तरुण तेजपाल दुष्कर्म मामला: गोवा सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, 10 साल की सजा बढ़ाने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल के दुष्कर्म मामले में गोवा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दी गई 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा को अपर्याप्त बताते हुए उसे बढ़ाने की मांग की है। 18 अगस्त 2026 को दाखिल इस अपील के साथ यह मामला अब देश की सर्वोच्च न्यायपालिका के समक्ष एक नए चरण में प्रवेश कर गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह प्रकरण वर्ष 2013 का है, जब तेजपाल पर अपनी एक जूनियर सहकर्मी के साथ गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। शिकायत के आधार पर गोवा पुलिस ने दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया और नवंबर 2013 में तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था।
गौरतलब है कि मई 2021 में मापुसा की सत्र अदालत ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। गोवा सरकार ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया और बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
6 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसंडेकर की खंडपीठ ने निचली अदालत के बरी करने के आदेश को पलटते हुए तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया। खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सत्र अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया और महत्वपूर्ण सबूतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दोषी मानते हुए 10 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
सजा पर विभिन्न पक्षों की दलीलें
सजा पर सुनवाई के दौरान तेजपाल की ओर से सजा पर रोक लगाने और सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए समय देने की माँग की गई थी। वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि यौन हिंसा के मामलों में समाज को कड़ा संदेश दिया जाना आवश्यक है।
गोवा सरकार की सुप्रीम कोर्ट में अपील
गोवा सरकार का तर्क है कि मामले की गंभीरता और इसके सामाजिक निहितार्थों को देखते हुए हाईकोर्ट द्वारा दी गई 10 वर्ष की सजा पर्याप्त नहीं है। राज्य सरकार की याचिका में दोषी को अधिक कठोर दंड दिए जाने की मांग की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब यौन उत्पीड़न के मामलों में दंड की पर्याप्तता पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो रही है।
आगे क्या होगा
अब सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि गोवा सरकार की सजा बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई की जाए या नहीं। इस मामले में तेजपाल की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में राहत के लिए अपील किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत का फैसला यौन अपराध मामलों में सजा के मानकों पर एक महत्वपूर्ण नजीर स्थापित कर सकता है।