तरुण तेजपाल मामला: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई फिर टली, 5 नवंबर को होगी अगली तारीख
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय में 3 नवंबर 2026 को तहलका पत्रिका के पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल की याचिका पर सुनवाई एक बार फिर टाल दी गई है। यौन शोषण के दोषी तेजपाल द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट की 10 साल की कठोर कारावास की सजा को चुनौती देने वाली याचिका और गोवा सरकार की सजा बढ़ाने की माँग वाली याचिका — दोनों पर अब 5 नवंबर 2026 को सुनवाई होगी। यह मामला 2013 में एक होटल की लिफ्ट में जूनियर सहयोगी के साथ दुष्कर्म की घटना से जुड़ा है।
सुनवाई में क्या हुआ
सुनवाई के दौरान तेजपाल के वकील कपिल सिब्बल ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि उनके मुवक्किल को दीपावली अवकाश में घर जाने की अनुमति दी जाए। हालाँकि, गोवा सरकार की ओर से इस माँग का कड़ा विरोध किया गया। कोर्ट ने इस अनुरोध पर कोई तत्काल आदेश नहीं दिया और सुनवाई अगली तारीख पर स्थानांतरित कर दी।
मामले की पृष्ठभूमि
6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने निचली अदालत के बरी करने के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद 25 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया। तेजपाल ने 14 सितंबर को गोवा की एक अदालत में आत्मसमर्पण किया और उन्हें उत्तरी गोवा के कोलवाले केंद्रीय जेल में भेज दिया गया।
सर्वोच्च न्यायालय में अब तक की सुनवाई का क्रम
25 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने तेजपाल की याचिका पर गोवा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा था। 15 अक्टूबर की सुनवाई में मामले को 3 नवंबर तक के लिए स्थगित किया गया था। गोवा सरकार ने कोर्ट को बताया था कि उसने तेजपाल की याचिका पर अपना जवाब दाखिल कर दिया है। वकील कपिल सिब्बल ने पूर्व सुनवाई में कोर्ट को सूचित किया था कि तेजपाल ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार सरेंडर कर लिया है।
गोवा सरकार का पक्ष
गोवा सरकार न केवल तेजपाल की याचिका का विरोध कर रही है, बल्कि उसने स्वयं भी सजा बढ़ाने की माँग वाली याचिका दायर की हुई है। सरकार की ओर से तेजपाल को दीपावली पर घर जाने की अनुमति देने के अनुरोध का भी विरोध किया गया, जो इस मामले में सरकार के कठोर रुख को दर्शाता है। गौरतलब है कि यह मामला एक दशक से अधिक समय से न्यायिक प्रक्रिया में है।
आगे क्या होगा
अब सर्वोच्च न्यायालय में 5 नवंबर 2026 को दोनों पक्षों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होगी — तेजपाल की सजा को चुनौती देने वाली और गोवा सरकार की सजा बढ़ाने की माँग वाली। इस सुनवाई में कोर्ट तेजपाल के घर जाने के अनुरोध पर भी कोई निर्णय ले सकता है। यह मामला भारतीय मीडिया जगत और न्यायिक व्यवस्था दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बनने की संभावना रखता है।