तरुण तेजपाल ने गोवा कोर्ट में किया सरेंडर, कोलवाले जेल भेजे गए — 2013 रेप केस में 10 साल की सजा
सारांश
मुख्य बातें
तहलका के पूर्व संपादक-प्रमुख तरुण तेजपाल ने सोमवार, 14 सितंबर 2026 को गोवा के मापुसा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायालय के समक्ष सरेंडर कर दिया, जिसके बाद उन्हें उत्तरी गोवा के कोलवाले सेंट्रल जेल भेज दिया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में उन्हें दोषी ठहराए जाने और 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाए जाने के कुछ हफ्ते बाद यह सरेंडर हुआ।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और सरेंडर की प्रक्रिया
सर्वोच्च न्यायालय ने 25 अगस्त 2026 को 62 वर्षीय तेजपाल को स्पष्ट निर्देश दिया था कि वे 22 सितंबर 2026 तक या उससे पहले सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल करें। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सजा को चुनौती देने वाली अपील पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई तभी होगी, जब वे सरेंडर सर्टिफिकेट प्रस्तुत कर दें।
तेजपाल की तत्काल राहत की याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। जस्टिस आलोक अराधे की एकल-न्यायाधीश पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया।
अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें
तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को सरेंडर के लिए चार हफ्ते का समय दिया था और शुरुआती छह महीनों को छोड़कर पूरी कार्यवाही के दौरान तेजपाल जमानत पर रहे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि तेजपाल वरिष्ठ नागरिक हैं और सुप्रीम कोर्ट अधिनियम 1970 के तहत अपील के साथ-साथ छूट याचिका पर भी विचार किया जा सकता है।
इसके विपरीत, गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि सरेंडर सर्टिफिकेट जमा किए बिना अपील की सुनवाई संभव नहीं है। उन्होंने 1970 के अधिनियम के हवाले को भी गलत ठहराया और कहा कि यह एक अस्थायी कानून था तथा अपीलीय क्षेत्राधिकार अब प्रचलित वैधानिक प्रावधानों से संचालित होता है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला नवंबर 2013 में गोवा के एक लग्जरी होटल में आयोजित एक कार्यक्रम से संबंधित है, जहाँ तेजपाल की एक जूनियर सहयोगी ने आरोप लगाया कि उन्होंने लिफ्ट के अंदर उनका यौन उत्पीड़न किया। गोवा पुलिस ने रेप सहित कई अपराधों के लिए एफआईआर दर्ज की और नवंबर 2013 में अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जुलाई 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें नियमित जमानत दी।
मई 2021 में सत्र न्यायालय ने तेजपाल को बरी कर दिया, यह कहते हुए कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे मामला साबित करने में असफल रहा और जाँच में कथित कमियों का भी उल्लेख किया। इसके बाद गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी।
बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला और गोवा सरकार की अपील
6 अगस्त 2026 को जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसांडेकर की खंडपीठ ने सत्र न्यायालय के बरी करने के फैसले को पलट दिया और तेजपाल को भारतीय दंड संहिता के तहत रेप एवं अन्य अपराधों का दोषी ठहराते हुए 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। गौरतलब है कि गोवा सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में यह भी अपील की है कि बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को और बढ़ाया जाए।
सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि यदि सरेंडर सर्टिफिकेट समय पर दाखिल होता है तो 22 सितंबर 2026 को अपील को गुण-दोष के आधार पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। आगे की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि हाईकोर्ट की सजा बरकरार रहती है, घटती है या गोवा सरकार की माँग के अनुसार बढ़ाई जाती है।