तरुण तेजपाल मामला: सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 3 नवंबर को, गोवा सरकार ने दाखिल किया जवाब
सारांश
मुख्य बातें
सुप्रीम कोर्ट ने तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल की 10 साल की सज़ा को चुनौती देने वाली याचिका और गोवा सरकार की सज़ा बढ़ाने की माँग पर सुनवाई 3 नवंबर 2026 तक के लिए स्थगित कर दी है। अदालत में गोवा सरकार ने सूचित किया कि उसने तेजपाल की याचिका पर अपना जवाब दाखिल कर दिया है।
मामले का ताज़ा घटनाक्रम
6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने निचली अदालत के बरी करने के फ़ैसले को पलटते हुए तरुण तेजपाल को साल 2013 में एक होटल की लिफ्ट में जूनियर सहयोगी के साथ बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया था और 10 साल के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई थी। इसके बाद तेजपाल ने इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
25 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की याचिका पर गोवा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा था। इसी सुनवाई के दौरान तेजपाल के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया था कि उनके मुवक्किल ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार आत्मसमर्पण कर दिया है।
सरेंडर और जेल
14 सितंबर को तरुण तेजपाल ने गोवा की एक अदालत में सरेंडर किया, जिसके बाद उन्हें उत्तरी गोवा के कोलवाले सेंट्रल जेल भेज दिया गया। इससे पहले 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट का फ़ैसला आने के कुछ हफ्तों बाद तेजपाल ने सरेंडर किया — यह वह अवधि थी जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी की।
दोनों पक्षों की याचिकाएँ
इस मामले में दो अलग-अलग याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हैं — एक तेजपाल की ओर से 10 साल की सज़ा को चुनौती देते हुए, और दूसरी गोवा सरकार की ओर से सज़ा को और कड़ा करने की माँग लेकर। अब दोनों याचिकाओं पर एकसाथ 3 नवंबर 2026 को सुनवाई होगी।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब यौन उत्पीड़न के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और सज़ा की सख्ती पर राष्ट्रीय बहस जारी है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 2013 का है, जब तहलका पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान गोवा के एक होटल की लिफ्ट में एक जूनियर महिला सहयोगी के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटना हुई थी। निचली अदालत ने पहले तेजपाल को बरी कर दिया था, किंतु बॉम्बे हाईकोर्ट ने उस फ़ैसले को पलट दिया। यह मामला भारतीय मीडिया जगत में यौन उत्पीड़न के सबसे चर्चित और लंबे चले मुकदमों में से एक रहा है।
अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी, जिसमें तय होगा कि सज़ा यथावत रहती है, घटती है, या बढ़ाई जाती है।