18 अगस्त 2026
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तरुण तेजपाल दुष्कर्म मामला: गोवा सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, 10 साल की सजा बढ़ाने की मांग

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तरुण तेजपाल दुष्कर्म मामला: गोवा सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, 10 साल की सजा बढ़ाने की मांग

सारांश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को 10 साल की सजा सुनाई, लेकिन गोवा सरकार इसे अपर्याप्त मान रही है। अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि यौन हिंसा के इस बहुचर्चित मामले में दंड की सीमा क्या होनी चाहिए — और यह फैसला आने वाले मामलों के लिए नजीर बनेगा।

मुख्य बातें

गोवा सरकार ने 18 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर तरुण तेजपाल की सजा बढ़ाने की मांग की।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को तेजपाल को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
मापुसा सत्र अदालत ने मई 2021 में सबूतों के अभाव में तेजपाल को बरी कर दिया था, जिसे गोवा सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
यह मामला 2013 में गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में जूनियर सहकर्मी के साथ कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ा है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि यौन हिंसा मामलों में समाज को कड़ा संदेश देना जरूरी है।

पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल के दुष्कर्म मामले में गोवा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दी गई 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा को अपर्याप्त बताते हुए उसे बढ़ाने की मांग की है। 18 अगस्त 2026 को दाखिल इस अपील के साथ यह मामला अब देश की सर्वोच्च न्यायपालिका के समक्ष एक नए चरण में प्रवेश कर गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह प्रकरण वर्ष 2013 का है, जब तेजपाल पर अपनी एक जूनियर सहकर्मी के साथ गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। शिकायत के आधार पर गोवा पुलिस ने दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया और नवंबर 2013 में तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था।

गौरतलब है कि मई 2021 में मापुसा की सत्र अदालत ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। गोवा सरकार ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया और बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

6 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसंडेकर की खंडपीठ ने निचली अदालत के बरी करने के आदेश को पलटते हुए तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया। खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सत्र अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया और महत्वपूर्ण सबूतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दोषी मानते हुए 10 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।

सजा पर विभिन्न पक्षों की दलीलें

सजा पर सुनवाई के दौरान तेजपाल की ओर से सजा पर रोक लगाने और सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए समय देने की माँग की गई थी। वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि यौन हिंसा के मामलों में समाज को कड़ा संदेश दिया जाना आवश्यक है।

गोवा सरकार की सुप्रीम कोर्ट में अपील

गोवा सरकार का तर्क है कि मामले की गंभीरता और इसके सामाजिक निहितार्थों को देखते हुए हाईकोर्ट द्वारा दी गई 10 वर्ष की सजा पर्याप्त नहीं है। राज्य सरकार की याचिका में दोषी को अधिक कठोर दंड दिए जाने की मांग की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब यौन उत्पीड़न के मामलों में दंड की पर्याप्तता पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो रही है।

आगे क्या होगा

अब सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि गोवा सरकार की सजा बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई की जाए या नहीं। इस मामले में तेजपाल की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में राहत के लिए अपील किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत का फैसला यौन अपराध मामलों में सजा के मानकों पर एक महत्वपूर्ण नजीर स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह यौन हिंसा मामलों में 'पर्याप्त दंड' की परिभाषा पर एक बड़े सवाल को जन्म देता है। यह मामला 13 साल पुराना है, और इस दौरान निचली अदालत का बरी करना, हाईकोर्ट का पलटना — यह सफर दर्शाता है कि शक्तिशाली आरोपियों से जुड़े मामलों में न्याय कितना लंबा और जटिल हो सकता है। सॉलिसिटर जनरल की 'कड़े संदेश' वाली दलील और राज्य सरकार की सजा बढ़ाने की मांग यह संकेत देती है कि सरकार इस मामले को प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण मानती है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला यौन अपराध कानून की व्याख्या में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तरुण तेजपाल दुष्कर्म मामला क्या है?
यह 2013 का मामला है जिसमें पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल पर गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में अपनी जूनियर सहकर्मी के साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म का आरोप लगा था। गोवा पुलिस ने नवंबर 2013 में उन्हें गिरफ्तार किया था।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने तेजपाल को क्या सजा दी?
6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसंडेकर की खंडपीठ ने तेजपाल को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत 10 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। इससे पहले मापुसा सत्र अदालत ने मई 2021 में उन्हें बरी कर दिया था।
गोवा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्यों दाखिल की?
गोवा सरकार का मानना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट द्वारा दी गई 10 साल की सजा पर्याप्त नहीं है। राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत से दोषी को अधिक कठोर दंड दिलाने की मांग की है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
अब सुप्रीम कोर्ट गोवा सरकार की सजा बढ़ाने की याचिका पर विचार करेगा। तेजपाल की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में राहत के लिए अपील की संभावना है। शीर्ष अदालत का फैसला यौन अपराध मामलों में सजा के मानकों पर महत्वपूर्ण नजीर बन सकता है।
निचली अदालत ने तेजपाल को बरी क्यों किया था?
मई 2021 में मापुसा सत्र अदालत ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2026 में इस फैसले को पलटते हुए कहा कि निचली अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया।
राष्ट्र प्रेस
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