6 अगस्त 2026
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तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट ने रेप केस में सुनाई 10 साल की कठोर सजा, 2021 का बरी का फैसला पलटा

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तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट ने रेप केस में सुनाई 10 साल की कठोर सजा, 2021 का बरी का फैसला पलटा

सारांश

बारह साल की कानूनी लड़ाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को 10 साल की कठोर सजा सुनाई — 2021 का बरी का फैसला पलटते हुए। यह निर्णय मीडिया जगत में यौन उत्पीड़न के उन मामलों में न्यायिक जवाबदेही की दिशा में एक बड़ा कदम है जो #MeToo से पहले के हैं।

मुख्य बातें

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को तरुण तेजपाल को 2013 के रेप केस में 10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई।
अदालत ने मापुसा सेशंस कोर्ट के मई 2021 के बरी करने के फैसले को पलटा।
तेजपाल को IPC धारा 376(2)(एफ), 376(2)(के), 354ए और 354बी के तहत दोषी ठहराया गया।
अदालत ने दो सप्ताह के भीतर जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण का निर्देश दिया।
तेजपाल के वकील ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील के लिए आठ सप्ताह की सजा पर रोक की माँग की।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यौन हिंसा के विरुद्ध कड़ा संदेश देने की आवश्यकता पर बल दिया।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार, 6 अगस्त को 'तहलका' पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को नवंबर 2013 में गोवा के एक लग्जरी होटल में अपनी जूनियर सहयोगी के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में 10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई। अदालत ने मापुसा की सेशंस कोर्ट के मई 2021 के बरी करने के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत रेप और यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया।

मुख्य फैसला और धाराएँ

जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसंडेकर की खंडपीठ ने तेजपाल को IPC धारा 376(2)(एफ) और 376(2)(के) (रेप), धारा 354ए (यौन उत्पीड़न) और धारा 354बी के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने तेजपाल को जेल अधिकारियों के समक्ष दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।

गौरतलब है कि यह मामला उस घटना से जुड़ा है जब कथित तौर पर तेजपाल ने गोवा के एक लग्जरी होटल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लिफ्ट के भीतर पीड़िता के साथ यौन उत्पीड़न किया था।

बचाव पक्ष की दलीलें और सजा पर रोक की माँग

सजा की सुनवाई के दौरान तेजपाल के अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करने के लिए सजा पर आठ सप्ताह की रोक लगाने का अनुरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय ने बरी करने के आदेश को पलटा है और तेजपाल के विरुद्ध कोई अन्य आपराधिक मामला लंबित नहीं है।

तेजपाल ने स्वयं जस्टिस गोखले की पीठ से नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने खुद को पीड़ित बताते हुए अदालत से सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने का अनुरोध किया।

अभियोजन पक्ष का तर्क

बचाव पक्ष की इस अपील का विरोध करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से यौन हिंसा के विरुद्ध कड़ा संदेश देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'जब कोई लड़की 'ना' कहती है, तो उसका मतलब 'ना' ही होता है।' अभियोजन पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के विरुद्ध साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन करने के बजाय घटना के बाद पीड़िता के व्यवहार और उसकी पृष्ठभूमि पर अनुचित ध्यान केंद्रित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

गोवा पुलिस ने नवंबर 2013 में रेप सहित कई आरोपों में तेजपाल के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की थी। स्थानीय अदालत द्वारा अग्रिम जमानत अर्जी अस्वीकार किए जाने के बाद उन्हें उसी माह गिरफ्तार किया गया था। जुलाई 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें नियमित जमानत दी।

मई 2021 में अतिरिक्त सेशंस जज क्षमा जोशी ने तेजपाल को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि अभियोजन पक्ष मामले को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। उन्होंने जाँच में कथित कमियों का भी उल्लेख किया था, जिनमें सीसीटीवी फुटेज जैसे अहम साक्ष्य प्रस्तुत न किए जाने की बात शामिल थी।

गोवा सरकार की अपील और हाईकोर्ट का रुख

गोवा सरकार ने बरी करने के उस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी, यह तर्क देते हुए कि ट्रायल कोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों की सही व्याख्या नहीं की। अभियोजन पक्ष ने विशेष रूप से उस माफीनामा ईमेल का हवाला दिया जो कथित तौर पर तेजपाल ने तब भेजा था, जब पीड़िता ने प्रकाशन के तत्कालीन प्रबंध संपादक के समक्ष आरोप उठाए थे। हाईकोर्ट ने गोवा सरकार की अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया।

यह फैसला मीडिया जगत में यौन उत्पीड़न के उन मामलों की लंबी कानूनी लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ है जो #MeToo आंदोलन से पहले सामने आए थे। तेजपाल के सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने की संभावना के साथ यह कानूनी प्रक्रिया अभी जारी रह सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तरुण तेजपाल को किस मामले में सजा सुनाई गई है?
तरुण तेजपाल को नवंबर 2013 में गोवा के एक लग्जरी होटल में लिफ्ट के भीतर अपनी जूनियर सहयोगी के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें IPC की धाराओं 376(2)(एफ), 376(2)(के), 354ए और 354बी के तहत 10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई।
2021 में तेजपाल को बरी क्यों किया गया था और अब वह फैसला क्यों पलटा?
मई 2021 में मापुसा की अतिरिक्त सेशंस जज क्षमा जोशी ने तेजपाल को इस आधार पर बरी किया था कि अभियोजन पक्ष मामला संदेह से परे साबित नहीं कर सका और जाँच में कमियाँ थीं। गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की, जिसमें तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट ने माफीनामा ईमेल जैसे अहम साक्ष्य नजरअंदाज किए और पीड़िता के आचरण पर अनुचित ध्यान दिया — जिसे हाईकोर्ट ने सही माना।
तेजपाल को अब कब जेल जाना होगा?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। हालाँकि उनके वकील ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील के लिए आठ सप्ताह की रोक माँगी है, जिस पर अदालत का रुख अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।
इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की क्या भूमिका रही?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अभियोजन पक्ष की ओर से तेजपाल की सजा पर रोक की माँग का विरोध किया। उन्होंने अदालत से यौन हिंसा के विरुद्ध कड़ा संदेश देने का आग्रह करते हुए कहा कि 'जब कोई लड़की ना कहती है, तो उसका मतलब ना ही होता है।'
तरुण तेजपाल कौन हैं और यह मामला कब शुरू हुआ?
तरुण तेजपाल 'तहलका' पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक हैं, जो अपनी खोजी पत्रकारिता के लिए जाने जाते थे। नवंबर 2013 में गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद गोवा पुलिस ने उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की और उन्हें उसी माह गिरफ्तार किया गया। जुलाई 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें नियमित जमानत दी थी।
राष्ट्र प्रेस
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