20 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में दी बॉम्बे हाईकोर्ट की 10 साल की सजा को चुनौती, गोवा सरकार ने माँगी बढ़ी सजा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में दी बॉम्बे हाईकोर्ट की 10 साल की सजा को चुनौती, गोवा सरकार ने माँगी बढ़ी सजा

सारांश

पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल और गोवा सरकार — दोनों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, लेकिन विपरीत माँगों के साथ। एक सजा घटाना चाहता है, दूसरी बढ़ाना। 2013 से चला आ रहा यह हाई-प्रोफाइल मामला अब अपने निर्णायक मोड़ पर है।

मुख्य बातें

तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट की 10 साल के कठोर कारावास की सजा को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
गोवा सरकार ने 18 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सजा बढ़ाने की माँग की।
6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने मापुसा सत्र अदालत के बरी करने के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया था।
यह मामला 2013 में गोवा के एक होटल की लिफ्ट में कथित यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट में अब सजा घटाने और बढ़ाने की दो विरोधी याचिकाएँ एक साथ विचाराधीन हैं।

पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दुष्कर्म मामले में सुनाई गई 10 साल के कठोर कारावास की सजा को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इसी मामले में गोवा सरकार ने भी 18 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है और सजा को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाने की माँग की है। अब सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दोनों पक्षों की याचिकाएँ एक साथ विचाराधीन हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह प्रकरण वर्ष 2013 का है, जब तेजपाल पर आरोप लगा कि उन्होंने गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में अपनी एक जूनियर सहयोगी के साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किया। शिकायत दर्ज होने के बाद गोवा पुलिस ने दुष्कर्म सहित भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया और नवंबर 2013 में तेजपाल को गिरफ्तार किया गया।

निचली अदालत का फैसला और हाईकोर्ट में पलटाव

मई 2021 में मापुसा की सत्र अदालत ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। इस फैसले को गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। 6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने निचली अदालत का निर्णय पलटते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत 10 साल के कठोर कारावास एवं जुर्माने की सजा सुनाई।

सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों की याचिकाएँ

हाईकोर्ट के फैसले के बाद दो अलग-अलग मोर्चों पर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। गोवा सरकार का तर्क है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 साल की सजा पर्याप्त नहीं है और दोषी को कड़ा दंड मिलना चाहिए। दूसरी ओर, तरुण तेजपाल ने अपनी याचिका में हाईकोर्ट के दोषसिद्धि के फैसले और सजा दोनों को चुनौती दी है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय में अब एक साथ दो परस्पर विरोधी माँगें हैं — एक ओर दोषी सजा घटाने की गुहार लगा रहा है, तो दूसरी ओर राज्य सरकार सजा बढ़ाने पर जोर दे रही है। यह मामला यौन उत्पीड़न के उन हाई-प्रोफाइल मुकदमों में से एक है जिन्होंने भारत में मीडिया जगत की जवाबदेही पर व्यापक बहस छेड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की तारीख अभी तय होनी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यौन उत्पीड़न मामलों में सजा के मानदंडों को भी प्रभावित करेगा।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में क्यों याचिका दायर की?
तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सुनाई गई 10 साल के कठोर कारावास की सजा और दोषसिद्धि दोनों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। वे हाईकोर्ट के उस फैसले को पलटवाना चाहते हैं जिसने मापुसा सत्र अदालत के बरी करने के निर्णय को रद्द किया था।
गोवा सरकार सुप्रीम कोर्ट क्यों गई?
गोवा सरकार का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दी गई 10 साल की सजा पर्याप्त नहीं है। सरकार ने 18 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर तेजपाल को और कड़ा दंड दिलाने की माँग की है।
तरुण तेजपाल का मूल मामला क्या है?
यह मामला 2013 का है, जब तेजपाल पर गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में अपनी जूनियर सहयोगी के साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म का आरोप लगा था। गोवा पुलिस ने दुष्कर्म सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर नवंबर 2013 में उन्हें गिरफ्तार किया था।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने तेजपाल को कब और कितनी सजा सुनाई?
6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने मापुसा सत्र अदालत के मई 2021 के बरी करने के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत 10 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले का क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अब दो परस्पर विरोधी याचिकाएँ हैं — तेजपाल की सजा घटाने की और गोवा सरकार की सजा बढ़ाने की। सुनवाई की तारीख अभी तय होनी बाकी है और अदालत का फैसला यौन उत्पीड़न मामलों में सजा के मानदंडों पर व्यापक असर डाल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले