्य कृष्णुन्नी भी उपस्थित थे।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
एबीवीपी ने यह भी आरोप लगाया कि पिछली वामपंथी सरकार के कार्यकाल में एसएफआई कैंपस के मुद्दों पर मौन रही थी और अब वह अपने विरोध-प्रदर्शनों के ज़रिए शैक्षणिक माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर रही है। कृष्णन ने शिक्षा विशेषज्ञों और सांस्कृतिक हस्तियों की उस 'चुप्पी' पर भी सवाल उठाया, जो उनके अनुसार एबीवीपी कार्यकर्ताओं के निलंबन के समय देखी गई — और दावा किया कि उनके समर्थन में कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया।
यह विवाद केरल के उच्च शिक्षा परिसरों में एसएफआई और एबीवीपी के बीच जारी दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। फिलहाल एसएफआई की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, और विश्वविद्यालय प्रशासन का रुख भी प्रतीक्षित है।