तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, 10 साल की सजा पर रोक की मांग खारिज
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 6 नवंबर 2026 को तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल की 10 साल की कठोर कारावास की सजा निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी। 2013 के दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए तेजपाल ने अपनी दोषसिद्धि के विरुद्ध दायर अपील की सुनवाई पूरी होने तक सजा पर रोक लगाने की माँग की थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।
पीठ का रुख और अदालती टिप्पणी
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों तथा रिकॉर्ड में उपलब्ध ईमेल और संदेशों सहित समस्त साक्ष्यों का प्रथम दृष्टया परीक्षण करने के पश्चात अदालत सजा पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है। पीठ ने कहा, "पहली नजर में हमें यह मामला सजा निलंबित करने योग्य नहीं लगता।"
तेजपाल के वकीलों की दलीलें
तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि यह ऐसा मामला है जिसमें निचली अदालत के बरी करने के फैसले को पलटा गया है और ऐसे प्रकरणों में अपील लंबित रहने तक सजा पर रोक लगाना सामान्य प्रचलन है। एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल ने बताया कि उनके मुवक्किल ने पूरे मुकदमे के दौरान जमानत पर रहते हुए कभी भी उसकी शर्तों का उल्लंघन नहीं किया। हालाँकि, जस्टिस सुंदरेश की अगुवाई वाली पीठ इन दोनों दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई।
सरकार पक्ष का विरोध
गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सजा निलंबन की माँग का पुरज़ोर विरोध किया। उन्होंने पीड़िता द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद तेजपाल की ओर से भेजे गए माफी ईमेल की सामग्री अदालत में पढ़कर सुनाई, जिसे पीठ ने साक्ष्य के रूप में गंभीरता से लिया। गौरतलब है कि गोवा सरकार ने बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा सुनाई गई 10 साल की सजा को और बढ़ाने की माँग को लेकर भी सर्वोच्च न्यायालय में अलग याचिका दायर की है।
मामले का पूरा घटनाक्रम
यह मामला नवंबर 2013 में गोवा के एक लग्ज़री होटल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उपजा, जब एक जूनियर महिला सहकर्मी ने आरोप लगाया कि तेजपाल ने होटल की लिफ्ट के अंदर उनके साथ यौन हमला किया था। मई 2021 में सत्र अदालत ने तेजपाल को बरी कर दिया था, यह कहते हुए कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे मामला साबित करने में विफल रहा। इसके विरुद्ध गोवा सरकार की अपील पर 6 अगस्त को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बरी करने का फैसला पलटते हुए तेजपाल को दोषी करार दिया और 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आत्मसमर्पण से छूट की माँग भी ठुकराए जाने पर तेजपाल ने 14 सितंबर को गोवा के मापुसा स्थित अतिरिक्त सत्र अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया और उन्हें उत्तरी गोवा के कोलवाले स्थित केंद्रीय कारागार भेज दिया गया।
आगे क्या होगा
3 नवंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने तेजपाल की दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली याचिका और गोवा सरकार की सजा बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई 5 नवंबर तक स्थगित की थी। अब दोनों पक्षों की अपीलें मुख्य सुनवाई के लिए अदालत के समक्ष लंबित हैं और अंतिम फैसला आने तक तेजपाल को जेल में ही रहना होगा।