तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट का झटका: सरेंडर छूट याचिका खारिज, 22 सितंबर तक आत्मसमर्पण का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार, 25 अगस्त को तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को बड़ा झटका देते हुए उनकी सरेंडर से छूट की याचिका खारिज कर दी और उन्हें 22 सितंबर 2026 तक आत्मसमर्पण करने का स्पष्ट निर्देश दिया। अदालत ने साफ कर दिया कि 2013 के दुष्कर्म मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा सुनाई गई 10 साल के कठोर कारावास की सजा के विरुद्ध उनकी अपील पर सुनवाई आत्मसमर्पण के बाद ही होगी।
मुख्य घटनाक्रम
न्यायमूर्ति आलोक आराधे की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया। अदालत ने तेजपाल से 22 सितंबर तक सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल करने को कहा। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित तिथि तक सरेंडर सर्टिफिकेट प्रस्तुत कर दिया जाता है, तो उसी दिन अपील पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि 6 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट ने सत्र अदालत के 2021 के बरी करने के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दुष्कर्म और अन्य अपराधों में दोषी ठहराया था और आत्मसमर्पण के लिए चार सप्ताह का समय दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब उस समय-सीमा को घटाकर दो सप्ताह कर दिया है।
दोनों पक्षों की दलीलें
तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहले ही चार सप्ताह का समय दिया था। सिब्बल ने यह भी तर्क दिया कि तेजपाल प्रारंभिक छह महीने को छोड़कर पूरे मुकदमे के दौरान जमानत पर रहे हैं और अब वरिष्ठ नागरिक हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट (क्रिमिनल अपीलीय क्षेत्राधिकार विस्तार) अधिनियम, 1970 का हवाला देते हुए कहा कि सरेंडर छूट की अर्जी पर अपील के साथ सुनवाई हो सकती है।
वहीं, गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका कड़ा विरोध किया। मेहता ने कहा कि जब तक तेजपाल आत्मसमर्पण नहीं करते या उन्हें विधिवत छूट नहीं मिलती, उनकी अपील पर सुनवाई संभव नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि 1970 के अधिनियम का हवाला इस मामले में लागू नहीं होता।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला नवंबर 2013 का है, जब तेजपाल की एक जूनियर सहकर्मी ने गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म का आरोप लगाया था। गोवा पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया और नवंबर 2013 में तेजपाल को गिरफ्तार किया गया। जुलाई 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें नियमित जमानत प्रदान की थी।
यह ऐसे समय में आया है जब उच्च-प्रोफाइल मीडिया हस्तियों से जुड़े यौन उत्पीड़न मामलों में न्यायिक जवाबदेही को लेकर सार्वजनिक विमर्श तेज हो रहा है। तेजपाल का मामला #MeToo आंदोलन से पूर्व का है, फिर भी यह मीडिया जगत में शक्ति के दुरुपयोग की बहस का प्रतीक बना हुआ है।
आगे क्या होगा
यदि तेजपाल 22 सितंबर तक सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल कर देते हैं, तो उसी दिन उनकी अपील पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई शुरू होगी। यदि वे आत्मसमर्पण नहीं करते, तो उनकी अपील सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं होगी और 10 साल के कठोर कारावास की सजा प्रभावी रहेगी। अब सभी की निगाहें 22 सितंबर की तारीख पर टिकी हैं।