26 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट का झटका: सरेंडर छूट याचिका खारिज, 22 सितंबर तक आत्मसमर्पण का आदेश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट का झटका: सरेंडर छूट याचिका खारिज, 22 सितंबर तक आत्मसमर्पण का आदेश

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने तरुण तेजपाल को राहत देने से इनकार कर दिया — सरेंडर छूट याचिका खारिज और 22 सितंबर तक आत्मसमर्पण का आदेश। बॉम्बे हाई कोर्ट की 10 साल की सजा के खिलाफ अपील अब आत्मसमर्पण के बाद ही सुनी जाएगी। 2013 से चला आ रहा यह मामला एक निर्णायक मोड़ पर है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 25 अगस्त 2026 को तरुण तेजपाल की सरेंडर छूट याचिका खारिज की।
तेजपाल को 22 सितंबर 2026 तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 6 अगस्त को सत्र अदालत के बरी करने के फैसले को पलटते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
अपील पर सुनवाई केवल आत्मसमर्पण के बाद ही होगी; 22 सितंबर को सरेंडर पर उसी दिन सुनवाई संभव।
यह मामला नवंबर 2013 में गोवा के एक होटल में यौन उत्पीड़न के आरोप से शुरू हुआ था।

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार, 25 अगस्त को तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को बड़ा झटका देते हुए उनकी सरेंडर से छूट की याचिका खारिज कर दी और उन्हें 22 सितंबर 2026 तक आत्मसमर्पण करने का स्पष्ट निर्देश दिया। अदालत ने साफ कर दिया कि 2013 के दुष्कर्म मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा सुनाई गई 10 साल के कठोर कारावास की सजा के विरुद्ध उनकी अपील पर सुनवाई आत्मसमर्पण के बाद ही होगी।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायमूर्ति आलोक आराधे की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया। अदालत ने तेजपाल से 22 सितंबर तक सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल करने को कहा। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित तिथि तक सरेंडर सर्टिफिकेट प्रस्तुत कर दिया जाता है, तो उसी दिन अपील पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि 6 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट ने सत्र अदालत के 2021 के बरी करने के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दुष्कर्म और अन्य अपराधों में दोषी ठहराया था और आत्मसमर्पण के लिए चार सप्ताह का समय दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब उस समय-सीमा को घटाकर दो सप्ताह कर दिया है।

दोनों पक्षों की दलीलें

तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहले ही चार सप्ताह का समय दिया था। सिब्बल ने यह भी तर्क दिया कि तेजपाल प्रारंभिक छह महीने को छोड़कर पूरे मुकदमे के दौरान जमानत पर रहे हैं और अब वरिष्ठ नागरिक हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट (क्रिमिनल अपीलीय क्षेत्राधिकार विस्तार) अधिनियम, 1970 का हवाला देते हुए कहा कि सरेंडर छूट की अर्जी पर अपील के साथ सुनवाई हो सकती है।

वहीं, गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका कड़ा विरोध किया। मेहता ने कहा कि जब तक तेजपाल आत्मसमर्पण नहीं करते या उन्हें विधिवत छूट नहीं मिलती, उनकी अपील पर सुनवाई संभव नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि 1970 के अधिनियम का हवाला इस मामले में लागू नहीं होता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला नवंबर 2013 का है, जब तेजपाल की एक जूनियर सहकर्मी ने गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म का आरोप लगाया था। गोवा पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया और नवंबर 2013 में तेजपाल को गिरफ्तार किया गया। जुलाई 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें नियमित जमानत प्रदान की थी।

यह ऐसे समय में आया है जब उच्च-प्रोफाइल मीडिया हस्तियों से जुड़े यौन उत्पीड़न मामलों में न्यायिक जवाबदेही को लेकर सार्वजनिक विमर्श तेज हो रहा है। तेजपाल का मामला #MeToo आंदोलन से पूर्व का है, फिर भी यह मीडिया जगत में शक्ति के दुरुपयोग की बहस का प्रतीक बना हुआ है।

आगे क्या होगा

यदि तेजपाल 22 सितंबर तक सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल कर देते हैं, तो उसी दिन उनकी अपील पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई शुरू होगी। यदि वे आत्मसमर्पण नहीं करते, तो उनकी अपील सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं होगी और 10 साल के कठोर कारावास की सजा प्रभावी रहेगी। अब सभी की निगाहें 22 सितंबर की तारीख पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अब असली परीक्षा यह है कि क्या अपील की सुनवाई उतनी ही तेज़ी से होगी जितनी ज़रूरत है — ताकि पीड़िता को न्याय में और देरी न हो।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने तरुण तेजपाल को क्या आदेश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 25 अगस्त 2026 को तेजपाल की सरेंडर से छूट की याचिका खारिज करते हुए उन्हें 22 सितंबर तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि उनकी अपील पर सुनवाई आत्मसमर्पण के बाद ही होगी।
तरुण तेजपाल का दुष्कर्म मामला क्या है?
नवंबर 2013 में तेजपाल की एक जूनियर सहकर्मी ने गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म का आरोप लगाया था। गोवा पुलिस ने मामला दर्ज किया और नवंबर 2013 में तेजपाल गिरफ्तार हुए; जुलाई 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दी थी।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने तेजपाल को कब और किस सजा का दोषी ठहराया?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को सत्र अदालत के 2021 के बरी करने के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दुष्कर्म और अन्य अपराधों में दोषी ठहराया और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
22 सितंबर के बाद क्या होगा?
यदि तेजपाल 22 सितंबर तक सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल करते हैं, तो उसी दिन उनकी अपील पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई होगी। यदि वे आत्मसमर्पण नहीं करते, तो अपील पर सुनवाई नहीं होगी और 10 साल की सजा प्रभावी रहेगी।
कपिल सिब्बल और तुषार मेहता ने क्या तर्क दिए?
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तेजपाल की वरिष्ठ नागरिक स्थिति और लंबे समय तक जमानत पर रहने का हवाला देते हुए छूट की मांग की और 1970 के अधिनियम का तर्क दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आत्मसमर्पण के बिना अपील सुनवाई संभव नहीं और 1970 का कानून यहाँ लागू नहीं होता।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 17 घंटे पहले
  2. 5 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 2 सप्ताह पहले
  8. 9 महीने पहले